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Exclusive: नीतीश के 20 साल के सुशासन पर कन्हैया ने उठाए सवाल, 'बाहरी बनाम बिहारी' पर कही ये बड़ी बात
सार
Congress leader Kanhaiya Kumar Interview: कांग्रेस के युवा नेता कन्हैया कुमार ने अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में नीतीश सरकार के सुशासन और टिकट वितरण से जुड़ी बातों पर राय रखी है....
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कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष द्वारा रोजगार, पेपर लीक और नीतीश कुमार के 20 साल के शासन को चुनावी बनाया गया है। महागठबंधन लगातार पीएम मोदी और अदाणी का नाम लेकर हमलावर है। विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे इन मुद्दों पर कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने खुलकर अपनी राय रखी, साथ ही उन्होंने टिकट बंटवारे को लेकर मची खींतचान पर भी बात की है। पढ़ें, कन्हैया कुमार के साथ विशेष बातचीत के अंश...।
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सवाल- ऊंट किस करवट बैठने जा रहा है.....कांग्रेस का जो मोमेंटम बना था लेकिन चुनाव आते-आते थोड़ा सा मध्यम पड़ता दिखाई पड़ता है। इसको कैसे देख रहे हैं आप?
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कन्हैया कुमार: इस एक बात में कई सारे सवाल हैं। एक तो ऊंट नहीं होता है बिहार में। बिहार में शादी ब्याह में ऊंट लाए जाते हैं। तो किसी भी करवट बैठे क्या लेना देना है? बिहार की जनता का जो मूड है ऊंट के मुकाबले वो ज्यादा इंपॉर्टेंट है। बिहार के समाज के किसी भी हिस्से और वर्ग के व्यक्ति से यदि बात करें और उनसे एक ही सवाल पूछे कि मौजूदा जो शासन व्यवस्था है उससे आप खुश हैं तो लोग नकारात्मक उत्तर देंगे बोलेंगे नहीं इसमें कोई दो राय नहीं है। अब इतनी अस्पष्ट मत होने के बावजूद सरकार क्यों नहीं बदलती है? यह निराशा असंतोष और यह गुस्सा परिवर्तन में क्यों परिणत नहीं होता है? सकारात्मक परिणाम क्यों नहीं आते हैं? उसके कई कारण हो सकते हैं। पिछले 15 दिन से मीडिया को गजब चिंता हुई है हमारी। हमारी चिंता छोड़ कर अगर बिहार के 14 करोड़ लोगों की कर लें तो आज भी अभी 10 दिन है जिसमें बिहार के लोगों के मुद्दों की बात हो सकती है। अंग्रेज जाते-जाते जो है ना कुछ अपनी विरासत छोड़ के गए हैं। वो करते थे डिवाइड एंड रूल और आजकल हो रहा है डायवर्ट एंड रूल। तो मौजूदा जो सरकार है वो जो सत्ताधारी दल है उनको विरासत में मिल जाती है।मौजूदा सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है। गुस्सा इसलिए है इसी पटना की सड़क पर जहां हम लोग बैठे हुए हैं। हर महीने स्टूडेंट के ऊपर लाठियां बरसाई गई हैं। कोई ऐसा एग्जाम नहीं है जो ठीक से हुआ हो। बीपीएससी का एग्जाम हो, किसी डिपार्टमेंट का एग्जाम हो। समय पर एग्जाम नहीं होता है। पेपर लीक हो जाते हैं। फिर स्टूडेंट जब प्रोटेस्ट करते हैं उनके ऊपर डंडे चलाए जाते हैं। शिक्षक अभर्थियों पे डंडे चलाए गए। आपको जो है डोमिसाइल नीति की मांग कर रहे स्टूडेंट पर डंडे चलाए गए।
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सवाल- नीतीश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के कुछ नेता हमलावर रुख अपना रहे हैं, जो एनडीए का मुख्यमंत्री का चेहरा है। तेजस्वी समेत कुछ लोग संवेदनाएं दिखा रहे हैं, कुछ उन्हें बिहार की स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं?
कन्हैया कुमार: जो शिंद के साथ हुआ वो नीतीश जी के साथ होगा। अगर एनडीए को बहुमत में आया और अगर आपके हिसाब से ऊंट अगर दक्षिण दिशा में बैठ रहा है अगर ऐसा हुआ तो फिर उनका वही होगा जो शिंद का हुआ था। एक फर्क है। वहां पर शिंद साहब पहले आए शिवसेना बाद में तोड़ी गई। यहां जेडीयू पहले आ गई है। नीतीश जी बाद में निपटाए जाएंगे। गलती से अगर एनडीए को बहुमत आया तो बस शपथ ही लेंगे नीतीश जी थोड़े समय के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे, फिर भाजपा मुख्यमंत्री बनाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने तय किया है कि सारा देश तो दे ही दिए हैं। जिसको विपन्न राज्य कहते हैं उसकी जमीन भी उस राज्य के पास नहीं छोड़नी है। उनका कार्यक्रम बना दिया गया है। तो अगला चारागाह उनके प्रिय मित्र का चरने के लिए वह बिहार होने वाला है। उसकी स्क्रिप्ट को लिख दिया गया है। 1 रुपए प्रति एकड़ में बिहार में हम लोग लेमन जूस खाते थे वो भी नहीं मिलता है। 1 रुपए प्रति एकड़ में जो उनको हजारों एकड़ जमीन दी गई है और लैंड सर्वे कराया जा रहा है। जितनी गैर मजुरआ जमीन है मतलब जिसका मालिकाना हक अल्टीमेटली सरकार के पास है। उन जमीनों को चिन्हित करके प्रिय मित्र अपना फ़ूड पार्क खोलेंगे, अपना सोलर पार्क खोलेंगे और बिहार के भी संसाधनों का दोहन करेंगे। यह कार्यक्रम बना लिया गया है। अब बिहार के लोगों को यह तय करना है कि बिहार पर बिहार के संसाधनों पर बिहार के लोगों का पहला हक होगा कि प्रधानमंत्री जी को गुजराती मित्र के हैंडओवर सब कुछ कर दिया जाएगा।
सवाल- अगर आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजराती बता रहे हैं। क्या सरदार पटेल महात्मा गांधी को गुजराती मानेंगे या देश के मानेंगे?
कन्हैया कुमार: पंडित जवाहरलाल नेहरू को हम देश का मानते हैं लेकिन क्या है ना कि वो (पीएम मोदी) देश को अपनी संपत्ति मानने लगे हैं। फर्क है ना? आप देश को अपना देश मानते हैं। देश को अपनी संपत्ति थोड़ी मानते हैं। देश की संपत्ति तो पूरे देशवासियों की संपत्ति है न? प्रधानमंत्री जी देश की संपत्ति को अपने दोस्त की संपत्ति मानते हैं। यह फर्क है। इसीलिए आप उदाहरण दे रहे हैं आजादी के आंदोलन का जहां बोला गया कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। ये आजादी के बाद की पीढ़ी है। ये कह रही है कि तुम मुझे चंदा दो मैं तुम्हें धंधा दूंगा। ये फर्क है ना इसमें? नहीं मैं इसलिए सवाल पूछ रहा हूं। बताओ क्या आए वो आए यहां आकर के बिजनेस करें। वो आए मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री भी बने। इसमें दिक्कत नहीं है। इससे हमको कोई समस्या नहीं है। समस्या हमको इस बात से है कि क्या देशवासियों का हक देश की संपत्ति पर होगा कि नहीं होगा कि सारा माल समेट करके जो है दोस्त की तिजोरी में पहुंचा दिया जाएगा। मुझे इस मॉडल से दिक्कत है। वह एक बिजनेस डिजाइन के तहत आए हैं कि भाजपा को पहले चंदा देते हैं। उस चंदा से जो है भाजपा चुनाव जीतती है। फिर भाजपा जब सरकार बना लेती है तो उसको जो है ना देश की संपत्ति राज्य की संपत्ति हैंडओवर कर देती है।
सवाल- जब आप बाहरी और बिहारी की बात करते हैं, कृष्णा अल्लावरु यहां प्रभारी बन के आए तो उनके खिलाफ भी 'टिकट चोर गद्दी छोड़' के नारे लगे हैं?
