पहल : केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने लॉन्च किया निपुण भारत मिशन, बच्चों की सीखने की जरूरतों को पूरा करेगा
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का प्रत्येक बच्चा 2026-27 तक ग्रेड-3 के अंत तक कम से कम मूलभूत साक्षरता और संख्या की गणना करने का कौशल आवश्यक रूप से प्राप्त कर सके।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ पोखरियाल 'निशंक' ने सोमवार, पांच जुलाई, 2021 को वर्चुअल माध्यम से समझ के साथ पढ़ने तथा संख्या गणना में निपुणता के लिए राष्ट्रीय पहल निपुण भारत (National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy - NIPUN Bharat) को लॉन्च किया। इस मौके पर एक शॉर्ट वीडियो, एंथम और निपुण भारत से जुड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का प्रत्येक बच्चा 2026-27 तक ग्रेड-3 के अंत तक कम से कम मूलभूत साक्षरता और संख्या की गणना करने का कौशल आवश्यक रूप से प्राप्त कर सके। निपुण भारत को स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा लागू किया जाएगा और केंद्र प्रायोजित योजना समग्र शिक्षा अभियान के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय-राज्य-जिला-ब्लॉक-स्कूल स्तर पर एक पांच स्तरीय कार्यान्वयन तंत्र स्थापित किया जाएगा।
इस मौके पर डॉ निशंक ने कहा कि निपुण भारत का उद्देश्य 3 से 9 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की सीखने की जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बुनियादी भाषा के विकास के लिए हर बच्चे की साक्षरता और संख्यात्मक कौशल पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि उन्हें बेहतर पाठकों और लेखकों के रूप में विकसित करने में मदद मिले। इस तरह निपुण भारत ने बुनियादी चरण में ही सीखने के अनुभव को समग्र, एकीकृत, समावेशी, सुखद और आकर्षक बनाने की परिकल्पना की है।
I believe school education is the foundation of our education system. Strengthening it with better and skill based learning methodology will enhance the capabilities of our students. pic.twitter.com/r3VUzHwT7o
— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) July 5, 2021
डॉ निशंक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में यह निर्धारित किया गया है कि सभी बच्चों के लिए मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल प्राप्त करना तात्कालिक राष्ट्रीय उद्धेश्य बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि 2021-22 में फाउंडेशनल स्टेज के लिए विभिन्न उपायों को लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समग्र शिक्षा योजना के तहत 2688.18 करोड़ रुपये की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।
अभियान के तहत शिक्षकों की सघन क्षमता निर्माण से उन्हें सशक्त बनाया जाएगा और अध्यापन कला चुनने के लिए अधिक स्वायत्ता प्रदान की जाएगी। साथ ही बच्चे तेजी से सीखने की गति हासिल कर सकेंगे, जिसका बाद में रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव हो सकता है। वहीं, शारीरिक और सामाजिक - भावनात्मक विकास, साक्षरता और संख्यात्मक विकास, संज्ञानात्मक विकास, जीवन कौशल आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके बच्चे का समग्र विकास प्रगति कार्ड में परिलक्षित होगा।
I firmly believe that our new education policy 2020 will stop rote learning as it's based on 'How to think' principle and not 'What to think'. pic.twitter.com/V3QbHSwrxP
— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) July 5, 2021
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