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Medical Education: फीस बढ़ोतरी पर सुप्रीम प्रहार, कहा- शिक्षा लाभ कमाने का धंधा नहीं, कम होनी चाहिए ट्यूशन फीस

Tue, 08 Nov 2022 06:00 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडेय Updated Tue, 08 Nov 2022 06:00 PM IST
सार

Medical Education: जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने सोमवार को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें एमबीबीएस छात्रों द्वारा देय शिक्षण शुल्क को बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था।

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Supreme Court observed Imparting education is not a business to earn profit
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निजी गैर-सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए वार्षिक ट्यूशन फीस को बढ़ाकर 24 लाख करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश, जिसने फीस बढ़ोतरी को अनुचित बताया है, को बरकरार रखा है। 

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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने जोर देकर कहा, फीस को बढ़ाकर 24 लाख करना, जो पहले तय की गई फीस से सात गुना अधिक है, बिल्कुल भी उचित नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार और याचिकाकर्ता निजी मेडिकल कॉलेजों को कहा कि शिक्षा लाभ कमाने का व्यावसाय नहीं है। ट्यूशन फीस हमेशा अफोर्डेबल होनी चाहिए, जिसे सभी वर्गों से आने वाले छात्र वहन कर सकें। 

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इसलिए, न्यायालय ने राज्य सरकार और राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) और उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (MCPC) को भुगतान किए जाने वाले अपीलकर्ता प्रत्येक मेडिकल कॉलेज पर 2.5 लाख की लागत लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें निजी गैर-सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए वार्षिक ट्यूशन फीस को बढ़ाकर 24 लाख रुपये करने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। 

पीठ ने मेडिकल कॉलेजों को सितंबर 2017 में जारी सरकारी आदेश (जीओ) के तहत छात्रों से वसूल की गई अतिरिक्त फीस वापस करने के लिए उच्च न्यायालय के निर्देशों को भी बरकरार रखा, जिसके द्वारा राज्य ने फीस में वृद्धि की थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि प्रवेश और शुल्क नियामक समिति (एएफआरसी) पहले से निर्धारित ट्यूशन फीस से अधिक ट्यूशन फीस तय करती है, तो यह संबंधित छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेजों से इसे वसूल करने के लिए हमेशा खुला रहेगा। हालांकि, संबंधित मेडिकल कॉलेजों को एकत्र की गई राशि को बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

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न्यायाधीशों ने कहा कि शुल्क का निर्धारण या शुल्क की समीक्षा, निर्धारण नियमों के मापदंडों के भीतर होगा और इसका सीधा संबंध होगा -
 

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                                                    पेशेवर संस्थान का स्थान
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                                                    व्यावसायिक पाठ्यक्रम की प्रकृति
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                                                    उपलब्ध बुनियादी ढांचे की लागत
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                                                    प्रशासन और रखरखाव पर खर्च
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                                                    संस्था की वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक उचित अधिशेष
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                                                    आरक्षित वर्ग के छात्रों के संबंध में शुल्क की छूट, यदि कोई हो, के कारण राजस्व परित्यक्त
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                                                    पीठ ने कहा कि ट्यूशन फीस की समीक्षा करते समय एएफआरसी द्वारा इन सभी कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है।


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