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Ground Report Ghaziabad : गाजियाबाद में भाजपा के सामने गढ़ आबाद रखने की चुनौती, पीएम भी कर चुके हैं रोड शो

Mon, 15 Apr 2024 06:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा चंद्रभान यादव, गाजियाबाद
चंद्रभान यादव, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 15 Apr 2024 06:00 AM IST
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सार
इस बार भाजपा ने नया प्रयोग करते हुए दो बार से सांसद रहे जनरल वीके सिंह (रिटायर्ड) का टिकट काट कर वैश्य समाज से आने वाले विधायक अतुल गर्ग पर दांव लगाया है, जबकि विपक्षी गठबंधन की ओर से कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज की डॉली शर्मा को दोबारा मौका दिया है।
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BJP faces the challenge of keeping its stronghold in Ghaziabad
जस्सीपुरा में चुनावी चौपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजियाबाद लोकसभा सीट वीवीआईपी सीटों में शुमार है। 2008 में अस्तित्व में आई सीट पर भगवा परचम ही फहरा रहा है। यही नहीं, हर बार जीत का मार्जिन भी बढ़ता गया। भाजपा के इस गढ़ में प्रधानमंत्री रोड शो कर चुके हैं। इस बार भाजपा ने नया प्रयोग करते हुए दो बार से सांसद रहे जनरल वीके सिंह (रिटायर्ड) का टिकट काट कर वैश्य समाज से आने वाले विधायक अतुल गर्ग पर दांव लगाया है, जबकि विपक्षी गठबंधन की ओर से कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज की डॉली शर्मा को दोबारा मौका दिया है।  बसपा ने पहले यहां से अंशय कालरा को आगे बढ़ाया था, पर बाद में भाजपा से आए ठाकुर बिरादरी के नंद किशोर पुंडीर को मैदान में उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया। 



गाजियाबाद में मॉल, मल्टीप्लेक्स, रेल मार्ग, मेट्रो सहित सभी नगरीय सुविधाएं हैं। सुबह करीब नौ बजे हम शास्त्रीनगर पहुंचे। यहां मिले एक निजी कंपनी में कार्य करने वाले रोहित चौधरी चुनावी माहौल पर चर्चा छिड़ते ही कहते हैं, देखिए, माहौल तो भाजपा के ही पक्ष में है। क्या मुद्दे हैं? इस सवाल पर वह कहते हैं, सरकार का फोकस नौकरी पर कम है। यही सबसे बड़ा मुद्दा है। साथ में मौजूद शैलेंद्र जैन, अमित सिंह भी हां में हां मिलाते हैं। वे सरकारी नौकरी के साथ ही शहर में जाम, प्रदूषण का भी मुद्दा उठाते हैं। वे कहते हैं, यह सब नेताओं के एजेंडे में नहीं होना दुर्भाग्य की बात है। 


पुलिस आयुक्त कार्यालय के सामने हमें डाॅ. बैजनाथ सिंह मिले। वह आयुष्मान योजना की तारीफ करते हुए कहते हैं, हम तो भाजपा की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। पर, हार-जीत के अंतर को लेकर मुतमईन नहीं हैं। उन्हें डर है कि कहीं ठाकुर मतदाता बसपा के साथ न चले जाएं। कवि नगर के विजय शंकर मिश्रा कहते हैं, विपक्ष ने दमदार उम्मीदवार दिए होते तो कांटे का संघर्ष हो सकता था। यहां ज्यादातर दूसरे राज्यों और अलग-अलग जिलों से आकर लोग बसे हैं। वे भाजपा से ज्यादा प्रभावित दिखते हैं, पर ग्रामीण क्षेत्रों में उतना असर नहीं दिखता है। 

अगर-मगर तो बहुत, पर जाना कहां है इस पर असमंजस नहीं
दोपहर के करीब 12 बजे हम गाजियाबाद शहर के जस्सीपुरा मोहल्ले में पहुंचे। यहां मिले मो. जाकिर अली सैफी चुनावी चर्चा छिड़ते ही नेताओं के वादों आैर गलतबयानी पर नाराजगी जताने लगते हैं। कहते हैं, नेता सिर्फ 'गोली' देते हैं। समस्या के समाधान के बजाय हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई पैदा करते हैं। चुनाव आने के बाद अतुल गर्ग भी गलियों में दिखने लगे हैं। पांच साल बाद डॉली शर्मा भी मंदिर और मस्जिद पहुंचने लगी हैं। 

  • जस्सीपुरा में ही मिलीं अर्चना अग्रवाल, अनुराधा अग्रवाल, शोभा कपूर चुनावी चर्चा पर कहती हैं कि आम आदमी महंगाई से परेशान है। बड़े नेता मदद नहीं करते हैं। अभी तक मोहल्ले में गैस पाइपलाइन नहीं आई है। वोट के सवाल पर सभी कहती हैं कि भाजपा को वोट देंगे। क्यों? इस सवाल पर कहती हैं मजबूत विकल्प नहीं है। वहीं, अमित राजा स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देते हैं। सफाई, सीवर व्यवस्था और गाजियाबाद के विभिन्न गेट के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए।
  • जस्सीपुरा से आगे बढ़ते ही हमें व्यापारी मुस्तकीन मिले। वह कहते हैं, हम तो गठबंधन के साथ हैं। उनकी दुकान पर काम करने वाले अभयाराम गुर्जर, विनोद भारद्वाज भी यही कहते हैं। कुरैशी मार्केट के भी लोग कांग्रेस के साथ नजर आते हैं।

माहौल की थाह ले रहे मतदाता
नोएडा से बुलंदशहर हाईवे से कुछ दूरी पर है धौलाना विधानसभा क्षेत्र का ककराना गांव। यहां चाय की दुकान पर कई युवा बैठे मिले। चुनावी चर्चा के बीच सुमित सिंह तोमर भाजपा का माहौल बताते हैं। हालांकि, वह कहते हैं कि इस सीट पर अब तक ठाकुर प्रत्याशी जीतते रहे हैं, गर्ग को उतारे जाने से ठाकुरों में कुछ नाराजगी है। अमित सिंह और ठाकुर वीरेंद्र भी ऐसी ही बात करते हैं। वे कहते हैं कि हम तो पुंडीर के साथ जाएंगे। इन दोनों की बात को काटते हुए जसवंत सिंह सपा-कांग्रेस गठबंधन को जरूरी बताते हैं। वह कहते हैं कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए सपा-कांग्रेस के साथ रहेंगे।

  • पिलखुवा के लोग चुनावी चर्चा छिड़ते ही हैंडलूम उद्योग को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हैं। यहां मिले शकील राइनी कहते हैं, हथकरघा रोजगार का मूल साधन है। सरकार बढ़ावा दे, तो पूरे इलाके का विकास होगा। दिनेश गर्ग कहते हैं कि पिलखुवा के लिए काफी काम हुए हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ होना बाकी है। इसे विस्तार देने की जरूरत है।

ये हैं समर के योद्धा

  • अतुल गर्ग, भाजपा : गाजियाबाद से विधायक हैं। भाजपा के परंपरागत वोटबैंक पर पकड़। गढ़ आबाद रखने और रिकॉर्ड कायम रखने की चुनौती। ठाकुर वोटबैंक में सेंध लगने से रोकने की भी चुनौती है। 
  • डॉली शर्मा, कांग्रेस : पिछले चुनाव में डॉली शर्मा 1,11,944 वोट हासिल की थीं। उनका वोट शेयर 7.34 प्रतिशत था। जबकि सपा के सुरेश बंसल 4,43,003 वोट पाए थे। ऐसे में डॉली के सामने सबसे बड़ी चुनौती सपा के मूल वोटबैंक को जोड़ने की है।
  • नंद किशोर पुंडीर, बसपा : बसपा के परंपरागत वोटबैंक को साधने के साथ ही ठाकुर बिरादरी में सेंध लगाने की कोशिश। हालांकि गैर जाटव दलित वोटबैंक को जोडे़ रखने की चुनौती है।

अयोध्या का असर गाजियाबाद तक
मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र के रजापुर कस्बे में महिर्ष वाल्मीकि मंदिर है। यहां मिले वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि अयोध्या एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। यह समाज के लिए सम्मान की बात है। कहते हैं, पहले हम बसपा के साथ थे, लेकिन अब भाजपा के साथ हैं। सांसद का टिकट कटने के सवाल पर कहते हैं, वीके सिंह वीआईपी थे, जबकि अतुल गर्ग हम लोगों के बीच के हैं। को-ऑपरेटिव बैंक से सेवानिवृत्त हरिश्चंद्र भी कहते हैं कि वे भाजपा सरकार के सभी कार्यों से संतुष्ट हैं। वे सफाईकर्मियों को नियमित करने का मुद्दा उठाते हैं। चुनावी माहौल पर वह कहते हैं, रालोद के साथ आने से अब गुर्जर और जाट एक साथ हैं। 

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