{"_id":"665ee8ec73065b58330a8bb6","slug":"2024-election-results-trend-update-uttar-pradesh-issues-ayodhya-ram-mandir-impact-bjp-inc-sp-bsp-vote-shares-2024-06-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Election Result Trends: उत्तर प्रदेश में INDIA के काम आए 'यूपी के लड़के'; राम मंदिर का मुद्दा 'निर्णायक' नहीं!","category":{"title":"Election","title_hn":"चुनाव","slug":"election"}}
Election Result Trends: उत्तर प्रदेश में INDIA के काम आए 'यूपी के लड़के'; राम मंदिर का मुद्दा 'निर्णायक' नहीं!
Tue, 04 Jun 2024 03:44 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 04 Jun 2024 03:44 PM IST
सार
लोकसभा चुनाव- 2024 के परिणाम अब से कुछ घंटों में औपचारिक रूप से सामने आ जाएंगे। मतगणना के छह घंटे बाद उत्तर प्रदेश से सामने आए रुझानों के मुताबिक अयोध्या, हिंदुत्व, राम मंदिर जैसी धारणा मतदाताओं को रिझाने में बहुत असरदार साबित नहीं हुईं। दोपहर ढाई बजे तक की मतगणना के बाद 'यूपी के लड़के' विपक्षी गठबंधन- INDIA का जनाधार बढ़ाने में कामयाब होते दिख रहे हैं।
विज्ञापन
राहुल गांधी और अखिलेश यादव (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा चुनाव परिणाम के लिए मतगणना जारी है। नतीजों के लिहाज से उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर विशेष नजरें हैं। दिलचस्पी के कुछ प्रमुख कारणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व, इसी साल 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन जैसे फैक्टर और इनका सियासी प्रभाव शामिल है। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में यूपी और राम मंदिर का बड़ा योगदान रहेगा, ऐसा माना जा रहा था, लेकिन ढाई बजे तक के रुझानों के आधार पर ऐसा दिख नहीं रहा है। ऐसा इसलिए कि भाजपा प्रत्याशी लल्लू मतगणना के दौरान पिछड़ते दिख रहे हैं।
दरअसल, दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता उत्तर प्रदेश से गुजरता है। भारत की राजनीति में यह कहावत बेहद चर्चित है। लोकसभा सीटों के लिहाज से देश का सबसे सूबा उत्तर प्रदेश भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत में सबसे बड़ा फैक्टर बनता रहा है। आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों के कारण उत्तर प्रदेश की कई सीटें ऐसी हैं, जिनके परिणाम पर सबकी नजरें रहेंगी। इसका राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर होगा।
गौरतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के रथ पर सवाल होकर भाजपा और एनडीए में शामिल दूसरे दलों के प्रत्याशी एक और संसदीय पारी खेलने के दावे कर रहे थे। हालांकि, कई अहम सीटों पर हार की आशंका और वोटों के निर्णायक अंतर को देखते हुए 80 सीटों वाले इस प्रदेश की सियासी फिजा अचानक बदल गई है। कई ऐसी सीटें हैं, जिनका प्रभाव राष्ट्रीय स्तर भी खूब है। धर्म और आस्था से जुड़े अयोध्या, मथुरा, वाराणसी जैसी सीटों पर आने वाले चुनाव परिणाम दूरगामी होंगे। पीएम मोदी खुद वाराणसी से प्रत्याशी हैं। 2014 के चुनाव में भाजपा / NDA को सीटें मिली थीं। 2019 में सीटें घटीं।
विज्ञापन
अब 2024 के चुनाव परिणाम / रुझान सामने आ रहे हैं तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की एकजुटता और मिलकर ताल ठोकने को श्रेय दिया जा रहा है। इन रुझानों की व्याख्या ऐसे भी हो रही है कि 'यूपी के लड़के' के रूप में मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले पूर्व सीएम अखिलेश यादव और राहुल गांधी का असर मतदान के दौरान राम मंदिर से अधिक प्रभावी साबित हुआ है। भाजपा के लगातार मजबूत होते सियासी जनाधार के कारणों की पड़ताल पर वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो और अयोध्या के राम मंदिर दौरे से इस बात के साफ संकेत मिले कि भाजपा ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव की एकजुटता से पैदा होने वाले संभावित खतरे को अनदेखा नहीं किया।
