विश्व मानव तस्करी रोधी दिवस : केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी बोलीं, जल्द लागू होगा रोकथाम कानून
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्शन एंड रीहैबिलिटेशन) बिल-2021 संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाना है। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने इस बिल का पुरजोर समर्थन किया है।
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केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्शन एंड रीहैबिलिटेशन) बिल-2021 संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाना है। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने इस बिल का पुरजोर समर्थन किया है। दरअसल, 30 जुलाई को विश्व मानव तस्करी रोधी दिवस (ट्रैफिकिंग विरोधी विश्व दिवस) के अवसर पर केएससीएफ और बीबीए ने संयुक्त रूप से ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग के उन्मूलन’ पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया था।
संगोष्ठी का उद्घाटन नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने किया। संगोष्ठी में कोरोना महामारी के कारण मानव तस्करी के उभरते नए रूपों को उजागर किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य ट्रैफिकिंग की रोकथाम और नियंत्रण के साथ-साथ पीड़ितों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए जिम्मेदार विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाना था।
इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रस्तावित एंटी ट्रैफिकिंग बिल यानी मानव तस्करी रोधी कानून के मसाैदे की चर्चा करते हुए कहा, हम देश में पहली बार ट्रैफिकिंग यानी मानव तस्करी को एक संगठित अपराध के रूप में चिह्नित कर रहे हैं। यह बिल ट्रैफिकिंग के विभिन्न रूपों की, जो अपनी प्रकृति में गंभीर है, एक व्यापक सूची का प्रस्ताव तैयार करेगा और उसी अनुसार उसकी सजा को बढ़ाने का काम करेगा।
जिम्मेदार भी आएंगे सजा के दायरे में : ईरानी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बिल अपराध की रिपोर्टिंग करने को भी अनिवार्य बनाता है और जो अपराध को रिपोर्ट नहीं करेंगे वे सजा के दायरे में आएंगे। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बिल के पारित होने के साथ ही हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उस सहयोग को बढ़ाएंगे। इसके तहत महिलाओं एवं बच्चों की सीमापार से हो रही ट्रैफिकिंग को रोकने के उपाय भी किए जाएंगे। ईरानी ने कहा कि मैं उम्मीद करती हूं कि यह संगोष्ठी नए विचारों को सामने लाएगी ताकि हमारा कार्यान्वयन न केवल प्रशासनिक स्तर पर सुचारू हो, बल्कि वह उपयोगी और प्रभावी भी हो।
यह राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक आवश्यक कदम : सत्यार्थी
वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने कहा, मुझे गर्व है कि भारत मानव तस्करी के खिलाफ प्रस्तावित कानून के साथ इस अपराध से निपटने की वैश्विक लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील और सतर्क समाज द्वारा समर्थित एक मजबूत एंटी ट्रैफिकिंग कानून हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।
सत्यार्थी ने कहा कि यह राष्ट्र-निर्माण और आर्थिक प्रगति की दिशा में एक आवश्यक कदम है। हजारों महिलाएं और बच्चे न्याय और स्वतंत्रता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने अपील की कि हमें इस कानून को तुरंत पारित करना चाहिए और बाकी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम करना चाहिए।
मानव तस्करी रोकने के लिए लंबे समय से थी विशेष कानून की दरकार
संगोष्ठी भारत में मानव तस्करी को जमीनी स्तर पर कैसे रोका जाए, ट्रैफिकिंग के नए उभरते रूपों और उसको रोकने में सिविल सोसायटी की क्या भूमिका हो, उसके इर्द-गिर्द घूमती रही। संगोष्ठी में कानून निर्माताओं के अलावा, संस्थानों और एजेंसियों के प्रमुखों, बाल अधिकार विशेषज्ञों और गैर सरकारी संगठनों ने भी हिस्सा लिया। गौरतलब है कि ट्रैफिकिंग जैसे संगठित अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने को एक विशेष कानून की दरकार काफी समय से महसूस की जा रही थी।
वर्तमान कानूनी व्यवस्था में मौजूद खामियां होंगी दूर
गौरतलब है कि नए कानून की विशेषता है कि यह वर्तमान कानूनी व्यवस्था में मौजूद सभी खामियों को दूर करता है और मानव तस्करी के हर पहलू, जैसे कि इसकी रोकथाम, जांच के लिए विशेष एजेंसियों की स्थापना, परीक्षण के लिए विशेष अदालतें और पुनर्वास की जरूरत पर बल देता है। ट्रैफिकिंग इन पर्संन्स (प्रीवेंशन, केयर एंड रीहैबिलिटेशन) बिल, 2021 मानव तस्करी से संबंधित विभिन्न अपराधों को शामिल करते हुए उसके विभिन्न पहलुओं पर भी रोशनी डालता है। यह ट्रैफिकिंग को रोकने, उससे निपटने और पीड़ितों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक त्रिस्तरीय संस्था बनाने की जरूरत पर बल देता है।
संगोष्ठी में इन्होंने भी रखे अपने विचार
कार्यक्रम में प्रयास के संस्थापक आमोद कंठ, ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी नेटवर्क की अस्मिता सत्यार्थी, अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कार्णिक, सीआरएएफ, आंध्र प्रदेश के फ्रांसिस थंबी, गोल्ड-असम के राजीव शर्मा, आरपीएफ, रेलवे महानिरीक्षक मुख्यालय सुमति शांडिल्य उपस्थित थीं। कार्यक्रम में शक्ति वाहिनी के संस्थापक रवि कांत, बिहार के एडीजी अनिल किशोर यादव, महानिदेशक और पुलिस आयुक्त, तेलंगाना महेश भागवत, राष्ट्रीय संस्थान सामाजिक रक्षा के निदेशक वीरेंद्र मिश्रा और डब्ल्यूसीडी, दिल्ली (टीबीसी) की निदेशक रश्मि सिंह भी मौजूद रहीं।
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