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B'Day Spl : 'बाबू जगजीवन राम' से सीखें जिंदगी में कैसे संघर्ष कर बढ़ें आगे

Wed, 05 Apr 2017 01:05 PM IST
amarujala.com presented by: श्वेता पांडेय
amarujala.com presented by: श्वेता पांडेय Updated Wed, 05 Apr 2017 01:05 PM IST
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Babu jagjivan ram inspirational stories

भारतीय राजनीति के कई शीर्ष पदों पर आसीन रहे जगजीवन राम न सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी, कुशल राजनीतिज्ञ, सक्षम मंत्री एवं योग्य प्रशासक रहे बल्कि कुशल संगठनकर्ता, सामाजिक विचारक और सफल वक्ता भी थे। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बंग्ला व भोजपुरी में उनके विचारों को सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते और अपने आवाज से वो संसद में भी लोगों को निरुत्तर कर देते। 'जगजीवन राम' जिन्हें आम तौर पर बाबूजी के नाम से जाना जाता है। 

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जब वो विद्यालय में ही थे तब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया और उनका पालन-पोषण उनकी माता जी को करना पड़ा। अपनी माताजी के मार्गदर्शन में जगजीवन राम ने आरा टाउन स्कूल से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा पास की। जाति आधारित भेदभाव का सामना करने के बावजूद जगजीवन राम ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से विज्ञान में इंटर की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की और फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा पास की। 

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स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग

Babu jagjivan ram inspirational stories

जगजीवन राम उस समय गांधी जी के नेतृत्व में आजादी के लिए संघर्ष करने वाले दल में शामिल हुए, जब अंग्रेज अपनी पूरी ताकत के साथ आजादी के सपने को हमेशा के लिए कुचल देना चाहते थे। एक जुझारू स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जगजीवन राम महात्मा गांधी के नेतृत्व में 'सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन' में शामिल भी हुए। इसकी वजह से 1940 और 1942 में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। लेकिन इससे वे रूके नहीं और समाज के लिए कई बेहतर कार्य में लगे रहे। जगजीवन राम सेनानियों के कठिन कार्य में त्याग और बलिदान की भावना को भली-भांति महसूस करते थे। वे सैनिकों के परिवार वालों की पीड़ा और तकलीफ से भी भली-भांति परिचित थे। 

 वो एक महान स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के प्रति समर्पित नेता थे। भारत में दलित क्रांति के महानायक बाबू जगजीवन राम ही हैं, जिन्होंने बूरी स्थितियों में दलित समाज के विकास के लिए धरातल पर कार्य किया और सारे समाज के अपना लोहा भी मनवाया। 

आर्थिक सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी नियन बनवाए..

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जगजीवन राम ने अनेक रविदास सम्मेलन आयोजित किए थे और कोलकाता के कई भागों में गुरू रविदास जयंती मनाई थी। 1934 में, उन्होंने कोलकाता में अखिल भारतीय रविदास महासभा और अखिल भारतीय दलित वर्ग लीग की स्थापना की। इन संगठनों के माध्यम से उन्होंने दलित वर्गों को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल किया। उनका विचार था कि दलित नेताओं को न केवल समाज सुधार के लिए संघर्ष करना चाहिए बल्कि राजनीतिक, प्रतिनिधित्व की मांग भी करनी चाहिए। 

आजादी के बाद जो पहली सरकार बनी उसमें उन्हें श्रम मंत्री बनाया गया। यह उनका प्रिय विषय था। वह बिहार के एक छोटे से गांव की माटी की उपज थे, जहां उन्होंने खेतिहर मजदूरों का त्रासदी (अटैक) से भरा जीवन देखा था। स्टूडेंट के रूप में कोलकाता में मिल मजदूरों की दयनीय स्थिति से भी उनका साक्षात्कार हुआ था। बाजूजी ने श्रम मंत्री के रूप में मजदूरों की जीवन स्थितियों में आवश्यक सुधार लाने और उनकी सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी नियन बनवाए, जो आज भी हमारे देश की श्रम - नीति का आधार है। 

 78 साल की उम्र में इस महान राजनीतिज्ञ का निधन हो गया। बाबू जगजीवन राम को भारतीय समाज और राजनीति में दलित वर्ग के मसीहा के रूप में याद किया जाता है। वह स्वतंत्र भारत के उन गिने चुने नेताओं में थे जिन्होंने देश की राजनीति के साथ ही दलित समाज को भी नई दिशा दी। 

 

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