फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Bjp performance in South Indian States Karnataka, Telangana, Kerala Andhra in Lok Sabha Election

Lok Sabha Election: भाजपा का दक्षिण भारत में मिला-जुला असर, केरल में खोला खाता, तो इस राज्य में रहे बेअसर

Tue, 04 Jun 2024 07:18 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 04 Jun 2024 07:18 PM IST
सार

दक्षिण भारत के पांच राज्यों तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में से सिर्फ एक कर्नाटक ही ऐसा है, जहां भाजपा सरकार भी चला चुकी है। इस साल के रुझानों के मुताबिक, भाजपा का असर मिला-जुला रहा।

विज्ञापन
Bjp performance in South Indian States Karnataka, Telangana, Kerala Andhra in Lok Sabha Election
भाजपा का दक्षिण में ऐसा रहा प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव के सातवें चरण का मतदान एक जून को संपन्न हो गया। आज यानी चार जून को मतगणना हो रही है, जिसमें तय हो जाएगा कि देश में किसकी सरकार बनने जा रही है। अंतिम चरण का मतदान संपन्न होने के बाद एग्जिट पोल (चुनाव बाद सर्वेक्षण) भी सामने आ गए। सभी सर्वे में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को प्रचंड बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि रुझानों के मुताबिक, भाजपा कुछ खास असर नहीं छोड़ पाई। तमिलनाडु में तो भाजपा अपना खाता तक नहीं खोल पाई। वहीं,  कर्नाटक में भी साल 2019 के चुनाव के नतीजों यानी 25 सीट की तुलना में इस बार महज 19 सीट पर ही जीत दर्ज कर सकी।  

विज्ञापन

 

एग्जिट पोल से लग रहा था कि इस बार एनडीए के लिए दक्षिण के द्वार पूरी तरह से खुल जाएंगे। ऐसा इसलिए भी लग रहा था क्योंकि पीएम मोदी की अगुवाई में भाजपा ने दक्षिण में अपनी पैठ बनाने के लिए इन सभी राज्यों पर काफी ध्यान दिया था। पर अब रुझानों की माने तो भाजपा के हाथ निराशा लगी है।

विज्ञापन

 

आइए जानते हैं दक्षिण राज्यों की सीटों का समीकरण-
 

गौरतलब है, दक्षिण में सबसे बड़ा राज्य तमिलनाडु है, जिसमें लोकसभा 39 सीटे हैं। वहीं कर्नाटक में 28, आंध्र प्रदेश में 25, केरल में 20 और तेलंगाना में कुल 17 सीट सीटें हैं। इन सभी सीटों पर अलग-अलग चरण में मतदान हुआ था। आज इन्हीं सीटों पर नतीजे आने हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

दक्षिण भारत में भाजपा कांग्रेस से आगे थे क्षेत्रीय दल

दक्षिण भारत से कुल 132 सांसद चुनकर आते हैं। दक्षिण भारत की ये सीटें तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार जैसे कुल आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आती हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में 132 में से कांग्रेस और भाजपा दोनों ने 29-29 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं इन दलों से काफी आगे क्षेत्रीय पार्टियों के 74 सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचे थे।
 
राज्य              सीटें        भाजपा          कांग्रेस      अन्य         
तमिलनाडु 39 0 8 31
कर्नाटक 28 25 1 2
आंध्र प्रदेश 25 0 0 25
तेलंगाना 17 4 3 10
केरल 20 0 15 5
पुडुचेरी 1 0 1 0
लक्षद्वीप 1 0 0 1
अंडमान निकोबार   1 0 1 0
  132 29 29 74

इस राज्य में खोला खाता

दक्षिण भारत के पांच राज्यों तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में से सिर्फ एक कर्नाटक ही ऐसा है, जहां भाजपा सरकार भी चला चुकी है। भाजपा को 2019 के चुनाव में इन पांच राज्यों 129 सीटों में से 29 पर जीत मिली थी। हालांकि, एग्जिट पोल में कहा गया था कि भाजपा पहली बार केरल में खाता खोलने जा रही है, जो रुझानों में भी सही साबित हुआ। 

इस राज्य में जीतकर भी निराशा हाथ लगी 

वहीं एग्जिट पोल में यह भी अनुमान लगाया गया था कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भी सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए को फिर से एकतरफा जीत हासिल मिलेगी। यह अनुमान भी सटीक साबित हुए। रुझानों के मुताबिक, भाजपा के खाते में 17 सीटें और जेडीएस के खाते में दो सीटें गईं। इससे भाजपा जीत तो गई, लेकिन कहीं न कहीं पहले की तरह अपना जादू नहीं चला पाई। 2019 के चुनाव में 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि अब महज 19 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। 

