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शून्य से शिखर का सफर: प्रचलित ढर्रे से हटकर की शुरुआत, निवेशकों ने फेरा मुंह, घर गिरवी रखकर बनाया सफल ब्रांड
Mon, 02 Jun 2025 08:06 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 02 Jun 2025 08:06 AM IST
सार
अजय अजमेरा के हौसले जीवन में आने वाली तमाम कठिनाइयों पर बीस साबित हुए। इसी का परिणाम है कि उन्होंने अपने विचार को न सिर्फ 250 करोड़ रुपये के ‘अजमेरा फैशन’ में बदला, बल्कि साबित भी किया कि हर बड़ी सफलता की शुरुआत दृढ़ विश्वास और कड़ी मेहनत से होती है...
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अजमेरा फैशन के संस्थापक और सीईओ अजय अजमेरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कपड़ों यानी टेक्सटाइल की अप्रत्याशित और प्रतिस्पर्धी दुनिया में, जहां मौसम की तरह रुझान बदलते रहते हैं और चुनौतियां बड़ी होती हैं, कुछ लोग अलग सपने देखने की हिम्मत करते हैं और उद्योग जगत में अपनी एक अमिट छाप छोड़ते हैं। अजमेरा फैशन के संस्थापक और सीईओ अजय अजमेरा ऐसा ही एक उदाहरण हैं। सीमित संसाधनों वाले एक छोटे-से शहर से आने वाले अजय अजमेरा ने कपड़ा उद्योग में अपनी यात्रा एक स्पष्ट मिशन के साथ शुरू की। बगैर किसी औपचारिक शिक्षा के उन्होंने अपनी सोच को एक छोटे-से स्टार्टअप के रूप में शुरू किया, जो आज भारत के अग्रणी थोक कपड़ों के ब्रांडों में से एक बन गया है, जिस पर देश भर के हजारों खुदरा विक्रेता भरोसा करते हैं। आज की तारीख में ‘अजमेरा फैशन’ का टर्नओवर लगभग 250 करोड़ रुपये है, जिसका टेक्सटाइल इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम है। अजय अजमेरा एक कारोबारी होने के अलावा एक बेहतरीन मोटिवेशनल स्पीकर और बिजनेस एक्सपर्ट भी हैं। उनकी सफलता की कहानी एक सीख है।
ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं
अजय अजमेरा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे-से शहर से शुरू हुई। 1973 में जन्मे अजमेरा सीमित संसाधनों वाले एक साधारण परिवार में पले-बढ़े हैं। सात भाई-बहनों में वह सबसे छोटे हैं। उनके पिता घर चलाने के लिए जूट से बने उत्पाद का छोटा-सा व्यापार करते थे, जबकि उनकी मां एक गृहणी थीं। जब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की उम्र होती है, तब उन्होंने बाकियों से एक अलग राह चुनी। स्वास्थ्य समस्याओं और पढ़ाई में मन न लगने के कारण उन्हें ग्यारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। बावजूद इसके वह अपने सपनों में एक अटूट विश्वास और सफल होने की भूख लेकर आगे बढ़े और अवसरों की खोज में राजस्थान से सूरत पहुंच गए।
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पारंपरिक प्रथाओं को दी चुनौती
जाहिर है जब कोई परंपराओं से हटकर कदम उठाता है, तो उसका विरोध होना भी लाजिमी है। एक निर्माता के रूप में काम करने वाले अजय अजमेरा ने खुदरा विक्रेताओं को सीधे सामान की आपूर्ति करके पारंपरिक प्रथाओं को चुनौती दे डाली। इस कारण बाजार के प्रमुख थोक विक्रेताओं और स्थापित डीलरों में भारी रोष और असंतोष पैदा हो गया और उन्होंने कंपनी के साथ अपना कारोबार बंद कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि कंपनी के निवेशक अजय से नाराज हो गए और निवेश भी बंद कर दिया। इससे अजय अजमेरा अपने काम में अलग-थलग होकर बिल्कुल अकेले पड़ गए।
1,200 रुपये की नौकरी
सूरत पहुंचकर उन्होंनेे एक कंपनी में सबसे निचले स्तर से नौकरी से शुरुआत की। बतौर मेहनताना उन्हें 1,200 रुपये प्रतिमाह ही मिलते थे। उन्होंने यहां तमाम छोटे-मोटे काम करने का हुनर सीखा। अपनी मेहनत के दम पर बगैर किसी औपचारिक शिक्षा के वह कंपनी में अच्छे ओहदे पर पहुंच गए और उनकी सैलरी भी बढ़कर दो लाख रुपये महीना हो गई।
ऐसे हुई नई शुरुआत
नौकरी के दौरान ही उन्होंने टेक्सटाइल इंडस्ट्री की खामियों को देखा। उन्होंने महसूस किया कि उद्योग जगत में छोटे व्यापारियों और नए आंत्रप्रेन्योर को दरकिनार कर बड़े व्यापारियों और डीलर्स को तरजीह दी जाती है। यहां तक कि उनकी कंपनी की भी यही पॉलिसी थी। इसे लेकर उनके मन में एक टीस थी, जो हमेशा उन्हें खटकती रहती थी। इसीलिए उन्होंने कुछ ऐसा करने करने की ठानी, जिससे छोटे व्यापारियों को भी काम के समान अवसर मिल सकें। इसी उद्देश्य से उन्होंने साल 2011 में ‘अजमेरा फैशन’ की शुरुआत की।
पत्नी के गहने तक बेचने पड़े
