सफलता की मिसाल: 10वीं में फेल होने के बाद भी बने अरबपति
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पढ़ाई को अधिकांश लोग सफलता की प्रथम और आखिरी सीढ़ी मानते हैं। भले ही उन्हें बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेने के बाद चपरासी के लिए आवेदन करना पड़े।
बच्चे और उनके माता-पिता 10वीं ,12वीं पास करने के लिए जी जान लगा देते हैं। कुछ तो पढ़ाई को इतना ज्यादा तवज्जो देते हैं कि जैसे पढ़ाई ही उनके जीवन का आखिरी लक्ष्य हो और अच्छी पढ़ाई नहीं की तो मानो वह जीवित नहीं रहेंगे।
लेकिन दुनिया में ऐसे भी कुछ लोग हैं जिनकी सफलता इस मिथक तोड़ती है कि कोई अच्छी पढ़ाई करने के बाद ही सफल व्यक्ति बन सकता है।
10वीं से ही पढ़ाई छोड़कर सफल व्यक्ति बनने वाले लोगों में से एक वर्जिन ग्रुप के संस्थापक रिचर्ड ब्रांसन भी हैं। रिचर्ड ब्रांसन आज अरबपति व्यक्ति हैं और उनके वर्जिन ग्रुप में 400 कंपनियां हैं। आगे पढ़े ब्रांसन ने क्यों छोड़ी पढ़ाई?
टीचर ने कहा था जेल में जिंदगी गुजरेगी या...
रिचर्ड ब्रेनसन के दादा लंदन के हाईकोर्ट ऑफ जस्टिस में एक जज थे। ब्रांसन के तीसरे दादा 1793 में भारत आए। इस दौरान ब्रांसन के पिता भी मद्रास आ गए तो यहीं पर उन्होंने एक भारतीय महिला से शादी की जिससे जन्म हुआ रिचर्ड ब्रांसन का।
रिचर्ड जब कुछ बड़े हुए तो उनके घर वालों ने लंदन स्टोव स्कूल में पढ़ने भेज दिया। लेकिन उन्हें डिस्लेक्सिया नाम की बीमारी होने के कारण वह सही से नहीं पढ़ पाते थे। लेकिन मुश्किल तो तब हो गई जब क्लास में उनकी पहचान एक मंदबुद्धि छात्र में रूप में बन गई।
रिचर्ड का पढ़ाई में मन न लगने के कारण एक दिन स्कूल के हेडमास्टर ने कहा कि उनकी सारी जिंदगी जेल में बीतेगी या फिर वह एक अरबपति बनेंगे। वहीं रिचर्ड के घर वाले बहुत ही सपोर्टिव नेचर के थे जिससे वे रिचर्ड को वह सब करने में मदद करते जो वह करना चाहते थे।
रिकॉर्ड शॉप से खुली रिचर्ड की किस्मत
16 की उम्र में ही रिचर्ड ने हाइस्कूल से पढ़ाई छोड़ दी। वह अब एक चर्च से निकलने वाली स्टुडेंट मैगजीन से जुड़े। इस मैगजीन के लिए उन्होंने कई बड़ी हस्तियों के साक्षात्कार लिए और प्रकाशित किए। इसी दौरान उन्होंने कुछ खास रिकॉर्ड (म्यूजिक सीडी) के विज्ञापन इस मैगजीन में छापे। इस विज्ञापन का उन्हें बहुत लाभ मिला और वह रातों-रात एक कारोबारी बन गए।
उनके रिकॉर्ड की बिक्री बहुत ही तेजी के साथ हुई और डिमांड भी बढ़ गई। धंधा चलने लगा तो उन्होंने रिकॉर्ड की एक दुकान खोली और दुकान का नाम रखा वर्जिन।
रिचर्ड ने अपनी दुकान का नाम वर्जिन अपने एक कर्मचारी के सुझाव पर रखा। कर्मचारी ने दुकान का नाम रखने पर सुझाव दिया अगर उन्हें धंधा के बारे में कुछ भी नहीं पता है और इस काम में वह बिल्कुल नए हैं तो वर्जिन नाम अच्छा होगा। इस प्रकार से रिचर्ड का धंधा बढ़ता गया और देखते ही देखते वह एक सफल कारोबारी बन गए।
वर्जिन ग्रुप में आज 400 कंपनियां काम कर रहीं हैं। वर्जिन एअरलाइन्स भी इसी वर्जिन ग्रुप की एक कंपनी है।
2006 में संडे टाइम्स की ओर से जारी यूरोप के 1000 अमीर लोगों की लिस्ट रिचर्ड ब्रांसन नौवें नंबर के सबसे अमीर शख्स हैं। तब इनकी संपत्ति तीन अरब यूरो के करीब आंकी गई थी।
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