कभी मिड डे मील से भरता था अपनों का पेट, आज है 1000 करोड़ का मालिक
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बचपन में स्कूल की रोटियों पर गुजारा करने वाला शख्स आज दक्षिण भारत का जाना माना ज्वैलर बन चुका है। इसकी कंपनियों और शोरूम्स का टर्नओवर 1500 करोड़ रुपए है।
विनोबानगर, बैंगलोर की झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले कुलाचार नानजुनदाचार स्कूल से घर कुल बारह रोटियां ले जाते थे, अपने सात भाई बहन और माता-पिता का पेट भरने के लिए। ये सब उनके लिए इतना आसान नहीं था। पर आज 49 वर्ष के स्कूल रिकार्ड के नानजुनदाचार इन सबसे आगे निकल चुके हैं।
के.पी. नानजुनदी आज श्री लक्ष्मी गोल्ड पैलेस के मालिक और कर्नाटक का जाना पहचाना नाम बन गये हैं। उनकी कंपनी इस साल के अंत तक 1000 करोड़ के टर्नओवर की उम्मीद कर रहीं है। नानजुनदी 2015 तक छः और शोरुम खोलने वाले हैं। बैंगलोर, मैंगलोर, हुबली और बेलगॅाम में पहले ही उनके सात शोरुम हैं।
इसके अलावा उनके पांच सिल्क के शोरुम भी हैं और अगले तीन साल में 300 करोड़ की पूंजी कर्नाटक के दावानागेरी में मूवी हॅाल, मैसूर में स्टार होटल खोलने वाले हैं।
आठ बच्चों में चौथे नानजुनदी ने बारहवीं फर्स्ट क्लास से पास की और एक अच्छे स्कूल में दाखिला लिया। पर गरीबी ने वहां भी साथ ना छोड़ा। जब वे कॅालेज में थे उनके पिता की लीवर कैंसर से मौत हो गयी। नानजुनदी ने अठ्टारह साल की उम्र में ही गरीबी, भुखमरी, अपमान और मौत सब कुछ देख लिया था।
भाई और मां के शराब में डूब जाने के बाद उनके पास कोई चारा नहीं था सिवाय अपने परिवार का पेट पालने के। इसलिए उन्होंने पिताजी का काम संभाला और साथ ही अपनी पढ़ाई भी पूरी की। इसके बाद वे रात में रिक्शा चलाते थे और इसी बीच में अपनी नींद भी पूरी करते थे।
अपनी बहन का मंगलसूत्र लेकर उन्होंने सोने के छोटे टुकड़ों से ज्वेलरी बनाकर बड़े रिटेलर्स को बेचना शुरु किया। कुछ महीने के संघर्ष के बाद पांच ऑटो रिक्शा और एक कार्गो वेन खरीदी।
इसी दौरान उन्होंने अपने परिवार को अच्छे से घर में रखा जो सभी सुख सुविधाओं सो पूरा था। नानजुनदी ने अठ्ठाह साल की उम्र में पहली बार अपने घर में बिजली देखी थी।
स्थिति में सुधार आया फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन का काम शुरु किया
बाद में एक छोटी सी ज्वेलरी की दुकान खोलकर अपने छोटे भाई को दे दी और जैसे-जैसे उनकी स्थिति में सुधार आया उन्होंने फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन का काम शुरु किया।
ऐक्शन स्टार जैकी चैन की फिल्मों को वे चिन्नई से लाकर बैंगलोर के एक्जीबीटर्स को बेचना शुरु किया। जिससे उनके हाथ काफी
मजबूत हुए और उन्होंने कन्नड़ फिल्में प्रोड्यूस करना शुरु किया।
नानजुनदी ने उन लोगों की चुनौती भी स्वीकारी जिन्होंने उन्हें एक्टिंग की समझ ना होने का तंज कसा। उनका मानना है कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है क्योंकि वे स्लम से आये हैं ना कि किसी बड़े फिल्मी घराने से।
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