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PCS मेन 2016 का रिजल्ट अटका, मुख्य परीक्षा-2017 के आयोजन पर भी मंडराया संकट
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 01 May 2018 01:48 PM IST
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प्रदेश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पीसीएस मुख्य परीक्षा-2016 का परिणाम फंसा हुआ है तो दूसरी ओर पीसीएस मुख्य परीक्षा-2017 के आयोजन पर ही संकट मंडरा रहा है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से स्थिति स्पष्ट न किए जाने से इन परीक्षाओं से जुड़े हजारों प्रतियोगी परेशान हैं। आए दिन आयोग का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन वहां कोई जवाब देने वाला नहीं है।
प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा पीसीएस होती है। पीसीएस-2017 की प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल 24 सितंबर को प्रदेश के 21 जिलों में आयोजित की गई थी। कुल 677 पदों के लिए परीक्षा में दो लाख 46 हजार 654 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद आयोग ने 17 नंवबर को उत्तरकुंजी जारी की थी।
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आयोग ने सामान्य अध्ययन के दो पेपरों में कुल छह गलत सवाल डिलीट किए थे। उत्तरकुंजी पर 24 नवंबर तक आपत्तियां मांगी गई थीं। आपत्तियां आने के बाद आयोग ने 19 जनवरी को परिणाम के साथ संशोधित एवं अंतिम उत्तरकुंजी जारी की। संशोधित उत्तरकुंजी में भी आयोग ने छह सवाल डिलीट किए। इस तरह कुल दस सवाल हटाए गए।
हालांकि इसके बाद भी विवाद नहीं थमा। प्रतियोगियों ने कई दूसरे सवालों पर भी आपत्ति की थी। प्रतियोगी हाईकोर्ट चले गए और वहां से उन्हें राहत मिल गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर परीक्षा परिणाम संशोधित किया जाना है और जब तक यह काम नहीं होता, तब तक पीसीएसी मुख्य परीक्षा-2017 के आयोजन पर संकट मंडराता रहेगा।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से स्थिति स्पष्ट न किए जाने से इन परीक्षाओं से जुड़े हजारों प्रतियोगी परेशान हैं। आए दिन आयोग का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन वहां कोई जवाब देने वाला नहीं है।
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प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा पीसीएस होती है। पीसीएस-2017 की प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल 24 सितंबर को प्रदेश के 21 जिलों में आयोजित की गई थी। कुल 677 पदों के लिए परीक्षा में दो लाख 46 हजार 654 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद आयोग ने 17 नंवबर को उत्तरकुंजी जारी की थी।
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आयोग ने सामान्य अध्ययन के दो पेपरों में कुल छह गलत सवाल डिलीट किए थे। उत्तरकुंजी पर 24 नवंबर तक आपत्तियां मांगी गई थीं। आपत्तियां आने के बाद आयोग ने 19 जनवरी को परिणाम के साथ संशोधित एवं अंतिम उत्तरकुंजी जारी की। संशोधित उत्तरकुंजी में भी आयोग ने छह सवाल डिलीट किए। इस तरह कुल दस सवाल हटाए गए।
हालांकि इसके बाद भी विवाद नहीं थमा। प्रतियोगियों ने कई दूसरे सवालों पर भी आपत्ति की थी। प्रतियोगी हाईकोर्ट चले गए और वहां से उन्हें राहत मिल गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर परीक्षा परिणाम संशोधित किया जाना है और जब तक यह काम नहीं होता, तब तक पीसीएसी मुख्य परीक्षा-2017 के आयोजन पर संकट मंडराता रहेगा।
साल भर में नहीं जंच सकीं मुख्य परीक्षा की कॉपियां
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 का परिणाम 19 जनवरी को घोषित किया गया था, जिसमें मुख्य परीक्षा के लिए 14032 अभ्यर्थियों का सफल घोषित किया गया था। मुख्य परीक्षा 17 मई को प्रस्तावित है। परीक्षा समय पर होगी या इसकी तिथि बढ़ाई जाएगी, इस पर आयोग स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा है।
अब तक यह भी तय नहीं है कि आयोग संशोधित उत्तरकुंजी जारी करेगा या हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि जल्द ही इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।
पीसीएस मुख्य परीक्षा-2016 का परिणाम भी सवालों के विवाद के कारण अटका हुआ है। पीसीएस 2016 की प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों में नौ प्रश्नों के उत्तर पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। प्रतियोगियों की आपत्ति पर हाईकोर्ट ने विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई।
आपत्ति सही पाए जाने पर चार प्रश्नों को डिलीट कर दि गया और एक प्रश्न के दो वैकल्पिक उत्तरों को सही मानते हुए प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया गया। आयोग ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी और सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन शुरू कराया। यह प्रक्रिया शुरू हुए साल भर होने वाले हैं लेकिन कॉपियों का मूल्यांकन कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका।
अब तक यह भी तय नहीं है कि आयोग संशोधित उत्तरकुंजी जारी करेगा या हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि जल्द ही इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।
पीसीएस मुख्य परीक्षा-2016 का परिणाम भी सवालों के विवाद के कारण अटका हुआ है। पीसीएस 2016 की प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों में नौ प्रश्नों के उत्तर पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। प्रतियोगियों की आपत्ति पर हाईकोर्ट ने विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई।
आपत्ति सही पाए जाने पर चार प्रश्नों को डिलीट कर दि गया और एक प्रश्न के दो वैकल्पिक उत्तरों को सही मानते हुए प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया गया। आयोग ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी और सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन शुरू कराया। यह प्रक्रिया शुरू हुए साल भर होने वाले हैं लेकिन कॉपियों का मूल्यांकन कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका।
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