फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Ground Report: Lok Sabha Elections 2024 Political atmosphere of Khunti Lok Sabha seat of Jharkhand

ग्राउंड रिपोर्ट: खिलाड़ी पुराने...जीत उसी मुंडा की जिसके तरकश में नए तीर; खूंटी में लहराता रहा है भगवा

Sun, 12 May 2024 06:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा विनीत सक्सेना
विनीत सक्सेना Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 12 May 2024 06:42 AM IST
विज्ञापन
सार
दुमका में झामुमो दो चुनाव से भाजपा से जूझ रहा है, तो खूंटी में यही हाल भाजपा का है। पिछले चुनाव में कई बार मतगणना के बाद महज 1445 वोटों से हुई भाजपा प्रत्याशी अर्जुन मुंडा की जीत आज भी चर्चा में है। इस बार भी मुंडा की सीट एकतरफा निकलती दिखाई नहीं दे रही।
loader
Ground Report: Lok Sabha Elections 2024 Political atmosphere of Khunti Lok Sabha seat of Jharkhand
अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

आठ बार के भाजपा सांसद कड़िया मुंडा के लिए खूंटी ऐसा ही था, जैसे झामुमो के शिबू सोरेन के लिए दुमका लोकसभा सीट। दिलचस्प बात यह कि इन खांटी नेताओं की बुजुर्गियत के चलते जो हाल आज खूंटी का है, तकरीबन वैसा ही दुमका का भी। दुमका में झामुमो दो चुनाव से भाजपा से जूझ रहा है, तो खूंटी में यही हाल भाजपा का है। पिछले चुनाव में कई बार मतगणना के बाद महज 1445 वोटों से हुई भाजपा प्रत्याशी अर्जुन मुंडा की जीत आज भी चर्चा में है। इस बार भी मुंडा की सीट एकतरफा निकलती दिखाई नहीं दे रही। इंडिया गठबंधन के कालीचरण प्रचार में भले ही भाजपा से पिछड़ते दिख रहे हों, मगर जनसमर्थन में बराबर की टक्कर दे रहे हैं। भारत झारखंड पार्टी और झारखंड पार्टी के अलावा कई निर्दलीय प्रत्याशी भी जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं। लोगें का मानना है कि अर्जुन मुंडा और कालीचरण मुंडा दोनों ही जोड़-घटाव के माहिर खिलाड़ी हैं। जिसके तरकश में ज्यादा और नए तीर होंगे, बाजी वही मार ले जाएगा। 

शहर से गांवों तक पटे झंडे-बैनर और प्रचार वाहनों से भी काफी हद तक मुकाबले की झलक मिल जाती है। भले ही भाजपा और भगवा झंडों से बाजार अटे पड़े हों, मगर महागठबंधन के झंडे-बैनर भी दिखाई दे रहे हैं। कहीं भी ऐसा दिखाई नहीं दिया कि दोनों दलों में किसी का भी एकतरफा माहौल हो। 

88 साल के हो चुके कडि़या मुंडा भी भाजपा की जीत के लिए पूरा गणित लगा रहे हैं। खुद अर्जुन मुंडा गांव-गांव में बैठकें कर रहे हैं, मगर भाव बता रहे कि मामला टक्कर का है। कडि़या मुंडा के गांव अनिगारा में भी ऐसी ही चर्चाएं हैं। यहीं के सूरजनाथ महतो कहते हैं, भाजपा जीतेगी, मगर हालात ऐसे हैं कि कडि़या मुंडा को इस उम्र में भी ताकत झोंकनी पड़ रही है। घनश्याम महतो कहते हैं कि मुकाबला टक्कर का होगा, मगर जीतेगी भाजपा ही। यहां पीएम मोदी और राम मंदिर के नाम पर समर्थन मिल रहा है। हालांकि, ऊपर चौक के बंगाली पासवान को गठबंधन पर भरोसा है। कहते हैं, झामुमो के प्रति आदिवासियों का रुझान तो रहता ही है, मगर कुछ जगह भाजपा की पकड़ भी बनी है। व्यापारी मो. हबीब मुस्कुराते हुए कहते हैं- टक्कर कितनी भी तगड़ी हो, मगर पिछली बार की तरह भाजपा जीत जाए तो हैरत किसी को नहीं होगी..। कपड़ों की दुकान चलाने वाले नाजिम कहते हैं-कांग्रेस की स्थिति ठीक है, मगर जीत-हार का मालूम नहीं...।  

खूंटी में लहराता रहा है भगवा 
नक्सल प्रभावित जिला खूंटी भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली भी है। बिरसा मुंडा झारखंड के प्रणेता माने जाते हैं। आजादी की लड़ाई के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी थी। 1967 में बनी इस सीट पर पहली बार कांग्रेस जीती, मगर कड़े मुकाबले में। कांग्रेस के जय सिंह को 24.2%, निर्दलीय पी कच्छप को 21.4%, भाजपा को 15.4% और स्वतंत्र पार्टी को 12.8% मत मिले थे। 1971 में निर्दलीय मिरल एनेम होरो जीते। 

1977 के चुनाव में भारतीय लोक दल से कड़िया मुंडा ने जीत दर्ज की थी। 1989 को खूंटी की राजनीति में भाजपा के मजबूत प्रादुर्भाव का समय कहा जा सकता है। कड़िया मुंडा की जीत के बाद यह सीट लगातार भाजपा के कब्जे में रही है। बिहार से अलग होकर झारखंड बनने के बाद हुए पहले चुनाव में 2004 में यह सीट भाजपा के हाथ से चली गई। तब कांग्रेस की सुशीला केरकेट्टा ने जीत दर्ज की। कड़िया मुंडा तीसरे नंबर पर रहे। 2009, 2014 में कड़िया फिर जीते। 

2019 में अर्जुन मुंडा 11 प्रत्याशियों की भिड़ंत में फंस गए थे। माना जाता है कि अर्जुन मुंडा ने ही निर्दलीय मीनाक्षी मुंडा को खड़ा करवाया था। मीनाक्षी ने 10,989 मत हासिल कर कांग्रेस के कालीचरण की राह में बड़ा रोड़ा बनी थीं। जीत-हार के अंतर को देखते हुए मीनाक्षी को मिले वोट टर्निंग प्वाइंट साबित हुए। नौ निर्दलीयों ने 47,864 वोट हासिल किए थे, जिससे जीत का अंतर बेहद कम रहा था। 

बबीता ने लड़ाई को कठिन बनाया 
इस बार भारत आदिवासी पार्टी भी मैदान में है। इसकी उम्मीदवार बेलोस बबीता कच्छप वही हैं, जिन्होंने सात वर्ष पूर्व पत्थलगड़ी आंदोलन खड़ा किया था। बेलोस ही नहीं, झारखंड पार्टी की अपर्णा हंस समेत कई निर्दलीय भी मैदान में हैं। 2019 में मोदी लहर में भी अर्जुन मुंडा जीत को बस छू भर पाए थे। लिहाजा, इस बार भी लड़ाई कठिन ही होने वाली है। खूंटी लोकसभा में छह विधानसभा सीटे हैं। 

पिछले दो लोकसभा चुनाव के नतीजे 

                                                  लोकसभा चुनाव 2019
उम्मीदवार दल मत%
अर्जुन मुंडा भाजपा  45.94
कालीचरण मुंडा कांग्रेस 45.77 

 

                                                  लोकसभा चुनाव 2014
उम्मीदवार दल मत%
कड़िया मुंडा भाजपा  36.49 
कालीचरण मुंडा कांग्रेस 19.93 

     

   

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed