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इतने कम समय में 'पल्स' ने कैसे बनाया इतना बड़ा रिकॉर्ड...

Wed, 08 Mar 2017 05:32 PM IST
amarujala.com- written by: शिवेंदु शेखर
amarujala.com- written by: शिवेंदु शेखर Updated Wed, 08 Mar 2017 05:32 PM IST
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how pulse candy became this huge brand in short span of time
पल्स

हम उस देश के वासी हैं जिस देश में किसमी बार खा कर बच्चे बड़े होते थे। मौकों पर उन्हें मेंगो बाईट नहीं बल्कि किसमी बार चाहिए होता था। कैडबरी का निवास तब दूसरे ग्रह पर था। हिंदुस्तान की नब्ज में अब भी 'लेमनचूस' या 'मोर्टन' और विशेष मौकों के लिए किसमी बार तैरा करता था।  

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बाजार बदला, लोगों की आमद बदली, आमद बदली तो लोगों की जरूरतों का हिसाब भी बदल गया। हमारी पीढ़ी के बच्चे कैडबरी का स्वाद चख चुके थे। अब उन्हें कैंडी या 'लेमनचूस' से प्रेम नहीं था बल्कि उन्हें अब सुगर बेस्ड मिल्क चॉकलेट से प्रेम था। उन्हें डेयरी मिल्क, 5 स्टार, मंच जैसी चॉकलेट चाहिए।  
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इस सब के बीच फरवरी 2015 में एक कैंडी मार्केट में आती है, जिसका नाम है 'पल्स'। इसे बनाने वाली कंपनी वही है जो आपको पास-पास, बाबा इलायची और रजनीगंधा जैसे प्रोडक्ट उपलब्ध करवाती है। आज की तारीख में पल्स ने इतनी बिक्री कर ली है कि अगर उन कैंडी को लोगों में एक-एक कर बांटा जाता तो हिंदुस्तान की पूरी आबादी को इसका एक पीस जरूर मिलता। पल्स ने ये आंकड़ा इतने कम समय में छू लिया जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड हो गया है।
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कहां से आया आइडिया

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पल्स

पल्स का आईडिया कहां से आया...? 

'पल्स' नवीनीकरण का एक नायाब उदाहरण है।  पल्स मार्केट के हिसाब से हार्ड बॉयल्ड कैंडी की श्रेणी में आता है जिसका पूरा बाजार तकरीबन 2100 करोड़ रुपये का है और ये साल दर साल 23% के रेट से आगे बढ़ रहा है  जिसमें कि 50% शेयर सिर्फ और सिर्फ मेंगो फ्लेवर कैंडी का है। लेकिन कंपनी को एक बात समझ में आ गई थी कि मार्केट में जो भी इस तरह के फ्लेवर में कैंडी मिल रहे हैं उनमें सीधे-सीधे मैंगो या ऑरेंज या किसी दूसरे फ्लेवर की कैंडी मौजूद हैं। अगर हमें मार्केट में अपना सामान बेचना है तो कुछ नया करना होगा।  
 

पल्स में क्या है नया?

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पल्स

क्या नया किया जाए और कैसे...? 

कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट ने बताया कि इंडिया में लोगों को कच्चा आम खाने की आदत है। लेकिन कच्चा आम के साथ लोग कुछ न कुछ मसाला जरूर इस्तेमाल करते हैं। यहीं से आइडिया आया कि हम कैंडी के अंदर कोई स्पेशल मसाला पाउडर मिक्स करेंगे और इसके बाद मार्केट में लॉन्च किया जाएगा।  

इस  प्रतियोगी बाजार में भी सामान्य कैंडी के मुकाबले कीमत दुगनी क्यों..? 

अभी तक बाजार में सामान्यतः जो भी कैंडी मार्केट में आ रहे थे उनकी कीमत 0.5 रुपये होती थी लेकिन डीएस ग्रुप ने इसकी कीमत को 1 रुपया रखना तय किया। इसके पीछे की वजह के बारे में बताते हुए सुराना कहते हैं कि बाजार में और जितने भी कैंडी मौजूद हैं उनकी लाइफ साइकिल को अगर आप देखें तो वो जितनी देर तक आपके मुंह में रहता है एक ही तरह का स्वाद बरकरार रहता है।  

लेकिन पल्स एक वक्त के बाद आपका कैंडी खाने का पूरा एक्सपीरियंस बदल देता है। कीमत को जस्टिफाई करने के लिए हमने इसके वजन को थोड़ा बढ़ा दिया। सामान्यतः 2-2.5 ग्राम की एक कैंडी 0.5 रुपये में बाजार में मिलती है जबकि हमने इसके वजन को 4 ग्राम किया ताकि मुंह में भी ज्यादा देर तक बना रहे।  

बजार में लॉन्च करने का प्रोसेस

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पल्स

बजार में लॉन्च करने का क्या प्रोसेस रहा...? 

सामान्यतः देश में ज्यादातर वक्त तक गर्मी होती है और हमारा गला सूख रहा होता है। फिर मुंह में सलाइवा के लिए हमें कुछ चाहिए होता है। जिसके लिए हम कोई कैंडी ले लेते हैं। हमने गुजरात के रीजन से शुरू किया।  फिर किसी दूसरे राज्य में भी इसे ट्राय किया गया। ट्रायल में इसकी मांग बढ़ती चली गई।  

अब एक नई चुनौती थी कि इस मांग को पूरा करना और पूरे देशभर में इसकी सप्लाई देनी। डिमांड को पूरा करने के लिए कंपनी ने कुछ दूसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के साथ समझौता किया और देश भर में पहुंच बनाने में काम आए ब्रांड के पुराने सिपाही जो आज तक कंपनी के प्रोडक्ट रजनीगंधा और पास-पास को देश के कोने कोने तक पहुंचाते रहे हैं।  

आज कंपनी कैंडी मार्केट में एक लीडिंग ब्रांड हो गया है और इसकी सफलता को अगर एक शब्द में बयान करना हो तो ये कहना बेहतर होगा 'इन्नोवेशन/नवीनीकरण'। जिसने भी नया किसी नए आइडिया के साथ कुछ नया करना चाहा है उसकी सफलता में कभी कोई शक नहीं रहा है।  

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