कन्हैया कुमार: बिल्कुल विभेद नहीं होना चाहिए भारत की एकता संप्रभुता अखंडता सब अक्षुण रहे उसमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जो होमोजेनिटी है उस होमोजेनिटी के नाम पर कोई अगर सिसक रहा हो उसकी सिसकियां भी तो सुनी जाए। हम कह रहे हैं कि बिहार जैसे राज्य में जो एक पिछड़ा राज्य है उसके संसाधनों पर क्या बिहार के लोगों का पहला हक नहीं होना चाहिए? आप यह सोचिए ना कि प्रधानमंत्री क्या करते हैं? प्रधानमंत्री गुजरात में जाकर के टेक्नोलॉजी पार्क पता नहीं क्या-क्या बोलते हैं। इधर आकर के क्या बोलते हैं? कट्टा पाकिस्तान ये क्या है? आप सोचिए ना कि आप बिहार जैसे प्रदेश में आए हैं। अरे आप बिहार के भी प्रधानमंत्री हैं ना? आपकी प्राथमिकता कैसे बदल जाती है? यहां आकर के आप कट्टा बोल रहे हैं। आज के भाषण में कह रहे थे पाकिस्तान बोल रहे हैं। बताइए लोगों को नल में नहीं मिल रहा है साफ पानी और वो चुनाव में आकर के कह रहे हैं पाकिस्तानी, ये तो गलत बात है ना। रही बात हमारी पार्टी में किसी के ऊपर आरोप लगने का अच्छी बात है। कम से कम लोकतंत्र में इतनी जगह तो है कि कोई किसी के ऊपर आरोप लगा सकता है। लेकिन खुलेआम विधायक जो चुरा रहा है सीएम चुरा रहा है। उसकी पार्टी के दफ्तर के बाहर कभी किसी को कहे देखे बोलते हुए कहते हुए कहे कि विधायक चोर गद्दी छोड़...ये फर्क होता है।
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सवाल- नीतीश कुमार के साथ 16-17 महीने आप भी सरकार में रहे। लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार इन दोनों में अगर हम तुलना ना करें तो किसके शासन को आप ज्यादा नंबर देंगे?
कन्हैया कुमार: तुलना करने का जो यह तरीका है यह गलत है। एक काम करते हैं पहले हम लोग अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी की तुलना करते हैं। आपकी राय में अटल बिहारी वाजपेयी ज्यादा अच्छे आदमी थे कि नरेंद्र मोदी ज्यादा अटल बिहारी वाजपेयी ज्यादा अच्छे आदमी थे व्यक्ति के तौर पर और नेता के तौर पर हर लिहाज से वो बड़े थे। मेरा हर इंटरव्यूअर से यही सवाल है कि परिवर्तन तो होता ही है न। मेरी कोशिश ये है कि 1990 से बाहर आया जाए। लोग मुझे 90 में ले जाने की कोशिश करते हैं और मैं बार-बार 2025 में लौट आता हूं। मेरी बस इतनी सी कोशिश है।
सवाल- कांग्रेस को 32 में से वो फिर 29 सीटें दे दी गई हैं जिसको कांग्रेस चाहती थी कि सारे सहयोगियों में बांटा जाए। नौ सीटों पर फ्रेंडली फाइट है। तो क्या बंटवारा कहीं अन्यायपूर्ण हो गया है?
कन्हैया कुमार: कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जिसके साथ आप किसी पक्ष के साथ और किसी कोने किसी दिशा से जो है खड़े रह सकते हैं तो स्वाभाविक रूप से ओल्ड ग्रैंड पार्टी है उसके बारे में बहुत कुछ कहा और सुना जाता है और डेमोक्रेटिक लीडरशिप भी है जो सुन भी लेती है तो वो जो कहा जाएगा सुना जाएगा वो अलग बात है। अब जो हो गया सो हो गया। हमारी कोशिश ये है कि ना सिर्फ अपनी सीटों पर बल्कि घटक दल की सीटों पर भी मेहनत की जाए और हम अपना स्कोर कार्ड बेटर करें। स्ट्राइक रेट बेटर करें और महागठबंधन की सरकार बनाने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।
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