{"_id":"6620639aa2795ce3030c08e4","slug":"ground-report-direct-contest-between-bjp-and-tmc-in-jalpaiguri-what-are-the-issues-for-the-voters-2024-04-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ground Report: वाम दलों के गढ़ जलपाईगुड़ी में भाजपा और तृणमूल का सीधा मुकाबला, क्या हैं मतदाताओं के मुद्दे","category":{"title":"Lok Sabha","title_hn":"लोकसभा","slug":"lok-sabha"}}
Ground Report: वाम दलों के गढ़ जलपाईगुड़ी में भाजपा और तृणमूल का सीधा मुकाबला, क्या हैं मतदाताओं के मुद्दे
सार
उत्तर बंगाल की सियासत तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई जैसा बन चुका है। शायद यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम ममता बनर्जी सरीखे शीर्ष नेता दोनों दलों के प्रत्याशियों का प्रचार करने में कोई कसर बाकी रखना नहीं चाहते। रोजगार, चाय बागान और पर्यटन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। जलपाईगुड़ी का कैसा है सियासी मिजाज बता रहे हैं विजय त्रिपाठी।
विज्ञापन
भाजपा नेता डॉ जयंत कुमार रॉय और टीएमसी नेता निर्मल चंद्ररॉय
- फोटो : सौजन्य- चुनाव आयोग हलफनामा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इस संसदीय सीट की तासीर कुछ अलग है। थोड़ी सख्त...थोड़ी नरम और गरम भी। मतदाता भी खास हैं। एकदम मौन। चुप्पी ऐसी कि भाजपा के पक्ष में हैं या फिर तृणमूल के...आप जान ही नहीं सकते। हां, अगर आपकी बोली...भाषा इन्हें अपनेपन का अहसास करा दे तो फिर लीजिए ...ये बेधड़क-बेहिचक हो जाएंगे,बेबाकी से पूरी बात बयां कर देंगे। इसके बाद मुतमईन हो जाएंगे कि आखिर लेफ्ट के इस गढ़ में पैठ बनाने के लिए तृणमूल, फिर भाजपा को क्यों लंबी मशक्कत करनी पड़ी।
विज्ञापन
यह सीट 2009 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। कुल सात विधानसभा क्षेत्रों में पांच पर तृणमूल, तो दो भाजपा के पाले में है। 2019 में पहली बार कमल खिला। जयंत कुमार रॉय ने दीदी के गढ़ में मोदी मैजिक दिखाया। आशंकाओं और तृणमूल की घेराबंदी के बाद भी अप्रत्याशित रूप से 33.63 प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल 50.65% मतों के साथ जीत दर्ज की।
विज्ञापन
सीट की महत्ता इससे जान लीजिए कि यहां मोदी और ममता दोनों जोर लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जनसभा कर स्थानीय देव-देवियों का उल्लेख कर आरोप लगाया कि केंद्र की योजनाओं का लाभ राज्य सरकार उन तक नहीं पहुंचने दे रही। वहीं, ममता ने आरोप लगाया कि राज्य के हिस्से का पैसा केंद्र नहीं दे रहा है। इस छोटे पर्यटक शहर में चाय के बागान और धान की खेती बड़े पैमाने पर हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और बेरोजगारी बड़ी समस्या है। इलाज के लिए मुंबई, दक्षिण भारत की दौड़ लगानी पड़ती है।
विज्ञापन
सीपीएम के गढ़ में भाजपा की सेंधमारी
1962 में वजूद में आए संसदीय क्षेत्र पर लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा। 1980 से यह सीट सीपीएम की हुई, तो लगातार 2009 तक रही। 2014 में तृणमूल ने यहां खाता खोला। 2019 में भाजपा के जयंत ने भगवा लहराकर सभी को दंग कर दिया। इस बार भी सीधा मुकाबला भाजपा और तृणमूल में ही है। भाजपा ने मौजूदा सांसद डॉ. जयत कुमार रॉय को फिर से उतारा है, तो तृणमूल ने निर्मल चंद्र रॉय व सीपीआईएम ने देबराज बर्मन को मैदान में उतारा है।
भाजपा या तृणमूल...वोटरों को किसकी पसंद आएगी चाय
राज्य में सर्वाधिक और बड़े-बड़े चाय बागान यहीं हैं और उतनी ही बड़ी बागान मजदूरों की समस्याएं। मजदूरी का कोई पैमाना नहीं, आर्थिक सुरक्षा के लिए पीएफ, पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं। सही-सस्ते इलाज को भी मोहताज। सबसे मजबूत वोटबैंक होने के बावजूद इनसे हर दल ने छल किया। चाय बागान मालिक बाजार की चुनौतियों का अपना अलग रोना रोते हैं। दोनों दलों ने चाय बागान मजदूरों को लुभाने की कोशिश की है। मोदी ने रैली में आरोप लगाया कि ममता इनका भला नहीं होने दे रहीं और सिर्फ चुनावी लाभ के लिए उनका ख्याल करती हैं।
मजदूरों की नाराजगी की परवाह ममता को भी है, इसीलिए चालसा इलाके में प्रचार के दौरान एक चाय बागान पहुंचीं और मजदूरों से बातचीत की। समस्याएं दूर किए जाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने अपने हाथों से चाय बनाकर मजदूरों को पिलाई भी। इसका खुलासा होना बाकी है कि किस चायवाले की चाय मजदूरों ने पसंद की।
जलपाईगुड़ी : पिछले दो चुनावों के हाल
2019
उम्मीदवार दल मत%
जयंत कुमार रॉय भाजपा 50.63
बिजॉय चंद्र बर्मन तृणमूल 38.37
2014
बिजॉय चंद्र बर्मन तृणमूल 37.93
महेंद्र कुमार रॉय सीपीएम 32.60
सत्यलाल सरकार भाजपा 16.99
जातीय गुणा गणित
जलपाईगुड़ी की 80% से ज्यादा आबादी दलित व आदिवासी समाज से आती है। यहां एससी आबादी 40%, एसटी आबादी 30, मुस्लिम 10.52 और ईसाई 4.15% हैं। राजबोंग्शी करीब 30% हैं। नेपाली भाषी 4.5, हिंदी भाषी 3 और करीब 2% लिंबू हैं।
राजनीतिक विश्लेषक बुरोशिव दासगुप्त कहते हैं कि उत्तर बंगाल के दोनों क्षेत्रों में चाय मजदूरों की समस्याएं और मांगें बड़ा मुद्दा है। आंदोलन के कारण कई बागान बंद हैं, मजदूर बेरोजगार। ममता ने कुछ सालों में चार-पांच बागान फिर से चालू कराए हैं, इससे करीब एक लाख मजदूरों को फिर से काम मिला है। इसका चुनाव में उन्हें लाभ मिल सकता है। भाजपा ने भी केंद्र की योजनाओं का यहां लोगों को लाभ दिलाया है।