किदवई का मानना है कि भले ही बसपा और मायावती उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए सबसे बड़ी राहत हैं, लेकिन भाजपा ने इस संभावना को भी खारिज नहीं किया कि अगर बसपा का वोट शेयर तेजी से ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर चला जाता है, तो भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में भारी संकट की स्थिति पैदा हो जाएगी। ऐसे में पार्टी ने प्रचार में कोई कसर बाकी नहीं रखी। किदवई मानते हैं कि राहुल पर उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने के लिए समाजवादी पार्टी का भारी दबाव था। पिछले चुनावी नतीजों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 34 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां विपक्षी गठबंधन- INDIA के 40 फीसदी से ज्यादा वोट हैं।
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें: 2019 और 2024 के चुनावी परिणाम
यूपी की 80 लोकसभा सीटों में 2019 में भाजपा की झोली में सीटें आई थीं। इस बार के एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक NDA को कम से कम 62 और अधिकतम 74 सीटें मिलने का अनुमान था। हालांकि, अब यह आंकड़ा 40-50 के बीच सिमटता दिख रहा है। मतदान किन मुद्दों पर हुआ, इसका सटीक आकलन कठिन है, लेकिन अब तक के रूझानों को देखें तो कहना गलत नहीं होगा कि राम मंदिर का मुद्दा नि:संदेह वोटरों को एकजुट करने में नाकाम साबित हुआ। बात चाहे 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की करें या उसके बाद पीएम मोदी के दौरों की। अयोध्या, रामलला और सनातन लगातार चर्चा में बने रहे। इसके बावजूद मतदान में इसका असर कम दिखा।
विज्ञापन
दरअसल, दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता उत्तर प्रदेश से गुजरता है। भारत की राजनीति में यह कहावत बेहद चर्चित है। लोकसभा सीटों के लिहाज से देश का सबसे सूबा उत्तर प्रदेश भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत में सबसे बड़ा फैक्टर बनता रहा है। आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों के कारण उत्तर प्रदेश की कई सीटें ऐसी हैं, जिनके परिणाम पर सबकी नजरें रहेंगी। इसका राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर होगा।
विज्ञापन
गौरतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के रथ पर सवाल होकर भाजपा और एनडीए में शामिल दूसरे दलों के प्रत्याशी एक और संसदीय पारी खेलने के दावे कर रहे थे। हालांकि, कई अहम सीटों पर हार की आशंका और वोटों के निर्णायक अंतर को देखते हुए 80 सीटों वाले इस प्रदेश की सियासी फिजा अचानक बदल गई है। कई ऐसी सीटें हैं, जिनका प्रभाव राष्ट्रीय स्तर भी खूब है। धर्म और आस्था से जुड़े अयोध्या, मथुरा, वाराणसी जैसी सीटों पर आने वाले चुनाव परिणाम दूरगामी होंगे। पीएम मोदी खुद वाराणसी से प्रत्याशी हैं। 2014 के चुनाव में भाजपा / NDA को सीटें मिली थीं। 2019 में सीटें घटीं।
विज्ञापन
अब 2024 के चुनाव परिणाम / रुझान सामने आ रहे हैं तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की एकजुटता और मिलकर ताल ठोकने को श्रेय दिया जा रहा है। इन रुझानों की व्याख्या ऐसे भी हो रही है कि 'यूपी के लड़के' के रूप में मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले पूर्व सीएम अखिलेश यादव और राहुल गांधी का असर मतदान के दौरान राम मंदिर से अधिक प्रभावी साबित हुआ है। भाजपा के लगातार मजबूत होते सियासी जनाधार के कारणों की पड़ताल पर वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो और अयोध्या के राम मंदिर दौरे से इस बात के साफ संकेत मिले कि भाजपा ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव की एकजुटता से पैदा होने वाले संभावित खतरे को अनदेखा नहीं किया।
