Vanniyar Reservation: वनियार समुदाय को 10.5 फीसदी आरक्षण के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
याचिका में कर्नाटक हाईकोर्ट की ओर से 1 नवंबर, 2021 को दिए गए फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें अदालत ने वनियार समुदाय को मिले आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वनियार समुदाय को तमिलनाडु के शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में 10.5 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में याचिकाओं पर फैसले को सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने वनियार समुदाय को मिले आरक्षण को खारिज कर दिया था। वनियार तमिलनाडु में अति पिछड़ा समुदाय के अंतर्गत आते हैं। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की पीठ ने सभी पक्षों को लिखित बयान दायर करने को कहा है।
बड़ी बेंच को नहीं भेजा गया मामला
सर्वोच्च न्यायलय ने इससे पहले इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने से मना कर दिया था। पीठ ने कहा था कि उन्होंने मामले पर निर्णय का अध्ययन किया है और ऐसा विचार है कि इस मुद्दे को बड़ी बेंच के पास भेजने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट तमिलनाडु राज्य, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके), और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में कर्नाटक हाईकोर्ट की ओर से 1 नवंबर, 2021 को दिए गए फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें अदालत ने वनियार समुदाय को मिले आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया था।
आरक्षण का किया गया था बंटवारा
तमिलनाडु विधानसभा ने फरवरी महीने में एआईएडीएमके पार्टी के बिल को पारित किया था, जिसमें वनियार समुदाय को आंतरिक रूप से 10.5 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया गया था। इसके बाद डीएमके की सरकार ने जुलाई, 2021 में इसे लागू करने का आदेश जारी किया था। इसके अंतर्गत अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) को मिले 20 फीसदी आरक्षण को बांटकर तीन भागों में विभाजित कर दिया गया था। इनमें 10.5 फीसदी की व्यवस्था वनियार समुदाय के लिए की गई थी, जिन्हें पहले वन्नियाकुल क्षत्रिय के नाम से जाना जाता था।
मद्रास हाईकोर्ट ने खारिज किया था फैसला
मद्रास हाईकोर्ट ने इस आरक्षण को खारिज करते हुए कहा था कि क्या राज्य सरकार को आंतरिक आरक्षण करने का अधिकार है? संविधान ने इसके लिए पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया है। राज्य सरकार ऐसा कोई भी कानून नहीं ला सकती।
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