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आगरा के होनहार ने चूर्ण से बनाया 'बिजली का बल्ब'
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला
Updated Wed, 19 Nov 2014 11:30 AM IST
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हिन्दुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी एंड मैनेजमेंट के इलेक्ट्रीकल एंड इलेक्ट्रोनिक्स विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र पवन कुमार सिंह और अवनीश कुमार ने सहायक प्रोफेसर अनुज भारद्वाज के निर्देशन में एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिससे कम लागत में भी घर में बल्ब जैसा उजाला पाया जा सकता है।
इस मॉडल को बनाने के लिए प्लास्टिक की खाली व साफ सुथरी बोतल में आसुत जल भरकर उसमें विरंजक चूर्ण का घोल मिलाया जाता है तथा इसे एक ऐसे स्थान पर लटकाया जाता है कि आधी बोतल पर सूर्य की किरणें पहुंच सकें और आधा हिस्सा घर के अंधेरे वाले हिस्से में हो, ऐसा करने पर यह मॉडल 55 वाट के बल्ब के बराबर रोशनी देता है।
इसी मॉडल के साथ यदि एक सोलर प्लेट लगाकर पुन: चार्ज होने वाली बैटरी लगा दी जाए और उसे ऑटोमेटिक स्विच को सर्किट द्वारा जोड़ दिया जाए तो बैटरी की ऊर्जा को रात के समय 25 वाट के बल्ब जितनी रोशनी दे सकता है।
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इस मॉडल को साकार रूप देने के लिए छात्र पिछले एक वर्ष से कड़ी मेहनत कर रहे थे। वे इस मॉडल को मार्केट में लॉन्च करने का तथा पेटेन्ट कराने की कोशिश में हैं।
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इस मॉडल को बनाने के लिए प्लास्टिक की खाली व साफ सुथरी बोतल में आसुत जल भरकर उसमें विरंजक चूर्ण का घोल मिलाया जाता है तथा इसे एक ऐसे स्थान पर लटकाया जाता है कि आधी बोतल पर सूर्य की किरणें पहुंच सकें और आधा हिस्सा घर के अंधेरे वाले हिस्से में हो, ऐसा करने पर यह मॉडल 55 वाट के बल्ब के बराबर रोशनी देता है।
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इसी मॉडल के साथ यदि एक सोलर प्लेट लगाकर पुन: चार्ज होने वाली बैटरी लगा दी जाए और उसे ऑटोमेटिक स्विच को सर्किट द्वारा जोड़ दिया जाए तो बैटरी की ऊर्जा को रात के समय 25 वाट के बल्ब जितनी रोशनी दे सकता है।
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इस मॉडल को साकार रूप देने के लिए छात्र पिछले एक वर्ष से कड़ी मेहनत कर रहे थे। वे इस मॉडल को मार्केट में लॉन्च करने का तथा पेटेन्ट कराने की कोशिश में हैं।
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