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UGC: इंजीनियरिंग कॉलेजों में नेट के बिना शिक्षक, मतभेद बढ़े; एआईसीटीई ने पत्र लिखकर जताई आपत्ति
Wed, 22 Jan 2025 07:43 AM IST
शिवम गर्ग
सीमा शर्मा
सीमा शर्मा
Published by: शिवम गर्ग
Updated Wed, 22 Jan 2025 07:43 AM IST
सार
UGC Regulation: एआईसीटीई ने यूजीसी रेग्यूलेशन 2025 के मसौदे को लेकर केंद्र सरकार को पत्र लिखकर शिकायत की है। यूजीसी ने पिछले हफ्ते इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी 55 फीसदी अंकों के साथ नेट के बिना असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का बयान दिया था।
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UGC Regulation
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
UGC Regulation: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से पिछले दिनों जारी यूजीसी (नियम) रेग्यूलेशन 2025 के मसौदे को लेकर मतभेद उभर आए हैं। यूजीसी ने पिछले हफ्ते इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी 55 फीसदी अंकों के साथ नेट के बिना असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का बयान दिया था।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इस पर आपत्ति जताई है। उसने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर शिकायत की है। इसमें एआईसीटीई विनियमित संस्थानों से संबंधित यूजीसी की घोषणाओं पर बिना उससे परामर्श किए बयान देने पर नाराजगी जाहिर की गई है। दरअसल, पिछले हफ्ते यूजीसी ने नेट के बिना शिक्षक बनने पर उठे सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि 55 फीसदी अंकों के साथ यूजीसी नेट के बिना भी इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकते हैं। एआईसीटीई के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विषय के लिए शिक्षक भर्ती के लिए ये नियम और शर्तें हैं।
और भी पढ़ें: विश्वविद्यालयों के शिक्षक नहीं कर सकेंगे छुट्टी पर दावा; लागू होंगे सख्त सामान्य कर्तव्य
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इसी पर एआईसीटीई ने केंद्र सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। एआईसीटीई का कहना है कि उससे बिना कोई विमर्श, चर्चा और बैठक के यूजीसी किस आधार पर एआईसीटीई शिक्षक भर्ती नियमों पर टिप्पणी कर सकता है, जबकि यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। यूजीसी की इस टिप्पणी से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है।
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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इस पर आपत्ति जताई है। उसने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर शिकायत की है। इसमें एआईसीटीई विनियमित संस्थानों से संबंधित यूजीसी की घोषणाओं पर बिना उससे परामर्श किए बयान देने पर नाराजगी जाहिर की गई है। दरअसल, पिछले हफ्ते यूजीसी ने नेट के बिना शिक्षक बनने पर उठे सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि 55 फीसदी अंकों के साथ यूजीसी नेट के बिना भी इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकते हैं। एआईसीटीई के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विषय के लिए शिक्षक भर्ती के लिए ये नियम और शर्तें हैं।
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इसी पर एआईसीटीई ने केंद्र सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। एआईसीटीई का कहना है कि उससे बिना कोई विमर्श, चर्चा और बैठक के यूजीसी किस आधार पर एआईसीटीई शिक्षक भर्ती नियमों पर टिप्पणी कर सकता है, जबकि यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। यूजीसी की इस टिप्पणी से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है।
दोनों ही उच्च शिक्षा की नियामक संस्था
एआईसीटीई और यूजीसी दोनों ही देश की उच्च शिक्षक नियामक संस्था हैं। एआईसीटीई तकनीकी कॉलेजों और यूजीसी सामान्य विश्वविद्यालयों में डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन, अनुसंधान के मानकों के समन्वय, निर्धारण और रख-रखाव के लिए वैधानिक संगठन है। ऐसे में दोनों के बीच की दूरियां उच्च शिक्षा की रफ्तार को प्रभावित करेंगी।और भी पढ़ें: यूजीसी नेट या पीएचडी वाले विषय में बन सकेंगे शिक्षक; एनईपी के तहत संशोधन की तैयारी
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