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कहानी चुनाव की: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने सूडान में पूरा कराया चुनाव, पद्मभूषण से हो चुके हैं सम्मानित

Sun, 31 Mar 2024 07:25 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sun, 31 Mar 2024 07:25 AM IST
सार

चुनाव आयोग की किताब लीप ऑफ फेथ : जर्नी ऑफ इंडियन इलेक्शंस में दर्ज है कि सूडान में चुनाव कराने के लिए सेन ने 14 महीने विदेश में बिताए। उन्होंने भारतीय चुनाव से जुड़े नियम-कानूनों को ही अफ्रीकी-अरबी राष्ट्र की जरूरत के अनुसार बदलाव कर इस्तेमाल किया।

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Chief Election Commissioner of India Padma Bhushan winner Sukumar Sen completed elections in Sudan
सुकुमार सेन

विस्तार

भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को एक नहीं बल्कि दो-दो देशों में पहला आम चुनाव कराने का श्रेय हासिल है। सेन ने भारत में सफलतापूर्वक आम चुनाव कराकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। उन्होंने ऐसी धाक जमाई कि पश्चिम एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका तक के अनेक देशों ने चुनावों के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए भारत से संपर्क किया। इसी पृष्ठभूमि में सेन को पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश सूडान में चुनाव कराने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय आयोग की अध्यक्षता सौंपी गई।

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खास यह...भारत सरकार ने 1954 में जब नागरिक पुरस्कारों की शुरुआत की तो सेन को लोक सेवाओं में योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। सुकुमार 21 मार्च, 1950 को मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे।
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14 महीने विदेश में रहे सेन
चुनाव आयोग की किताब लीप ऑफ फेथ : जर्नी ऑफ इंडियन इलेक्शंस में दर्ज है कि सूडान में चुनाव कराने के लिए सेन ने 14 महीने विदेश में बिताए। उन्होंने भारतीय चुनाव से जुड़े नियम-कानूनों को ही अफ्रीकी-अरबी राष्ट्र की जरूरत के अनुसार बदलाव कर इस्तेमाल किया। सूडान में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित चुनाव केवल दो प्रतिशत की साक्षरता दर के बावजूद सफल रहे थे।
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अमेरिकी राजदूत हैरान
भारत के चुनावों के वैश्विक महत्व को भारत में अमेरिकी राजदूत (1951-53) चेस्टर बाउल्स की टिप्पणियों से भी समझा जा सकता है। बाउल्स आम चुनाव से कुछ महीने पूर्व ही भारत आए और कई हिस्सों में घूमने के बाद कहा, मैंने 10 करोड़ से अधिक भारतीयों के मतदान करने का अद्भुत दृश्य देखा है और मैं इससे बड़ी किसी उपलब्धि की कल्पना नहीं कर सकता।

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