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Sudhir K: कभी स्कूल जाने के लिए साइकिल भी न थी, आज हैं जहाजों के बेड़े; अवसरों को पहचान कर बदली अपनी तकदीर

Mon, 30 Jun 2025 06:06 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 30 Jun 2025 06:06 AM IST
सार

मामूली तनख्वाह से शुरुआत करने वाले नेवियो शिपिंग के मालिक सुधीर ने मेहनत को नाव और जिद को अपनी पतवार बनाकर न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि 2,700 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की कंपनी खड़ी की। उन्होंने साबित किया कि सपनों की ऊंचाई, हालात की मजबूरी से कहीं बड़ी होती है...  

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Success Story: Navio Shipping owner Sudhir K changed his fortunes by recognizing opportunities
सुधीर के, मालिक, नेवियो शिपिंग - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

सपने चाहे छोटे हों या बड़े, अगर उन्हें पूरा करने की जिद हो तो मंजिल चाहे जितनी भी दूर क्यों न हो, कदम वहां तक पहुंचते जरूर हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं नेवियो शिपिंग के संस्थापक सुधीर के। सुधीर के ऊपर बशीर बद्र की मशहूर गजल की यह पंक्ति ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं, तुम ने मिरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा बिल्कुल सटीक बैठती है, क्योंकि सुधीर को शोहरत विरासत में नहीं मिली है, बल्कि वह मेहनत की भट्टी में तपकर यहां तक पहुंचे हैं। किसे पता था कि एक समय नौकरी के लिए दर-दर भटकने वाला मामूली लड़का अपने दम पर एक दिन 2,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार खड़ा करेगा। हालांकि, उन्हें यह सफलता यूं ही नहीं मिल गई। उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा भी था, जब महज चंद रुपये बचाने के लिए सुधीर कोसों पैदल चला करते थे। उनका हर एक कदम उनके दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत का ही प्रमाण है कि वह आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। उनकी कहानी यह सीख देती है कि सफलता केवल बड़े सपने देखने से नहीं, बल्कि उन्हें हकीकत में बदलने के लिए किए गए अथक प्रयासों और चुनौतियों का डटकर सामना करने से मिलती है। सुधीर हर उस युवा के लिए प्रेरणा हैं, जो जिंदगी में बड़ा सोचता है और उसे सच करने का हौसला रखता है।

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संघर्ष की शुरुआत
सुधीर के का जन्म तिरुवनंतपुरम से पच्चीस किलोमीटर दूर एक छोटे-से गांव कोलायिल में एक साधारण परिवार में हुआ था। सुधीर ने 1985 में गांव के ही एक स्कूल से बारहवीं तक की पढ़ाई की है। वह एक किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। ऐसे में, साइकिल खरीदना उनके लिए सपने जैसा था। वर्ष 1988 में सुधीर ने बीएससी की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने अंग्रेजी साहित्य से एमए करने का फैसला किया और श्री विद्याधिराजा कॉलेज में दाखिला लिया। हालांकि, फाइनल परीक्षा देने से पहले ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद 1991 में उन्होंने मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया। 1992 में केरल विश्वविद्यालय से जर्मन भाषा का कोर्स किया। इतना सारा ज्ञान और डिग्री होने के बावजूद भी सुधीर को नौकरी नहीं मिल रही थी। पिता के रिटायर होने के बाद पूरा परिवार उनकी मामूली पेंशन पर निर्भर था। ऐसे में दिक्कतें बढ़ती ही जा रही थीं।
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1000 रुपये की तनख्वाह से शुरू की नौकरी
सुधीर कुछ काम-धंधा करके परिवार की माली हालात में सुधार लाना चाहते थे, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी नौकरी न मिलने से हताश थे। काफी हाथ-पैर मारने के बाद उनके चचेरे भाई की बदौलत उन्हें अरबी शिपिंग कंपनी में एक हजार की मासिक तनख्वाह वाली नौकरी मिल गई। इन पैसों से वह परिवार की कुछ खास मदद नहीं कर पा रहे थे, जिसकी कसक अंदर ही अंदर उन्हें खाए जा रही थी। इसी वजह से बेहतर नौकरी की तलाश में वह कोच्चि चले गए और ए वी थॉमस एंड कंपनी लिमिटेड के सेल्स और मार्केटिंग विभाग से जुड़ गए। यहीं पर उनकी मुलाकात उनकी पत्नी अंजलि से हुई।


जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट
बेहतर मौके की तलाश में सुधीर ने 1999 में दुबई का रुख किया। वहां पहुंच कर वह एक कंपनी में नौकरी करने लगे, लेकिन वेतन बहुत कम था। महज 40-45 रुपये बचाने के लिए वह दुबई में पांच से सात किलोमीटर तक पैदल चला करते थे। सुधीर के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब वर्ष 2007 में उन्हें कारवेल लॉजिस्टिक्स में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिली। कंपनी के मालिक ने उनकी क्षमता पर विश्वास करके उन्हें अपने तरीके से काम करने की आजादी दी। सुधीर कड़ी मेहनत के दम पर सात साल के भीतर ही जीएम के पद पर पहुंच गए।

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जमी-जमाई नौकरी छोड़ी
वर्ष 2014 में, सुधीर ने अपनी खुद की लॉजिस्टिक्स कंपनी शुरू करने का फैसला किया और जमी-जमाई नौकरी छोड़ दी। काफी निवेशकों से निराशा हाथ लगने के बाद आखिरकार उन्हें एक निवेशक मिला। इसके बाद सुधीर ने दुबई में नेवियो शिपिंग एलएलसी और भारत में मुंबई में नेवियो शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। नेवियो शिपिंग दुनिया भर में कार्गो परिवहन को संभालती हैै। आज, उनके बेड़े में कई जहाज हैं। उनकी कंपनी नेवियो शिपिंग के कार्यालय सिंगापुर, मलयेशिया, चीन, थाईलैंड, अमेरिका, फ्रांस और इटली जैसे कई नामचीन देशों में भी हैं।

युवाओं को सीख

  • जिसका लक्ष्य बड़ा होता है, उसकी परीक्षा भी उतनी ही कठिन होती है।
  • इन्सान का भविष्य उसके द्वारा तय किए गए लक्ष्य पर निर्भर करता है।
  • अगर आप अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर हैं, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं।
  • यदि आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तो कोई और कैसे विश्वास करेगा?
  • अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो कि बाकी सब धुंधला लगने लगे।
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