 

2019 का हाल

साल 2019 के चुनाव नतीजों की ही बात करें तो भाजपा इन 129 में से 29 सीटें ही जीत सकी थी। इसमें भी 25 सीटें कर्नाटक की थीं। यानि कर्नाटक की 28 सीटें निकाल दें तो भाजपा चार राज्यों की 101 सीटों में से महज चार सीटें ही जीत सकी थी और ये सभी सीटें तेलंगाना की थीं।

बड़े नेताओं पर दांव

भाजपा ने दक्षिण की मुश्किल पिच पर केंद्रीय मंत्रियों और बड़े नेताओं को उतारा। केरल की ही बात करें तो जिस राज्य में पार्टी कभी खाता नहीं खोल सकी, उस राज्य से दो केंद्रीय मंत्रियों को मैदान में उतारा। और रुझानों में इसका फायदा दिखा भी। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन के अलावा अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी को भी भाजपा ने केरल से लोकसभा चुनाव लड़ाया।


भाजपा का सपना फिर अधूरा रह गया

दक्षिण भारत के पांच बड़े राज्यों का एग्जिट पोल काफी हद तक हैरान करने वाला था। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ये थी कि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भाजपा के लिए जीतना बड़ी चुनौती रहा है। जबकि एग्जिट पोल में इसके उलट उम्मीद जताई गई थी। हालांकि रुझानों के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को सबसे ज्यादा कहीं झटका लगा है तो तमिलनाडु में। यहां खाता खोलने का सपना भाजपा का एक बार फिर अधूरा रह गया। यहां डीएमके ने 22 सीटें अपने नाम करा ली हैं। 



 

तेलंगाना में अभी भी टक्कर

अगर तेलंगाना की बात करें तो यहां अभी भी कड़ी टक्कर चल रही है। रुझानों में भाजपा और कांग्रेस के खाते में आठ-आठ सीटें गई हैं। जबकि एआईएमआईएम को एक सीट मिली है। हालांकि, 2019 की तुलना में यहां भाजपा का असर होता दिखाई दिया। 2019 के चुनाव में भाजपा को महज चार सीटें मिली थी।

रुझानों के मुताबिक, इस साल दक्षिण में भाजपा के खाते में गईं इतनी सीटें

राज्य              सीटें        2019          2024    
तमिलनाडु 39 00 00
कर्नाटक 28 25 17
आंध्र प्रदेश 25 00 03
तेलंगाना 17 04 08
केरल 20 00 01
पुडुचेरी 1 00 00
लक्षद्वीप 1 00 00
अंडमान निकोबार   1 00 01
  132 29 30

फिर सपना रह गया अधूरा

इनके अलावा, आंध्र प्रदेश में भी भाजपा को जीत मिलने का अनुमान लगाया गया था। कहा जा रहा था कि दक्षिण का किला फतह करने का भाजपा का लक्ष्य पूरा हो सकता है। भाजपा ने जीत का गणित लगाते हुए इस बार अकेले मैदान में उतरने की बजाय गठबंधन पर फोकस किया था। आंध्र प्रदेश में भाजपा चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और पवन कल्याण की जनसेना से गठबंधन कर उतरी। रुझानों के अनुसार, गठबंधन की वजह से ही भाजपा आंध्र प्रदेश में जीत दर्ज कर सकी है। क्योंकि यहां भाजपा को तीन सीटें मिली हैं। जबकि टीडीपी को 16 और जेएनपी को दो सीटें मिली हैं। वहीं इस गठबंधन को टक्कर देने वाली वाईएसआरसीपी के खाते में चार सीटें गई हैं।

पीएम मोदी ने की थीं सैकड़ों रैलियां

भाजपा ने दक्षिण की जमीन को कमल खिलने के अनुकूल बनाने के लिए सत्ता में आते ही अपने सबसे बड़े चेहरे को आगे कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता के बाद पिछले 10 साल में दक्षिणी राज्यों के 146 दौरे किए। आधिकारिक और अनाधिकारिक इन यात्राओं के दौरान पीएम मोदी ने कुल मिलाकर 356 कार्यक्रमों में शिरकत की। इसमें खास ये है कि इसमें 144 जनसभाएं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed