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Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Contest between BJP, Shiv Sena and UBT candidates in Ratnagiri-Sindhudurg Lok Sabha constituency

LS Polls 2024: असली शिवसेना किसकी? अब जनता की अदालत में होगा फैसला

Fri, 03 May 2024 10:58 PM IST
मिथिलेश नौटियाल डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Fri, 03 May 2024 10:58 PM IST
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सार
LS Polls 2024: शिवसेना में टूट के बाद पार्टी के परंपरागत मतदाताओं के दो दावेदार पैदा हुए हैं- बाला साहेब ठाकरे के पुत्र उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, जिनके द्वारा फिलहाल असली शिवसेना होने का दावा किया जा रहा है।
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Contest between BJP, Shiv Sena and UBT candidates in Ratnagiri-Sindhudurg Lok Sabha constituency
नारायण राणे और विनायक राउत - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को रत्नागिरी में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे नकली शिवसेना चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि असली शिवसेना एकनाथ शिंदे चला रहे हैं, जो उनके गठबंधन का हिस्सा हैं। अमित शाह ने कहा कि उद्धव ठाकरे आज वीर सावरकर का नाम तक नहीं ले सकते क्योंकि अब वे एक ऐसे गठबंधन का हिस्सा हैं, जिसके सहयोगी दल अनुच्छेद 370 का समर्थन करते रहे हैं। रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग में इस बार लड़ाई भाजपा के प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और उद्धव ठाकरे गुट के प्रत्याशी विनायक राउत के बीच है। राउत इस सीट पर वर्तमान सांसद भी हैं। 


अमित शाह ने उद्धव ठाकरे के नकली शिवसेना चलाने की बात महाराष्ट्र के उस इलाके में की है, जो मुंबई के बाद शिवसेना के दूसरे मजबूत गढ़ के रूप में देखा जाता रहा है। रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग के इलाके में बाला साहब ठाकरे के समय से शिवसेना ने मजबूत पकड़ बनाई थी, जो अब तक बरकरार है। इस इलाके में बाला साहब ठाकरे आज भी एक आदर्श के तौर पर देखे जाते हैं। 

शिवसेना में टूट के बाद पार्टी के परंपरागत मतदाताओं के दो दावेदार पैदा हुए हैं- बाला साहेब ठाकरे के पुत्र उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, जिनके द्वारा फिलहाल असली शिवसेना होने का दावा किया जा रहा है। शिवसेना के परंपरागत मतदाताओं पर पकड़ बनाने के लिए ही अमित शाह ने उद्धव ठाकरे पर एक सोचा-समझा हमला रत्नागिरी के इलाके में किया है।     

अब तक किसकी पकड़?
रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग लोकसभा में कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें से तीन रत्नागिरी इलाके में, तो तीन सिंधुदुर्ग में हैं। इनमें तीन विधानसभा सीटों पर इंडी गठबंधन का (दो शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और एक एनसीपी) कब्जा है, जबकि तीन विधानसभा सीटों पर एनडीए (दो शिवसेना एकनाथ गुट और एक भाजपा) का कब्जा है। यानी मोटे तौर पर इस समय दोनों गठबंधनों की पकड़ बराबर है।   
लेकिन पुरानी शिवसेना के तौर पर देखें, तो इन छह विधानसभा सीटों में से चार पर शिवसेना और एक-एक पर भाजपा-एनसीपी ने जीत हासिल की थी। इसका अर्थ साफ है कि टूट से पहले इस पूरे क्षेत्र पर शिवसेना की मजबूत पकड़ बनी हुई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग के इलाके में बालासाहेब ठाकरे की लोकप्रियता अभी भी बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में बहुत बड़ी संख्या में शिवसेना के ऐसे परंपरागत मतदाता हैं, जो केवल तीर-धनुष का चुनाव चिन्ह देखकर ही शिवसेना के उम्मीदवारों को वोट करते आए हैं। इस चुनाव में यह निशान एकनाथ शिंदे गुट के पास है। 
नारायण राणे शिवसेना के बड़े नेता रहे हैं, लिहाजा क्षेत्र पर उनकी अपनी पकड़ भी है। विशेषकर सिंधुदुर्ग इलाके में उनकी पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती है। जबकि रत्नागिरी इलाके में शिवसेना के मजबूत चेहरे रहे उदय सामंत अब एकनाथ शिंदे गुट में हैं और नारायण राणे को समर्थन दे रहे हैं। 

परंपरागत मतदाता किसे देंगे वोट?
कोंकण क्षेत्र के एक समाचार पत्र की संपादक देवयानी वारस्कर ने अमर उजाला को बताया कि महाराष्ट्र के साथ-साथ इस क्षेत्र में बहुत बड़ी संख्या में ऐसे परंपरागत मतदाता हैं, जो आज भी बालासाहेब ठाकरे को अपना आदर्श मानते हैं। ऐसे लोग एकनाथ शिंदे और अजित पवार के भाजपा के साथ जाने को सही नहीं मानते हैं। 
देवयानी वारस्कर ने कहा कि जिस तरह का असर रत्नागिरी में शिवसेना के पारंपरिक मतदाताओं के बीच उद्धव ठाकरे के लिए देखा जा रहा है, ठीक उसी तरह का असर बारामती-सतारा क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता शरद पवार के लिए देखा जा रहा है। अजित पवार के शरद पवार का साथ छोड़ने के बाद भी बहुत ज्यादा नुकसान होने की संभावना नहीं है। 
उन्होंने कहा कि भाजपा के पक्ष में सबसे मजबूत बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस पूरे इलाके में विकास का जबरदस्त कार्य किया है। महाराष्ट्र में विकास का जो कार्य पिछले दस सालों में देखा गया है, वह इसके पहले कभी नहीं देखा गया था। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विशेष समर्थक वर्ग तैयार हुआ है, जो अब राजनीतिक दलों की परंपरागत सोच से आगे बढ़कर मोदी का समर्थन कर रहा है। 
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल मात्र नहीं है। यह अल्पसंख्यकों, पाकिस्तान और वीर सावरकर पर एक अलग विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी रही है। उसके परंपरागत मतदाता उसे उन्हीं कारणों से पसंद करते रहे हैं। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने और फिर उसे चलाने के लिए कुछ मुद्दों पर कई बार अपने परंपरागत स्टैंड में बदलाव किया है। ऐसे में शिवसेना के परंपरागत मतदाताओं का एक वर्ग, विशेषकर युवा वर्ग, यह बदलाव पसंद नहीं करेगा। 
कुमार राकेश ने कहा कि अमित शाह ने जिस तरह वीर सावरकर का मुद्दा रत्नागिरी में उठाया है, वह बहुत सोचा-समझा तीर है जो शिवसेना के परंपरागत मतदाताओं को ध्यान में रखकर चलाया गया है। देश के कई इलाकों में भाजपा ने यह कार्य सफलतापूर्वक किया है। पार्टी की योजना कितनी कारगर रही, इसका पता तो चार जून को चुनाव परिणाम सामने आने पर ही पता चल सकेगा।

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