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UP Board 2020: सरकार को इन क्षेत्रों में है लोगों की जरूरत, बना सकते हैं सुनहरा करियर
Tue, 14 Apr 2020 11:16 AM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Tue, 14 Apr 2020 11:16 AM IST
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यूपी बोर्ड में करियर
- फोटो : अमर उजाला
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UP Board 2020: कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी की चपेट में आज पूरी देश है। ऐसे में भारत की सरकार ने लॉकडाउन की तिथि आगे बढ़ गई है। पहले लॉकडाउन 14 अप्रैल तक घोषित किया गया था पर अब इस तिथि को बढ़ाकर 3 मई तक दी है। बिजनेस सेक्टर से लेकर शिक्षा सेक्टर तक हर क्षेत्र आज इस महामारी के चलते प्रभावित है। इसके अलावा शिक्षा के बड़े-बड़े कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया गया है।
लेकिन यूपी बोर्ड की परीक्षाएं समय रहते संपन्न हो गई। छात्र-छात्राओं को अब परीक्षा के परिणामों का इंतजार है। अपना समय व्यर्थ करने की बजाय छात्र-छात्राएं अपने भविष्य के बारे में सोचें। यह समय उत्तम है। यहां हम आपको एक ऐसी फील्ड के बारे में बता रहे हैं जिससे माध्यम से आप प्राइवेट नौकरी के साथ सरकारी नौकरी भी पा सकते हैं।
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लेकिन यूपी बोर्ड की परीक्षाएं समय रहते संपन्न हो गई। छात्र-छात्राओं को अब परीक्षा के परिणामों का इंतजार है। अपना समय व्यर्थ करने की बजाय छात्र-छात्राएं अपने भविष्य के बारे में सोचें। यह समय उत्तम है। यहां हम आपको एक ऐसी फील्ड के बारे में बता रहे हैं जिससे माध्यम से आप प्राइवेट नौकरी के साथ सरकारी नौकरी भी पा सकते हैं।
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सरकार ने देश में वनों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए समय-समय पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार द्वारा किए जा रहे वित्तीय और अन्य निवेश से स्थानीय समुदायों, गैर सरकारी संगठनों द्वारा पर्यावरणीय व्यवस्था में मौजूदा वन्य जीवों का संरक्षण किया जा रहा है। वन्य जीव संरक्षण विज्ञान पाठ्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य ऐसे वन्य जीव संरक्षक विशेषज्ञ तैयार करना है जो कि वन्य जीवों और उनके आवासों के संरक्षण तथा उन्नयन को वैज्ञानिक ढंग से अंजाम दे सकें।
वन्य जीव संरक्षण विज्ञान के क्षेत्र में प्रमुख करियर विकल्प इस प्रकार हैं-
वन्य जीव संरक्षक- वन्य जीव संरक्षक प्राकृतिक संसाधनों को उन सिद्धांतों के साथ जोडकर कार्य करते हैं जिससे उन्हें उच्चतम सामाजिक तथा आर्थिक लाभ सुनिश्चित हो सकें।
वन्य जीव वैज्ञानिक-
वन्य जीव वैज्ञानिक पारिस्थितिकी, गणना, व्यवहार और शरीर विज्ञान, वन्य जीवों के रोगों, वन्य जीव बंदी और रोकथाम, - पशु आवास, प्रजनन,पुनर्वास, फोरेंसिक,संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करते हैं और नई-नई खोज करते हैं। योग्य कार्मिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से पशुओं की उन प्रजातियों की स्थिति का मूल्यांकन तथा उसमें सुधार के उपाय किए जा सकते हैं जो इस समय लुप्त होने की कगार पर हैं।
वन्य जीव परिस्थितिकी विज्ञानी-
वन्य जीव पारिस्थितिकी विजानी इस बात का अध्ययन करते हैं कि जीवों का उनके पर्यावरण से क्या संबंध है तथा किस प्रकार से वे उससे प्रभावित होते हैं।
