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नौवीं कक्षा में स्कूल छोड़ा, अब दो कंपनियों का मालिक

Fri, 19 Jun 2015 04:23 PM IST
Updated Fri, 19 Jun 2015 04:23 PM IST
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angad dropped out of school in class nine

कहते हैं कि जीवन में अगर आगे बढ़ना है और अपने मुकाम के साथ सफलता के शिखरों को छूना है तो शिक्षा के बिना संभव नहीं। लेकिन इस कॉसेप्ट को दरकिनार कर कुछ नया करने के जुनून ने महज सोलह साल के लड़के को दो कंपनियों का मालिक बना दिया। नौवीं कक्षा में दो बार फेल होने के बाद स्कूल के रास्तों से इस युवा ने नाता तोड़ दिया।

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मुंबई के ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे नाम के फेसबुक पेज पर कई मोटिवेशनल कहानियां पढ़ने को मिलती हैं। ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे फेसबुक पेज पर यह दिलचस्प कहानी है मुबंई के अंगद दरयानी की।
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एनडीटीवी की खबर के मुताबिक नौवीं क्लास में दो बार फेल होने के बाद अंगद ने स्कूल छोड़ दिया था और महज दो साल बाद 16 साल की उम्र में वह दो कंपनियों का मालिक बन गए हैं। ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में बताया गया है कि अंगद ने स्कूल जाना इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें जिंदगी की स्कलू से सीखने में ज्यादा मजा आता है।

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कुछ नया करने की चाहत में छोड़ दिया स्कूल

angad dropped out of school in class nine

ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे फेसबुक पेज में अंगद ने अपनी एक पोस्ट में लिखा है कि, 'मैं जब 9वीं कक्षा में था तब मैंने स्कूल छोड़ दिया, क्योंकि मैं बार-बार पुराने कॉन्सेप्ट्स को बिल्कुल सीखना नहीं चाहता था।' उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा में बच्चे नए आइडिया नहीं लाते और किताबों से थ्योरीज़ याद करते हैं, जिसे बाद में भूल जाते हैं।' अंगद का मानना है कि स्कूल के ग्रेडिंग सिस्टम के बजाए घर पद बेहतर पढ़ाई की जाक सकती है।

पेज पर उन्होंने लिखा है 'जब मैं 10 साल का था, तो मैं अपने पिता के पास गया और कहा कि मैं हॉवर क्राफ्ट बनाना चाहता हूं और मेरे आइडिया का मजाक उड़ाने की जगह उन्होंने मुझे आगे बढ़ने को कहा।' बता दें कि महज सोलह साल की उम्र अब अंगद दो कपंनिया चला रहे हैं जो कि क्यूरिअसिटी और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाले उत्पाद बनाती है।

एमआईटी के प्रोफेसर डॉ. रमेश रस्कर के साथ काम करते हुए अंगद और उनकी टीम ने वर्चुअल ब्रैलर भी बनाया है, जो कि किसी भी पीडीएफ डॉक्युमेंट को ब्रैल में कन्वर्ट कर देता है। आप अगर यह जानना चाहते हैं कि अंगद ने दोबारा स्कूल का रुख क्यों किया और देश के लिए उनका क्या सपना है, तो आपको उनकी पूरी कहानी ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे नाम के फेसबुक पेज पर पढ़नी होगी।

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