आज अजय अजमेरा जिस मुकाम पर हैं, वह सफलता उन्हें रातोंरात नहीं मिली है। उनकी जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया, जब कंपनी लगभग बंद होने के कगार पर थी। ऐसे में उन्हें अजमेरा फैशन को बचाने के लिए अपना घर और गाड़ी गिरवी रखकर पत्नी के गहने तक बेचने पड़े। हालांकि, इस मुश्किल घड़ी में भी उन्होंने हार नहीं मानी। इसी का परिणाम है कि आज उन्होंने 250 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा किया है। इसके अलावा, उन्होंने खुदरा व्यापारियों और स्टार्टअप शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों को बेहद ही कम निवेश में व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी दिए हैं।
ये भी पढ़ें:- Shikhar Ka Safar: ईज ऑफ शूटिंग को बढ़ावा दे रहा निकॉन इंडिया, एमडी बोले- स्मार्टफोन से कैमरों का बढ़ा बाजार
युवाओं को सीख
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ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं
अजय अजमेरा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे-से शहर से शुरू हुई। 1973 में जन्मे अजमेरा सीमित संसाधनों वाले एक साधारण परिवार में पले-बढ़े हैं। सात भाई-बहनों में वह सबसे छोटे हैं। उनके पिता घर चलाने के लिए जूट से बने उत्पाद का छोटा-सा व्यापार करते थे, जबकि उनकी मां एक गृहणी थीं। जब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की उम्र होती है, तब उन्होंने बाकियों से एक अलग राह चुनी। स्वास्थ्य समस्याओं और पढ़ाई में मन न लगने के कारण उन्हें ग्यारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। बावजूद इसके वह अपने सपनों में एक अटूट विश्वास और सफल होने की भूख लेकर आगे बढ़े और अवसरों की खोज में राजस्थान से सूरत पहुंच गए।
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पारंपरिक प्रथाओं को दी चुनौती
जाहिर है जब कोई परंपराओं से हटकर कदम उठाता है, तो उसका विरोध होना भी लाजिमी है। एक निर्माता के रूप में काम करने वाले अजय अजमेरा ने खुदरा विक्रेताओं को सीधे सामान की आपूर्ति करके पारंपरिक प्रथाओं को चुनौती दे डाली। इस कारण बाजार के प्रमुख थोक विक्रेताओं और स्थापित डीलरों में भारी रोष और असंतोष पैदा हो गया और उन्होंने कंपनी के साथ अपना कारोबार बंद कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि कंपनी के निवेशक अजय से नाराज हो गए और निवेश भी बंद कर दिया। इससे अजय अजमेरा अपने काम में अलग-थलग होकर बिल्कुल अकेले पड़ गए।
1,200 रुपये की नौकरी
सूरत पहुंचकर उन्होंनेे एक कंपनी में सबसे निचले स्तर से नौकरी से शुरुआत की। बतौर मेहनताना उन्हें 1,200 रुपये प्रतिमाह ही मिलते थे। उन्होंने यहां तमाम छोटे-मोटे काम करने का हुनर सीखा। अपनी मेहनत के दम पर बगैर किसी औपचारिक शिक्षा के वह कंपनी में अच्छे ओहदे पर पहुंच गए और उनकी सैलरी भी बढ़कर दो लाख रुपये महीना हो गई।
ऐसे हुई नई शुरुआत
नौकरी के दौरान ही उन्होंने टेक्सटाइल इंडस्ट्री की खामियों को देखा। उन्होंने महसूस किया कि उद्योग जगत में छोटे व्यापारियों और नए आंत्रप्रेन्योर को दरकिनार कर बड़े व्यापारियों और डीलर्स को तरजीह दी जाती है। यहां तक कि उनकी कंपनी की भी यही पॉलिसी थी। इसे लेकर उनके मन में एक टीस थी, जो हमेशा उन्हें खटकती रहती थी। इसीलिए उन्होंने कुछ ऐसा करने करने की ठानी, जिससे छोटे व्यापारियों को भी काम के समान अवसर मिल सकें। इसी उद्देश्य से उन्होंने साल 2011 में ‘अजमेरा फैशन’ की शुरुआत की।
पत्नी के गहने तक बेचने पड़े
आज अजय अजमेरा जिस मुकाम पर हैं, वह सफलता उन्हें रातोंरात नहीं मिली है। उनकी जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया, जब कंपनी लगभग बंद होने के कगार पर थी। ऐसे में उन्हें अजमेरा फैशन को बचाने के लिए अपना घर और गाड़ी गिरवी रखकर पत्नी के गहने तक बेचने पड़े। हालांकि, इस मुश्किल घड़ी में भी उन्होंने हार नहीं मानी। इसी का परिणाम है कि आज उन्होंने 250 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा किया है। इसके अलावा, उन्होंने खुदरा व्यापारियों और स्टार्टअप शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों को बेहद ही कम निवेश में व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी दिए हैं।
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युवाओं को सीख
- सबसे खूबसूरत दृश्य सबसे कठिन चढ़ाई के बाद ही दिखाई देता है।
- कोई भी लक्ष्य इन्सान के प्रयासों से बड़ा नहीं होता। हारता वही है, जिसमें उनसे लड़ने का साहस नहीं होता।
- कोई भी सपना छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसे सच्ची लगन और सही मार्गदर्शन से हासिल करने की जरूरत होती है।
- अगर आप सीखने के लिए तैयार हैं, तो जीवन में हर परिस्थिति कुछ न कुछ सिखाती ही है।
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