किदवई का मानना है कि भले ही बसपा और मायावती उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए सबसे बड़ी राहत हैं, लेकिन भाजपा ने इस संभावना को भी खारिज नहीं किया कि अगर बसपा का वोट शेयर तेजी से ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर चला जाता है, तो भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में भारी संकट की स्थिति पैदा हो जाएगी। ऐसे में पार्टी ने प्रचार में कोई कसर बाकी नहीं रखी। किदवई मानते हैं कि राहुल पर उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने के लिए समाजवादी पार्टी का भारी दबाव था। पिछले चुनावी नतीजों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 34 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां विपक्षी गठबंधन- INDIA के 40 फीसदी से ज्यादा वोट हैं।
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें: 2019 और 2024 के चुनावी परिणाम
यूपी की 80 लोकसभा सीटों में 2019 में भाजपा की झोली में सीटें आई थीं। इस बार के एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक NDA को कम से कम 62 और अधिकतम 74 सीटें मिलने का अनुमान था। हालांकि, अब यह आंकड़ा 40-50 के बीच सिमटता दिख रहा है। मतदान किन मुद्दों पर हुआ, इसका सटीक आकलन कठिन है, लेकिन अब तक के रूझानों को देखें तो कहना गलत नहीं होगा कि राम मंदिर का मुद्दा नि:संदेह वोटरों को एकजुट करने में नाकाम साबित हुआ। बात चाहे 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की करें या उसके बाद पीएम मोदी के दौरों की। अयोध्या, रामलला और सनातन लगातार चर्चा में बने रहे। इसके बावजूद मतदान में इसका असर कम दिखा।
उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटों पर वर्तमान सांसद
| क्रम | 2019 में निर्वाचित सदस्य | पार्टी का नाम | निर्वाचन क्षेत्र | 2024 में किसने जीता चुनाव | पार्टी का नाम |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | राजेंद्र अग्रवाल | भारतीय जनता पार्टी | मेरठ | ||
| 2 | |||||
| 3 | संगीता आज़ाद | बहुजन समाज पार्टी | लालगंज (एससी) | ||
| 4 | प्रो. एस.पी. सिंह बघेल | भारतीय जनता पार्टी | आगरा (एससी) | ||
| 5 | डॉ. संजीव कुमार बाल्यान | भारतीय जनता पार्टी | मुजफ्फरनगर | ||
| 6 | भोला नाथ (बी.पी. सरोज) | भारतीय जनता पार्टी | मछलीशहर (एससी) | ||
| 7 | रमेश चंद बिंद | भारतीय जनता पार्टी | भदोही | ||
| 8 | राजकुमार चाहर | भारतीय जनता पार्टी | फतेहपुर सीकरी | ||
| 9 | कुँवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल | भारतीय जनता पार्टी | हमीरपुर | ||
| 10 | गिरीश चंद्र | बहुजन समाज पार्टी | नगिना (एससी) | ||
| 11 | पंकज चौधरी | भारतीय जनता पार्टी | महाराजगंज | ||
| 12 | प्रदीप कुमार चौधरी | भारतीय जनता पार्टी | कैराना | ||
| 13 | विजय कुमार दुबे | भारतीय जनता पार्टी | कुशीनगर | ||
| 14 | हरीश द्विवेदी | भारतीय जनता पार्टी | बस्ती | ||
| 15 | वरुण गांधी | भारतीय जनता पार्टी | पीलीभीत | ||
| 16 | मेनका गांधी | भारतीय जनता पार्टी | सुल्तानपुर | ||
| 17 | संतोष कुमार गंगवार | भारतीय जनता पार्टी | बरेली | ||
| 18 | सतीश कुमार गौतम | भारतीय जनता पार्टी | अलीगढ़ | ||
| 19 | डॉ. विजय कुमार सिंह (जनरल) | भारतीय जनता पार्टी | गाज़ियाबाद | ||
| 20 | संगमलाल कद्दे दिन गुप्ता | भारतीय जनता पार्टी | प्रतापगढ़ | ||
| 21 | डॉ. एस.टी. हसन | समाजवादी पार्टी | मुरादाबाद | ||
| 22 | हेमा मालिनी | भारतीय जनता पार्टी | मथुरा | ||
| 23 | स्मृति ईरानी | भारतीय जनता पार्टी | अमेठी | ||
| 24 | जय प्रकाश | भारतीय जनता पार्टी | हरदोई (एससी) | ||
| 25 | प्रो. रीता बहुगुणा जोशी | भारतीय जनता पार्टी | इलाहाबाद | ||
