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ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित हुई गणित पर आधारित कार्यशाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 26 Feb 2018 01:46 PM IST
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गणित पर आधारित कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
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जीवन के हर पहलू में चाहे वह टेलिफोन हो या धन का प्रबन्धन या मौसम की रिपोर्ट की जांच करना, हर क्षेत्र में गणित का महत्वपूर्ण योगदान है। यह कहना है इण्डियन इंस्टीट्यूट आफ स्पेस साइंस एण्ड टेक्नोलाजी के डिपार्टमेण्ट आफ मैथेमैटिक्स के प्रो. (डा.) राजू के जार्ज का।
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में गणित पर आधारित कार्यशाला में श्री जार्ज ने संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मैथेमैटिकल मॉडल और कम्प्यूटर के प्रयोग से कई नई तकनीकों का अविष्कार किया जा रहा है।
नॉनलिनियर एनलिसिस की उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि चिकित्सा, इंजीनियरिंग, गाड़ियो के डिजाइन, भूगर्भ शास्त्र और भौतिक विज्ञान के क्षेत्रों में फिक्सड पॉइंट्स थ्योरी जैसे गणित के कई ऐसे सिद्धान्तों का महत्व है।
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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फन्डामेण्टल रिसर्च, बंगलूरू की प्रो. (डा.) मैथली रामास्वामी ने प्रतिभागियों को बताया कि संचार प्रणाली और विमानों व राकेट उड़ाने में पारशियल डिफरेन्शियल इक्वेशन का ही उपयोग किया जाता है।
उन्होंने ये भी बताया कि एक्स-रे और किडनी डायलिसिस जैसे महत्वपूर्ण अविष्कारों में भी पारशियल डिफरेन्शियल इक्वेशन का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आई.आई.टी. गांधीनगर के डिपार्टमेण्ट आफ मैथेमैटिक्स के डा. जगमोहन त्यागी ने कार्यशाला को ’सोबोलिवस्पेस’ के सिद्धांत से छात्रों को अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि वास्ताविक जीवन में इंजीनियरिंग की समस्याओं को समझने के लिए पारशियल डिफरेन्शियल इक्वेशन का इस्तेमाल किया जाता है। इस कार्यशाला से ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के गणित विभाग के डा. मांगेराम, डा. मो0 तामसीर, डा. सत्यजीत सिंह, डा. मुकेश कुमार, डा. ऋतुचान्दना एवं विभिन्न राज्यों से आये विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में गणित पर आधारित कार्यशाला में श्री जार्ज ने संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मैथेमैटिकल मॉडल और कम्प्यूटर के प्रयोग से कई नई तकनीकों का अविष्कार किया जा रहा है।
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नॉनलिनियर एनलिसिस की उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि चिकित्सा, इंजीनियरिंग, गाड़ियो के डिजाइन, भूगर्भ शास्त्र और भौतिक विज्ञान के क्षेत्रों में फिक्सड पॉइंट्स थ्योरी जैसे गणित के कई ऐसे सिद्धान्तों का महत्व है।
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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फन्डामेण्टल रिसर्च, बंगलूरू की प्रो. (डा.) मैथली रामास्वामी ने प्रतिभागियों को बताया कि संचार प्रणाली और विमानों व राकेट उड़ाने में पारशियल डिफरेन्शियल इक्वेशन का ही उपयोग किया जाता है।
उन्होंने ये भी बताया कि एक्स-रे और किडनी डायलिसिस जैसे महत्वपूर्ण अविष्कारों में भी पारशियल डिफरेन्शियल इक्वेशन का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आई.आई.टी. गांधीनगर के डिपार्टमेण्ट आफ मैथेमैटिक्स के डा. जगमोहन त्यागी ने कार्यशाला को ’सोबोलिवस्पेस’ के सिद्धांत से छात्रों को अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि वास्ताविक जीवन में इंजीनियरिंग की समस्याओं को समझने के लिए पारशियल डिफरेन्शियल इक्वेशन का इस्तेमाल किया जाता है। इस कार्यशाला से ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के गणित विभाग के डा. मांगेराम, डा. मो0 तामसीर, डा. सत्यजीत सिंह, डा. मुकेश कुमार, डा. ऋतुचान्दना एवं विभिन्न राज्यों से आये विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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