कभी नहीं मिलता था दो वक्त का खाना, फिर बना दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी का मालिक
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'खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है...'
-अलामा इक़बाल
ये वो पंक्तियां हैं जो हमारे आपके जैसे लोगों को जीने की हिम्मत देती है बावजूद इसके चाहे कितना भी बुरा वक्त क्यों न आ जाए।
शायद एंड्रयू कारनेगी के वक्त ये लाइनें नहीं लिखी गई होंगी। आप सोच रहे होंगे कि ये किसकी बात की जा रही है। तो आपको बता दें कि एंड्रयू कारनेगी एक वक्त दुनिया के सबसे अमीर आदमी थे और दुनिया के सबसे बड़े स्टील टाइकून भी। लेकिन अमीर आदमी बनने के पहले की कहानी दिल दहला देने वाली है।
कार्नेगी का जन्म एक बेहद ही गरीब परिवार में हुआ था। पिता स्कॉटलैंड में बुनकर का काम करते थे। पूरे परिवार के रहने के लिए सिर्फ एक कमरा था। हालत इतनी बुरी थी कि कई बार रातों को भूख से बचने के लिए जल्दी सो जाना पड़ता था। इस बुरे हालात से उबरने के लिए पूरा परिवार अमेरिका शिफ्ट हो गया।
फैक्ट्री में करते थे बोब्बिन ब्वॉय का काम
कारनेगी ने अपनी पहली नौकरी 13 साल की उम्र में की थी। वो सूत कातने वाली फैक्ट्री में एक बोब्बिन ब्वॉय का काम करते थे। बोब्बिन ब्वॉय का काम ये होता था कि वो फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं को लाकर बोब्बिन दिया करते थे। हफ्ते के 6 दिन 12-12 घंटे की नौकरी।
इसके बाद वो बचे हुए वक्त में रोबर्ट बर्न्स जैसे राइटर और स्कॉटलैंड के इतिहास की पढ़ाई करते थे। कारनेगी एक मेहनती लड़का था जिसे दुनिया में अपनी एक पहचान बनानी थी।
वक्त बीता काम बदला, कुछ दिनों तक मैसेंजर ब्वॉय का काम किया। लेकिन लगन कम नहीं हो रही थी, पढ़ना शौक था तो एक सिरे से वो चला जा रहा था। मेहनती होने की वजह से उन्हें टेलीग्राफ मैसेंजर से ऑपरेटर बना दिया गया।
कोलोनल जेम्स एंडरसन ने एक लाइब्रेरी खोली थी और इसकी सबसे खास बात ये थी कि ये काम करने वाले लड़को के लिए शनिवार की रात खुलता था। जेम्स ने कारनेगी की मेहनत और पढ़ने की इच्छा को देखा तो उन्होंने इन्हें पढ़ने लिखने के लिए खूब बढ़ावा दिया। इसके बाद कारनेगी ने रेलरोड बनाने वाली कंपनियों के साथ एक-एक कर खूब काम किए। इस काम का फायदा ये हुआ कि कारनेगी को अब इस इंडस्ट्री और बिजनेस का मॉडल समझ में आने लगा था।
कारनेगी स्टील कॉरपोरेशन का किया निर्माण
यहीं से चीजें बदलनी शुरू हुई। अब कारनेगी ने पैसे कमाने भी शुरू कर दिए थे। यहां से उन्होंने स्टील और ऑयल कंपनियों में भी इन्वेस्टमेंट शुरू कर दिए। यहां उन्हें अच्छा खासा फायदा मिला। धीरे धीरे बिजनेस बढ़ने लगा। हालात ये हो गए कि साल 1889 के दौर में कारनेगी स्टील कॉरपोरेशन अपने तरह की दुनिया कि सबसे बड़ी स्टील कंपनी हो गई। इसके बाद कारनेगी दुनिया के सबसे धनी आदमी में से एक हो गए।
स्कॉटलैंड से अमेरिका आया एक गरीब लड़का अमेरिका को समृध्द करने वाले लोगों में से एक हो गया। 1901 में कारनेगी ने अपनी स्टील कंपनी कारनेगी स्टील को जेपी मॉर्गन को $480 मिलियन में बेच दिया।
इन पैसों में से लाखों नहीं बल्कि करोड़ों उन्होंने न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी को दान कर दिया। कारनेगी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नाम से एक यूनिवर्सिटी बनाई, जिसे अब कारनेगी-मेल्लोन यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए कारनेगी फाउंडेशन का गठन किया और भी ना जाने कितने ही काम किए।
जिस लड़के ने अमेरिका की एक फैक्ट्री में अपना पेट भरने के लिए 13 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था, उस लड़के ने खुद को अमेरिका को समृद्ध करने वाले लोगों की श्रेणी में खड़ा कर दिया था।
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