Success Story: दो बार पास की यूपीएससी परीक्षा, 20 डिग्रियां की हासिल, जानिए कौन है ये शख्स
एक ऐसे शख्स जिन्होंने 20 विषयों मे डिग्री हासिल की, जिनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आधिकारिक रूप से भारत के सबसे योग्य व्यक्ति के रूप में दर्ज है, उन्हें भारत का सबसे शिक्षित व्यक्ति भी कहा जाता है। आइए जानते हैं उनके बारें में...
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Success Story: हर साल लाखों उम्मीदवार यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करते हैं। यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा भारत सहित दुनिया की मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। उम्मीदवार इसे पास करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं, इसके बावजूद बहुत कम को सफलता मिलती है। लेकिन, आज हम आपको एक ऐसी शख्सियत के बारे में बताने जा रहें हैं, जिसने दो बार यूपीएससी की कठिन परीक्षा को पास किया। इतना ही नहीं, इनके पास 20 अलग-अलग विश्वविद्यालयों से स्नातक की डिग्री भी है।
यहां बात हो रही है बहुमुखी प्रतिभा के धनी 'श्रीकांत जिचकर' की। वह एक राजनीतिज्ञ, सिविल सेवक, शोधकर्ता, डॉक्टर, वकील, पत्रकार और परोपकारी व्यक्ति थे। जिचकर के पास 20 अलग-अलग विश्वविद्यालयों से स्नातक की डिग्री है। जिचकर का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आधिकारिक रूप से भारत के सबसे योग्य व्यक्ति के रूप में दर्ज है, उन्हें भारत का सबसे शिक्षित व्यक्ति भी कहा जाता है।
जिचकर ने इन विषयों में महारत हासिल की
श्रीकांत जिचकर का जन्म14 सितम्बर, 1954 में एक मराठी परिवार में हुआ। श्रीकांत जिचकर ने नागपुर से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री के साथ स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने संस्कृत, इतिहास, अंग्रेजी साहित्य, दर्शनशास्त्र, सार्वजनिक प्रशासन, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, मास्टर डिग्री, व्यवसाय प्रबंधन के डॉक्टर, पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री और संस्कृत साहित्य में डॉक्टर की डिग्री भी प्राप्त की। श्रीकांत जिचकर ने अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए कई स्वर्ण पदक भी जीते।
श्रीकांत ने दो बार यूपीएससी की परीक्षा पास की है। उन्होंने आईपीएस की परीक्षा भी पास की थी, लेकिन जल्दी इस्तीफा दे दिया, इसके बाद उन्होंने आईएएस की परीक्षा भी निकाली थी। इससे भी रिजाइन कर वे राजनीति में आ गए।
राजनीति में प्रवेश
1980 में श्रीकांत राजनीति में आ गए। 26 वर्ष की आयु में, वह भारत में विधान सभा के सबसे कम उम्र के सदस्य बन गए। इसके बाद, साल 1986 से 1992 तक महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य के रूप में कार्य किया। उन्हें किताबों से बड़ा प्यार था और उनके पास तकरीबन 52000 किताबों की पर्सनल लाइब्रेरी थी। 02 जून, 2004 को 49 वर्ष की आयु में जिचकर का एक कार एक्सीडेंट में निधन हो गया, लेकिन उनका पूरा जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा के समान है।
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