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देश को गोल्ड मेडल दिलाने वाली मनिका बत्रा ने खोले राज, कहा- मेरे लिए परिवार ने किया है त्याग
मनिका बत्रा
Updated Sat, 21 Apr 2018 08:42 PM IST
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Manika Batra
मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रमंडल खेलों में मेरी सफलता के बाद देश में बैडमिंटन की तरह टेबल टेनिस के क्षेत्र में भी बदलाव आएगा। और इस खेल के बारे में लोग गंभीरता से सोचेंगे। वैसे दूसरे खेलों की तरह यह खेल भी आसान नहीं है। करीब उन्नीस साल पहले, जब मैं चार साल की थी, घरवालों ने मेरे बारे में एक निर्णय लिया था। अपनी बड़ी बहन की देखा-देखी मैं भी घर में एक मेज पर ही टेबल टेनिस खेलने की कोशिश करने लगी थी।
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घरवालों ने मेरी बहन के कोच को मेरे बारे में बताया। और फिर कोच की सलाह पर मेरा दाखिला भी उसी स्कूल में करा दिया गया, जहां मेरी बहन पढ़ती थी। इसकी वजह यही थी कि उस स्कूल में टेबल टेनिस प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा मौजूद थी। कुछ इस तरह से खिलाड़ी बनने का मेरा सफर शुरू हुआ था। मेरे पिता पिछले कई बरसों से दिल के मरीज हैं। पहले वह पुरानी दिल्ली में एक दुकान चलाते थे। परिवार को बेहतर तरीके से चलाने में मेरी मां का बड़ा योगदान है।
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जब पढ़ाई और खेल में से एक को चुनना था
जब मैंने खेलना शुरू किया था, तब मेरी पढ़ाई भी समानांतर तरीके से चल रही थी। मैंने कभी किसी काम को चलताऊ तरीके से करना नहीं चाहा। एक वक्त ऐसा आया कि सुबह-शाम प्रैक्टिस के बाद पढ़ाई पर ध्यान दे पाना मेरे लिए मुश्किल हो गया। मुझे फैसला लेना था कि मैं किसी एक को ज्यादा तवज्जो दूं। वह फैसला इतना आसान नहीं था। अंततः मैंने खेल को ही करियर के लिए चुना और पूरी तरह से इसी लक्ष्य पर जुट गई, पर साथ में पढ़ाई भी जारी रखी।
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मेरे लिए परिवार ने किया है त्याग
जब मैं अपनी कई सहेलियों को मन लगाकर पढ़ते हुए देखती, तब यही लगता कि मैंने खेल के लिए एक बहुत बड़ी चीज से समझौता किया है। वैसे तो आज भी टेबल टेनिस भारत में बहुत लोकप्रिय नहीं है, मगर उस वक्त इस खेल को करियर के रूप में चुनना मेरे लिए और बड़ी चुनौती था। आगे मेरे दोनों बड़े भाई-बहन ने खेलना छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने मां के साथ मिलकर मेरे खेल की बेहतरी के लिए जो हो सका, वह किया। साथ ही अपने कोच संदीप गुप्ता की मेहनत को मैं कभी नहीं भूल सकती।
ठुकरा दिया मॉडलिंग का प्रस्ताव
कुछ लोगों ने मेरे सामने मॉडलिंग में हाथ आजमाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन मैं तो बहुत पहले से सिर्फ टेबल टेनिस के लिए पसीना बहा रही थी, सो ऐसे किसी प्रस्ताव पर मैंने कभी ध्यान नहीं दिया। मैं जूनियर स्तर से दिल्ली समेत कई प्रतियोगिताओं की सभी कैटेगरी में अच्छा कर रही थी। सैफ खेलों से लेकर अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मैंने सफलता का स्वाद चख लिया था और मुझे विश्वास था कि आने वाला समय मेरा है।
एकल और युगल, दोनों पसंद हैं
सचिन तेंदुलकर मेरे सर्वकालिक खेल आदर्श हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। क्रिकेट के अलावा मुझे लॉन टेनिस भी पसंद है, लेकिन वक्त न मिल पाने की वजह से मैंने काफी समय से टीवी नहीं देखा है। मैं फिलहाल पूरी तरह विश्व चैंपियनशिप के साथ एशियाड की तैयारी कर रही हूं, जहां मुझे राष्ट्रमंडल खेलों से कहीं बड़ी चुनौती का सामना करना है। वैसे तो मैं एकल और युगल, दोनों स्पर्धाओं को एकसमान चाव से खेलती हूं, लेकिन मुझे लगता है एकल खेलना ज्यादा मजेदार है।
-मनिका बत्रा से नूतन कुमार गुप्ता की बातचीत पर आधारित।
जब मैं अपनी कई सहेलियों को मन लगाकर पढ़ते हुए देखती, तब यही लगता कि मैंने खेल के लिए एक बहुत बड़ी चीज से समझौता किया है। वैसे तो आज भी टेबल टेनिस भारत में बहुत लोकप्रिय नहीं है, मगर उस वक्त इस खेल को करियर के रूप में चुनना मेरे लिए और बड़ी चुनौती था। आगे मेरे दोनों बड़े भाई-बहन ने खेलना छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने मां के साथ मिलकर मेरे खेल की बेहतरी के लिए जो हो सका, वह किया। साथ ही अपने कोच संदीप गुप्ता की मेहनत को मैं कभी नहीं भूल सकती।
ठुकरा दिया मॉडलिंग का प्रस्ताव
कुछ लोगों ने मेरे सामने मॉडलिंग में हाथ आजमाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन मैं तो बहुत पहले से सिर्फ टेबल टेनिस के लिए पसीना बहा रही थी, सो ऐसे किसी प्रस्ताव पर मैंने कभी ध्यान नहीं दिया। मैं जूनियर स्तर से दिल्ली समेत कई प्रतियोगिताओं की सभी कैटेगरी में अच्छा कर रही थी। सैफ खेलों से लेकर अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मैंने सफलता का स्वाद चख लिया था और मुझे विश्वास था कि आने वाला समय मेरा है।
एकल और युगल, दोनों पसंद हैं
सचिन तेंदुलकर मेरे सर्वकालिक खेल आदर्श हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। क्रिकेट के अलावा मुझे लॉन टेनिस भी पसंद है, लेकिन वक्त न मिल पाने की वजह से मैंने काफी समय से टीवी नहीं देखा है। मैं फिलहाल पूरी तरह विश्व चैंपियनशिप के साथ एशियाड की तैयारी कर रही हूं, जहां मुझे राष्ट्रमंडल खेलों से कहीं बड़ी चुनौती का सामना करना है। वैसे तो मैं एकल और युगल, दोनों स्पर्धाओं को एकसमान चाव से खेलती हूं, लेकिन मुझे लगता है एकल खेलना ज्यादा मजेदार है।
-मनिका बत्रा से नूतन कुमार गुप्ता की बातचीत पर आधारित।
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