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54 एचआईवी पॉजीटिव लड़कियों का जीवन संवार रही है ये मां
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 01 Jul 2016 08:13 AM IST
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एचआईवी पॉजीटिव होने के बावजूद भी इस महिला ने हार नहीं मानी। आज वो खुद तो बेहतर जिंदगी जी ही रही हैं साथ ही साथ अपनी तरह 54 एचआईवी पॉजीटिव अनाथ बच्चियों का जीवन भी संवार रही हैं। वो इन बच्चियों को एक मां की तरह प्यार करती है, तभी तो ये बच्चियां इन्हें मां कहकर बुलाती हैं।
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एचआईवी पॉजीटिव दाक्षा पटेल 'गुजरात नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विथ एचआईवी एड्स' की सेक्रेटरी हैं। ये संस्था जननी धाम चलाती है। 2009 में दाक्षा ने जननी धाम का शुभारंभ किया था। इसको गुजरात सरकार के सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट और सूरत के पी पी साहनी ग्रुप से सहायता मिल रही है। ये संस्था एचआईवी पॉजीटिव लड़कियों और महिलाओं के पुनर्वासन में उनकी मदद तो करती ही है साथ ही साथ उन्हें समाज में सिर उठाकर जीना भी सिखाती है। जननी धाम सूरत के बाहर बना हुआ है।
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आज करीब 54 लड़कियां यहां रहती हैं। इसमें से 50 फीसदी अनाथ हैं। सभी दाक्षा को अपनी मां मानती हैं। चंदानी( बदला हुआ नाम) केवल 2 महीने की थी जब वो रेलवे स्टेशन के पास मेहसाना पुलिस को मिली थी। पुलिस ने चंदानी को दाक्षा को सौंप दिया और तब से वो जननी धाम में है। उसी के साल भर बाद दाक्षा ने चंदानी का दाखिला पास के स्कूल में करा दिया। अब वो पढ़ाई कर रही है और बेहतर भविष्य बनाने का सपना देख रही है।
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सिर्फ बच्चियां ही नहीं बल्कि जननी धाम में काम करने वाला पूरा स्टाफ एचआईवी पॉजीटिव है
नंदिनी 14 साल की एचआईवी पॉजीटिव अनाथ लड़की है। जब उसे जननी धाम में लाया गया था तब वो केवल 6 साल की थी। वो कहती है कि दाक्षा हमारी मां है हम अपनी जिंदगी यहीं जननी धाम में गुजारना चाहते हैं।
दाक्षा बताती हैं कि इन लड़कियों को समाज में सम्मान के साथ जीने का अधिकार जननी धाम ने दिया, नहीं तो उन्हें समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ता। वो आगे कहती हैं कि हर मां की तरह मेरा भी अपनी 54 बच्चियों को बेहतर भविष्य देने का सपना है। मैं उन्हें बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देकर दोबारा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना चाहती हूं। यहां रहने वाली बच्चियां ही नहीं बल्कि जननी धाम में काम करने वाला पूरा स्टाफ भी एचआईवी पॉजीटिव ही है।
आपको दाक्षा की ये कहानी कैसी लगी? आप अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिखकर हम तक पहुंचा सकते हैं। आप चाहें तो इसे सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इनकी सक्सेस स्टोरी से प्रभावित होकर जरुरतमंदों की मदद के लिए तत्पर हो सकें।
दाक्षा बताती हैं कि इन लड़कियों को समाज में सम्मान के साथ जीने का अधिकार जननी धाम ने दिया, नहीं तो उन्हें समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ता। वो आगे कहती हैं कि हर मां की तरह मेरा भी अपनी 54 बच्चियों को बेहतर भविष्य देने का सपना है। मैं उन्हें बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देकर दोबारा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना चाहती हूं। यहां रहने वाली बच्चियां ही नहीं बल्कि जननी धाम में काम करने वाला पूरा स्टाफ भी एचआईवी पॉजीटिव ही है।
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