Exam Tension: परीक्षा को लेकर बेचैनी क्यों? देखें चिंता को कम करने की तरकीबें; बेहद कारगर हो सकती है साबित
Anxiety: बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्रों के साथ-साथ माता-पिता भी बेचैन हो जाते हैं। आरएमआईटी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर क्रिस्टीन ग्रोव इस बेचैनी से बचने की कुछ ऐसी तरकीबें सुझाती हैं, जो परीक्षाओं की चिंता को कम करने में बेहद कारगर साबित हो सकती हैं।
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Anxiety or Tension: परीक्षा का नाम सुनते ही अधिकतर छात्रों के माथे पर पसीना आ जाता है। कई छात्रों का दिमाग परीक्षा के समय मानो जम-सा जाता है, दिल की धड़कन बढ़ जाती है और चे बेचैनी महसूस करने लगते हैं। यह केवल छात्रों के साथ ही नहीं होता, बल्कि माता-पित्ता भी खुद को इससे नहीं बचा पाते। ऐसा परीक्षा की चिंता (एंजाइटी) के कारण होता है।
यह आम बात है। कम चिंता नुकसानदेह नहीं है। लेकिन जब इसका स्तर बढ़ जाता है तब यह निश्चित रूप से आपको और आपके बच्चे को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में, आपको चाहिए कि आप अपने साथ साथ बच्चों को भी इस समस्या से उबारने की कोशिश करें। इसके कारणों की पहचान करके और उसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित करके आप अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उनका हौसला बढ़ा सकते हैं।
एग्जाम एंजायटी को समझना है जरूरी
यह परीक्षा से पहले या उसके दौरान डर या घबराहट की तोव भावना है। छात्रों की बात करें तो, कम चिंता करने वाले छात्र थोड़ा कम नर्वस महसूस करते हैं। इस कारण वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और आसानी से सवालों के जवाब देते हैं।
वहीं अधिक चिंता करने वाले छात्र परीक्षा को लेकर कुछ ज्यादा ही घबराते हैं। कुछ तो असफलता के डर से परीक्षा में शामिल तक नहीं होते, जबकि कुछ ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इससे उनमें नकारात्मक विचार आ जाते हैं। ऐसे में, चिंता को नियंत्रित करने के तरीकों को सीखना और सिखाना उनके प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है।
इसका असर
चिंता कभी-कभी मददगार भी होती है, खासकर खतरे के मामलों में। ऐसे में दिमाग उस खतरे से बचने के लिए तुरंत सक्रिय हो जाता है। हालांकि, परीक्षा जैसी स्थितियों में चिंता मदद करने के बजाय अड़चनें पैदा करती है, जिससे छात्रों के मन में उटपटांग ख्याल आने लगते हैं। ऐसे में उनकी ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखने में मदद करनी चाहिए।
ऐसे करें इलाज
थोडी-सी सतर्कता बरत कर और बच्चों पर ध्यान देकर एग्जाम एंजायटी से बचा जा सकता है। हालांकि, यह चिंता की वजह और स्तर पर निर्भर करता है। छात्रों का पर्याप्त नींद लेना, अच्छा खान-पान तथा रोजाना व्यायाम करना सुनिश्चित करें।
इसके अलावा, उन्हें माइंडफुलनेस जैसी तकनीकों का अभ्यास करवाएं। इससे उन्हें ध्यान केंद्रित करने और स्मरण शक्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्हें बताएं कि आखिरी समय में रटने के बजाय रोजाना छोटे-छोटे हिस्सों में अध्ययन करना फायदेमंद है। उन्हें चिंता पर काबू पाना सीखाएं।
-द कन्वर्शेसन
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