| 26 | साध्वी निरंजन ज्योति | भारतीय जनता पार्टी | फतेहपुर | ||
| 27 | धर्मेंद्र कुमार कश्यप | भारतीय जनता पार्टी | आंवला | ||
| 28 | प्रो. (डॉ.) राम शंकर कठेरिया | भारतीय जनता पार्टी | इटावा (एससी) | ||
| 29 | कौशल किशोर | भारतीय जनता पार्टी | मोहनलालगंज (एससी) | ||
| 30 | कुँवर दानिश अली | बहुजन समाज पार्टी | अमरोहा | ||
| 31 | रविंद्र कुशवाहा | भारतीय जनता पार्टी | सलेमपुर | ||
| 32 | अक्षयबर लाल | भारतीय जनता पार्टी | बहराइच (एससी) | ||
| 33 | पकौरी लाल | अपना दल (सोनेलाल) | रॉबर्ट्सगंज (एससी) | ||
| 34 | घनश्याम सिंह लोधी | भारतीय जनता पार्टी | रामपुर | ||
| 35 | डॉ. संगमित्रा मौर्य | भारतीय जनता पार्टी | बदायूं | ||
| 36 | अजय मिश्रा (टेनी) | भारतीय जनता पार्टी | खीरी | ||
| 37 | नरेंद्र दामोदरदास मोदी | भारतीय जनता पार्टी | वाराणसी | ||
| 38 | मलूक नागर | बहुजन समाज पार्टी | बिजनौर | ||
| 39 | प्रवीण कुमार निषाद | भारतीय जनता पार्टी | संत कबीर नगर | ||
| 40 | सत्यदेव पचौरी | भारतीय जनता पार्टी | कानपुर | ||
| 41 | जगदम्बिका पाल | भारतीय जनता पार्टी | डुमरियागंज | ||
| 42 | डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय | भारतीय जनता पार्टी | चंदौली | ||
| 43 | रितेश पांडेय | बहुजन समाज पार्टी | अम्बेडकर नगर | ||
| 44 | कमलेश पासवान | भारतीय जनता पार्टी | बांसगांव (एससी) | ||
| 45 | आर.के. सिंह पटेल | भारतीय जनता पार्टी | बांदा | ||
| 46 | अनुप्रिया पटेल | अपना दल (सोनेलाल) | मिर्जापुर | ||
| 47 | केशरी देवी पटेल | भारतीय जनता पार्टी | फूलपुर | ||
| 48 | सुब्रत पाठक | भारतीय जनता पार्टी | कन्नौज | ||
| 49 | अतुल राय | बहुजन समाज पार्टी | घोसी | ||
| 50 | मुकेश राजपूत | भारतीय जनता पार्टी | फर्रुखाबाद | ||
| 51 | अशोक कुमार रावत | भारतीय जनता पार्टी | मिश्रिख (एससी) | ||
| 52 | उपेंद्र सिंह रावत | भारतीय जनता पार्टी | बाराबंकी (एससी) | ||
| 53 | हाजी फ़ज़लुर रहमान | बहुजन समाज पार्टी | सहारनपुर | ||
| 54 | अरुण कुमार सागर | भारतीय जनता पार्टी | शाहजहांपुर (एससी) | ||
| 55 | डॉ. जादौन चंद्र सेन | भारतीय जनता पार्टी | फ़िरोज़ाबाद | ||
| 56 | डॉ. महेश शर्मा | भारतीय जनता पार्टी | गौतम बुद्ध नगर | ||
| 57 | अनुराग शर्मा | भारतीय जनता पार्टी | झांसी | ||
| 58 | रवि किशन शुक्ला | भारतीय जनता पार्टी | गोरखपुर | ||
| 59 | डॉ. सत्य पाल सिंह | भारतीय जनता पार्टी | बागपत | ||
| 60 | भोला सिंह | भारतीय जनता पार्टी | बुलंदशहर (एससी) | ||
| 61 | बृजभूषण शरण सिंह | भारतीय जनता पार्टी | कैसरगंज | ||
| 62 | देवेंद्र (अलियास) भोले सिंह | भारतीय जनता पार्टी | अकबरपुर | ||
| 63 | कीर्ति वर्धन सिंह | भारतीय जनता पार्टी | गोंडा | ||
| 64 | लल्लू सिंह | भारतीय जनता पार्टी | फैज़ाबाद | ||
| 65 | राजनाथ सिंह | भारतीय जनता पार्टी | लखनऊ | ||
| 66 | राजवीर (राजू भैया) सिंह | भारतीय जनता पार्टी | एटा | ||
| 67 | वीरेंद्र सिंह | भारतीय जनता पार्टी | बलिया | ||
| 68 | विनोद कुमार सोनकर | भारतीय जनता पार्टी | कौशांबी (एससी) | ||
| 69 | डॉ. साक्षी जी स्वामी महाराज | भारतीय जनता पार्टी | उन्नाव | ||
| 70 | डॉ. रामपति राम त्रिपाठी | भारतीय जनता पार्टी | देवरिया | ||
| 71 | भानु प्रताप सिंह वर्मा | भारतीय जनता पार्टी | जालौन (एससी) | ||
| 72 | राजेश वर्मा | भारतीय जनता पार्टी | सीतापुर | ||
| 73 | रेखा अरुण वर्मा | भारतीय जनता पार्टी | धौरहरा | ||
| 74 | राम शिरोमणि वर्मा | बहुजन समाज पार्टी | श्रावस्ती | ||
| 75 | दिनेश लाल "निरहुआ" यादव | भारतीय जनता पार्टी | आजमगढ़ | ||
| 76 | श्याम सिंह यादव | बहुजन समाज पार्टी | जौनपुर | ||
| 77 | डिंपल यादव | समाजवादी पार्टी | मैनपुरी | ||
| 78 | संभल | ||||
| 79 | रायबरेली | ||||
| 80 | हाथरस |