फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   study said that 90 percent students in Pakistan's government and private schools are weak in maths and science

अध्ययन में खुलासा: पाकिस्तान के सरकारी और निजी स्कूलों में 90 फीसदी विद्यार्थी गणित और विज्ञान में कमजोर

Fri, 21 Jan 2022 09:46 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Fri, 21 Jan 2022 09:46 PM IST
सार

अध्ययन के तहत देश के 78 सरकारी और 75 निजी विद्यालयों के कक्षा पांच, छह और आठ के 15000 से ज्यादा विद्यार्थियों को शामिल किया गया था।

विज्ञापन
study said that 90 percent students in Pakistan's government and private schools are weak in maths and science
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social media

विस्तार

प्राथमिक और निम्न माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 90 फीसदी से ज्यादा पाकिस्तानी विद्यार्थी गणित और विज्ञान में कमजोर हैं। उनमें इन विषयों की मूल समझ भी नहीं है। आगा खान विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल डेवलपमेंट के देशभर में किए गए एक अध्ययन में यह खुलासा किया गया है।

विज्ञापन


78 सरकारी और 75 निजी स्कूलों में किए गए शोध
न्यूज इंटरनेशन में प्रकाशित खबर के मुताबिक, 50 में से केवल एक विद्यार्थी ही शब्दों को अंकों में लिख पाया। अध्ययन के तहत देश के 78 सरकारी और 75 निजी विद्यालयों के कक्षा पांच, छह और आठ के 15000 से ज्यादा विद्यार्थियों को शामिल किया गया था। पाकिस्तान के उच्च शिक्षा आयोग की ओर से वित्त पोषित इस अध्ययन में पता चला कि गणित में विद्यार्थियों का औसत स्कोर 100 में से 27 और विज्ञान में 100 में से 34 रहा। अन्य विषयों में केवल एक फीसदी विद्यार्थियों के ही 80 फीसदी से ज्यादा अंक आए। इसमें भी सरकारी विद्यालयों के मुकाबले निजी का प्रदर्शन कहीं बेहतर था। हालांकि, इनमें भी विद्यार्थी 40 से ज्यादा अंक हासिल नहीं कर पाए।
विज्ञापन


शिक्षा पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत
पंजाब में औसत देश के अन्य इलाकों से बेहतर रहा, लेकिन यहां भी यह 40 अंक से ऊपर नहीं पहुंचा। दस में से केवल एक विद्यार्थी ही समझ पाया कि व्यायाम के समय दिल की धड़कन बढ़ जाती है। इनमें से 80 फीसदी विद्यार्थियों के माता-पिता भी हाईस्कूल या उससे कम पढ़े हुए थे। अध्ययन में शामिल रही सहायक प्रोफेसर नुसरत फातमा रिजवी ने कहा कि नीति निर्माताओं को देश में विज्ञान और गणित की शिक्षा पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed