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Hindi News ›   Education ›   West Bengal Education Minister Bratya Basu said Will Not Accept If National Education Policy Is Forced On States as Tughlaqi approach

NEP 2020: पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री बोले- तुगलकी फरमान की तरह थोपी गई तो नहीं लागू करेंगे नई शिक्षा नीति

Wed, 17 Nov 2021 07:05 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 17 Nov 2021 07:05 PM IST
सार

NEP 2020: पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ने कहा कि संविधान में, शिक्षा समवर्ती सूची में है। यह एक नाजुक विषय है; अगर भाजपा सरकार 'तुगलकी' (सनकी) दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश करती है, तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। 

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West Bengal Education Minister Bratya Basu said Will Not Accept If National Education Policy Is Forced On States as Tughlaqi approach
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु - फोटो : facebook.com/BratyaBasuPolitical

विस्तार

पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार में एक बार फिर तकरार देखने को मिल रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के द्वारा मंगलवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ी अहम समीक्षा बैठक के बाद ही पश्चिम बंगाल सरकार के शिक्षा मंत्री ने बड़ा बयान दिया है। बसु ने चेतावनी दी कि चूंकि शिक्षा समवर्ती सूची में है, इसलिए केंद्र को नई नीति के माध्यम से अपनी बात नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने, केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार पर अपना एजेंडा थाेपने का आरोप लगाया। 

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तुगलकी दृष्टिकोण अपना रही केंद्र सरकार
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार राज्य पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) थोपने के केंद्र के प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी, क्योंकि बंगाल की अपनी संस्कृति और शिक्षा प्रणाली है। बसु ने कहा कि संविधान में, शिक्षा समवर्ती सूची में है। यह एक नाजुक विषय है; अगर भाजपा सरकार 'तुगलकी' (सनकी) दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश करती है, तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। 

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मातृभाषा और संस्कृत पर जोर हानिकारक
उन्होंने संवाददाताओं से कहा हमारे पास कहने के लिए कुछ भी है, हम करेंगे अपने विचार रखें, और जो कुछ भी स्वीकार किया जा सकता है, हम उसे स्वीकार करेंगे। ब्रत्य बसु ने आगे कहा कि हम अपनी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश के अनुसार आगे बढ़ेंगे। एनईपी के आलोचकों ने बताया है कि तकनीकी संस्थानों सहित मातृभाषा में सभी विषयों को पढ़ाने पर जोर देने के साथ-साथ शास्त्रीय भाषा संस्कृत पर जोर हानिकारक साबित हो सकता है। 

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5,000 शिक्षकों की भर्ती पर विचार जारी
बसु ने यह भी कहा कि राज्य स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के तहत करीब 15,000 शिक्षकों की भर्ती करने पर भी विचार कर रहा है। कुछ कानूनी मुद्दे हैं। हम कोर्ट के निर्देश पर काम कर रहे हैं। एसएससी के छह अधिकारी नियमित रूप से शिकायतें सुन रहे हैं और उनका समाधान कर रहे हैं। इसके बाद हम शिकायतों की वह सूची कोर्ट को सौंपेंगे। हमें उम्मीद है कि हम भविष्य में एसएससी के तहत लगभग 15,000 शिक्षकों की भर्ती कर सकते हैं।

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