वन्य जीव फोरेंसिक विशेषज्ञ-
वन्य जीव फोरेंसिक विशेषज्ञों का काम वन्य जीव अपराध से जुड़े मामलों में पशुओं की मृत्यु के कारण, प्रजाति, आयु तथा लिंग आदि के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करना है।
वन्य जीव प्रबंधक-
वन्य जीव प्रबंधक वन्य जीवों और उनके आवासों पर वैज्ञानिक और तकनीकी सिद्धांतों का अनुप्रयोग करते हैं ताकि वन्य जीवन की संख्या को विहार एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए बरकरार रखा जा सके।
वन्य जीव सलाहकार-
यह वन्य जीव विशेषज्ञ होते हैं जो केंद्र तथा राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, अनसंधान संस्थानों तथा अन्य सरकारी तथा गैर सरकारी एजेंसियों को परामर्शी सेवाएं प्रदान करते हैं।
वन्य जीव शिक्षक-
वाइल्ड लाइफ साइसम अपन ज्ञान का विस्तार करने के इच्छक व्यक्ति कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, वन्य जीव संस्थानों आदि में सहायक प्रोफेसर/प्रवक्ता के रूप में करियर शुरू कर सकत है। ऐसे व्यक्ति वाइल्ड लाइफ साइंस में शोध कार्य भी कर सकते हैं तथा वन्य जीव विज्ञान में योगदान देते हैं।
वन्य जीव संरक्षण विज्ञान के क्षेत्र में प्रमुख करियर विकल्प इस प्रकार हैं-
वन्य जीव संरक्षक- वन्य जीव संरक्षक प्राकृतिक संसाधनों को उन सिद्धांतों के साथ जोडकर कार्य करते हैं जिससे उन्हें उच्चतम सामाजिक तथा आर्थिक लाभ सुनिश्चित हो सकें।
वन्य जीव वैज्ञानिक-
वन्य जीव वैज्ञानिक पारिस्थितिकी, गणना, व्यवहार और शरीर विज्ञान, वन्य जीवों के रोगों, वन्य जीव बंदी और रोकथाम, - पशु आवास, प्रजनन,पुनर्वास, फोरेंसिक,संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करते हैं और नई-नई खोज करते हैं। योग्य कार्मिकों द्वारा किए गए अध्ययनों से पशुओं की उन प्रजातियों की स्थिति का मूल्यांकन तथा उसमें सुधार के उपाय किए जा सकते हैं जो इस समय लुप्त होने की कगार पर हैं।
वन्य जीव परिस्थितिकी विज्ञानी-
वन्य जीव पारिस्थितिकी विजानी इस बात का अध्ययन करते हैं कि जीवों का उनके पर्यावरण से क्या संबंध है तथा किस प्रकार से वे उससे प्रभावित होते हैं।
वन्य जीव फोरेंसिक विशेषज्ञ-
वन्य जीव फोरेंसिक विशेषज्ञों का काम वन्य जीव अपराध से जुड़े मामलों में पशुओं की मृत्यु के कारण, प्रजाति, आयु तथा लिंग आदि के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करना है।
वन्य जीव प्रबंधक-
वन्य जीव प्रबंधक वन्य जीवों और उनके आवासों पर वैज्ञानिक और तकनीकी सिद्धांतों का अनुप्रयोग करते हैं ताकि वन्य जीवन की संख्या को विहार एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए बरकरार रखा जा सके।
वन्य जीव सलाहकार-
यह वन्य जीव विशेषज्ञ होते हैं जो केंद्र तथा राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, अनसंधान संस्थानों तथा अन्य सरकारी तथा गैर सरकारी एजेंसियों को परामर्शी सेवाएं प्रदान करते हैं।
वन्य जीव शिक्षक-
वाइल्ड लाइफ साइसम अपन ज्ञान का विस्तार करने के इच्छक व्यक्ति कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, वन्य जीव संस्थानों आदि में सहायक प्रोफेसर/प्रवक्ता के रूप में करियर शुरू कर सकत है। ऐसे व्यक्ति वाइल्ड लाइफ साइंस में शोध कार्य भी कर सकते हैं तथा वन्य जीव विज्ञान में योगदान देते हैं।
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