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मंजिलें और भी हैं : वे चाहते हैं, मैं चुप हो जाऊं, पर चुप न रहूंगी
Fri, 04 Oct 2019 06:44 AM IST
गौरव पाण्डेय
गुलालाई इस्माइल
गुलालाई इस्माइल
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 04 Oct 2019 06:44 AM IST
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गुलालाई इस्माइल (फाइल फोटो)
- फोटो : ट्विटर
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बेगुनाह पश्तूनों को पाकिस्तान में आतंकवाद का उन्मूलन करने के नाम पर मारा जा रहा है। पाकिस्तानी सेना की जेलों में हजारों लोग कैद हैं। हमारी मांग है कि पकिस्तानी सेना द्वारा किए जाने वाले मानवाधिकार उल्लंघन को तुरंत खत्म किया जाए। पाकिस्तान को उन लोगों को रिहा करना चाहिए, जिन्हें जेलों में बंद रखा गया है। यदि हम उनके खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो हम पर आतंकवाद का आरोप लगाया जाता है। पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक तानाशाही शासन चलता है।
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मेरा जन्म खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुआ, नौ साल की उम्र में मेरा परिवार पेशावर चला गया था। मेरे पिता एक शिक्षक होने के साथ मानवाधिकार कार्यकर्ता भी थे। उन्होंने मुझे बचपन से ही लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों के बारे में शिक्षित किया। उस समय मेरी उम्र तकरीबन सोलह वर्ष की रही होगी, जब मैंने अपने आसपास देखा कि लड़कियां लड़कों के साथ अलग तरह से पेश आती थीं। मेरी चचेरी बहन जोकि सिर्फ पंद्रह वर्ष की थी, उसकी शादी उस उम्र में दो बार करवाई गई।
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उसे अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं करने दी गई। जबकि उसी उम्र के मेरे चचेरे भाई पढ़ाई कर रहे थे। वर्ष 2012 में मैंने इस्लामाबाद में कायद-ए-आजम विश्वविद्यालय से स्नातक किया। पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम में ग्रामीण खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में युवा लड़कियों की पढ़ाई करवाने के साथ हिंसा की संस्कृति और महिलाओं के उत्पीड़न को चुनौती देने के उद्देश्य से मैंने अपनी बहन सबा इस्माइल के साथ गैर-सरकारी संगठन अवेयर गर्ल्स की स्थापना की।
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मैंने आसपास की महिलाओं में जागरूकता फैलाकर उन्हें बताया कि उनके पास भी जीवन को अपनी तरह से जीने के अधिकार हैं। उन्हें नेतृत्व कौशल का प्रशिक्षण दिया। मलाला यूसुफजई भी साल 2011 में अवेयर गर्ल्स की प्रतिभागी थी। मेरा लक्ष्य राजनीति में अधिक महिलाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ बच्चों और परिवारों पर आतंकवाद के मनोवैज्ञानिक प्रभाव की जांच करने के तरीकों पर चर्चा करना है। मुझे हमेशा यह लगता है कि धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के बिना, हम पाकिस्तान में शांति हासिल नहीं कर सकते हैं।
मुझे मेरे ही मुल्क में अधिकारियों ने छिपकर जीने के लिए मजबूर कर रखा था। वह इसलिए मुझे निशाना बनाते हैं, क्योंकि मैंने पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को उजागर किया था। मैंने पाकिस्तानी सेना द्वारा यौन शोषण की घटनाओं को उजागर करने की कोशिशें की। कुछ माह पहले सरकार ने मुझे ब्लैकलिस्ट कर दिया था। उन्होंने मुझे राजद्रोही घोषित कर दिया है। बीते अगस्त में ही मैंने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान छोड़कर अमेरिका की शरण ली है।
मैं अपने दोस्तों की मदद से श्रीलंका, फिर वहां से अमेरिका आई हूं। पिछले कुछ महीने भयानक रहे हैं। मुझे धमकी दी गई है, परेशान किया गया, पर मैं भाग्यशाली हूं कि जीवित हूं। पाकिस्तानी सेना ने मेरी आवाज दबाने के लिए हर हथियार का इस्तेमाल किया। उन्होंने मेरे परिवार पर दबाव बनाया, ताकि वह मेरे खिलाफ खड़े हो जाएं। हालांकि इसके बावजूद मेरा पूरा परिवार मेरे साथ खड़ा है। मुझे प्रताड़ित करने के लिए उन्होंने मेरे माता-पिता पर झूठे आरोप लगाए हैं।
मुझे पता है कि सुरक्षा जोखिम अधिक हैं। कई बार मैं अपने परिवार के जीवन के लिए डरती हूं। मुझे खुद को बार-बार स्थान बदलकर रहना पड़ रहा है, मेरे परिवार को असुरक्षा के कारण अपना घर बदलना पड़ा है। इसके बावजूद एक सकारात्मक संदेश जो मुझे प्रेरणा देता है, वह यह है कि मेरे काम का प्रभाव बहुत बड़ा है और वे मेरे दिल में डर पैदा करना चाहते हैं, ताकि मैं चुप हो जाऊं, पर मैं चुप न रहूंगी।
(पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता के विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित)
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