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बंजर जमीन को कर देते हैं पानी से लबालब, ये हैं देश के 'वॉटर डॉक्टर'

Sun, 29 May 2016 10:54 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 29 May 2016 10:54 PM IST
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India’s ‘water doctor’, has turned 84 acres of barren land into a water bowl
'वॉटर डॉक्टर' के जज्बे को सलाम! - फोटो : social.yourstory.com

पूर्वजों ने कहा 'जल ही जीवन है।' हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा 'पानी परमात्मा का प्रसाद है।' इसबार महाराष्ट्र के लातूर, बुंदलेखंड के महोबा में पानी रेलगाड़ियां तक पहुंचीं। 

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भविष्यवेत्ता ये तक बताते हैं कि आने वाले वक्त में युद्ध भी पानी को लेकर लड़े जाएंगे। 

तीन हिस्सों में पानी से सराबोर धरती पर पानी को लेकर ही इतनी मारामारी होगी, इस ख्याल से मन व्याकुल हो जाता है, लेकिन महज बातें करने से समस्या का हल नहीं निकलता, उन बातों को हकीकत का जामा भी पहनाना होता है, ठीक अय्यप्पा मसागी की तरह।
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अयप्पा के नाम और शोहरत से आप भले ही वाकिफ न हों, लेकर देश और दुनिया के जलवेत्ता इन्हें 'वॉटर डॉक्टर' घोषित कर चुके हैं। आगे की स्लाइड में पढ़ें अयप्पा की कामयाबी की पूरी कहानी। 

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बचपन में सुबह 3 बजे उठकर जाते थे पानी भरने

India’s ‘water doctor’, has turned 84 acres of barren land into a water bowl
नौकरी छोड़कर 'वॉटर लिटरेसी फाउंडेशन' बनाई - फोटो : bbc

अब तक हजारों लोगों की मदद करने वाले अयप्पा मसागी कर्नाटक के गडग जिले के दूरदराज के गांव से आते हैं। वे कद काठी से आम इंसानों जैसे हैं। 58 वर्ष के उम्रदराज शख्स है। बाल पक गए हैं। आंखों पर मोटा चश्मा लगाते हैं। बंजर जमीन पर तालाब बनाते हैं। लेकिन माथे पर जरा भी सिकन नहीं, उनके चेहरे पर गंभीरता और सफलता का भाव बराबर नजर आता है। जो भी चाहता है वे उससे बड़ी साफगाई से बात करते हैं। वे बड़े की सहज होकर कहते है कि 'आपको पानी चाहिए? हमें कॉल करो!' अयप्पा 'वॉटर लिटरेसी फाउंडेशन' चलाते हैं।

अयप्पा बताते हैं कि जब वे छोटे बच्चे थे तब उन्हें रोजाना सुबह 3 बजे उठकर पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी। वे पैदल चलकर काफी दूर से एक नदी से पानी भरकर लाते थे। उस वक्त वे सोचते थे कि क्या पानी की समस्या का कोई हल नहीं हैं? खुद से ये सवाल करते-करते उन्होंने संकल्प कर लिया कि जब बड़े होंगे तो इस समस्या से निपटने के लिए कुछ न कुछ जरूर करेंगे। 

आखिरकार साल 2002 में मैकेनिकल इंजीनियर अयप्पा ने नौकरी को अलविदा कहा और पानी की समस्या सुलझाने के लिए 'वॉटर लिटरेसी फाउंडेशन' की बुनियाद रखी। अयप्पा कहते हैं कि पानी कोई समस्या नहीं है, बारिश कोई समस्या नहीं है, समस्या है तो सिर्फ लोगों और समुदायों का नजरिया। लोग बात तो करते हैं लेकिन प्रयास नहीं करते हैं।

लोग अगर काम करने का बीड़ा उठा लें तो फिर समस्या नहीं रहेगी। इसी संदेश के साथ अयप्पा ने लोगों को बारिश के पानी को इकट्ठा करने के गुर सिखाने शुरू कर दिए।

सूझबूझ से 82 एकड़ बंजर जमीन पर करिश्मा कर दिया

India’s ‘water doctor’, has turned 84 acres of barren land into a water bowl
बारिश के पानी की एक बूंद भी बर्बाद नहीं जाने देते हैं - फोटो : bbc

दुनिया ने अयप्पा के प्रयासों का लोहा तब मान लिया जब साल 2014 में आंध्रप्रदेश के बेहद सूखा प्रभावित इलाके चिलमाचुर में 82 एकड़ बंजर खरीदी और पानी-हरियाली से उसकी तस्वीर बदल दी।

अयप्पा बताते हैं कि कुछ वक्त पहले तक इस जमीन पर आग की लपटों जैसी झुलसा देने वाली हवाएं चला करती थी। जमीन पर दूर-दूर तक एक अदत पौधा नजर नहीं आता था। कंकड़-पत्थरों से भरी जमीन पर काम करना लोहे के चने चबाने जैसा था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अयप्पा बताते हैं कि उन्होंने अपने सहयोगियों से कह दिया था कि एक साल में वो बंजर धरती को पानी से लबालब कर देंगे। इसके लिए अयप्पा ने पूरी 82 एकड़ जमीन को 37 कंपार्टमेंट में बांट दिया।

अयप्पा को अपने इंतजाम पर पूरा यकीन था कि जब भी बारिश होगी तो पानी कहीं जाने वाला नहीं हैं। ऐसा ही हुआ। आज 25 हजार रेतीले गड्ढे और 4 झीलें पानी बारिश के पानी से लबालब हैं। अयप्पा ने इस जमीन के आस-पास पेड़-पौधे भी लगाए हैं। इनमें से 60 फीसदी ऐसे है जो घने जंगल का रूप लेंगे और 40 फीसदी पेड़ फल वाले है जिनसे आर्थिक लाभ होगा।

देश-विदेश में 100 से ज्यादा जल योद्धा तैयार कर चुके हैं, मुहिम जारी है

India’s ‘water doctor’, has turned 84 acres of barren land into a water bowl
7 किताबें भी लिख चुके हैं - फोटो : bbc

अयप्पा अपनी 'वॉटर लिटरेसी फाउंडेशन' के जरिए वॉटर वॉरियर्स (जल योद्धा) तैयार कर रहे हैं। वे स्कूलों में जाते हैं और बच्चों को पानी बचाने के तरीके बताते हैं। अब तक अयप्पा देश और विदेश में 100 से ज्यादा इंटर्न्स को ट्रेनिंग दे चुके हैं। 7 किताबें लिख चुके हैं। अयप्पा से जर्मनी, जापान और अमेरिका के लोग पानी बचाने की उपाय सीख रहे हैं। अयप्पा बताते हैं अब सरकारें भी उनके विचारों में दिलचस्पी लेने लगी हैं और उनके कॉन्सेप्ट को इंम्प्लीमेंट करना चाहती हैं।

अयप्पा का आंकलन है कि अगर एक साल में भारत में होने वाली बारिश का 30 फीसदी हिस्सा ही बचा लिया जाए तो इतना पानी जमा हो जाएगा कि पूरा देश 3 साल तक इस्तेमाल कर सकता है।

अयप्पा के प्रयासों की हम सराहना करते हैं और उन्हें ढेरों शुभकामनाएं देते हैं। 

आपको कैसी लगी वॉटर डॉक्टर अयप्पा मसागी की सक्सेस स्टोरी, कमेंट बॉक्स में प्रतिक्रिया देना न भूलें, चाहें तो शेयर भी कर सकते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस कहानी से प्रेरणा ले सकें।

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