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NCrF: पुराणों-वेदों में विशेषज्ञता के लिए छात्रों को मिलेगा क्रेडिट, यूजीसी ने जारी किया एनसीआरएफ

Wed, 12 Apr 2023 04:42 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडेय Updated Wed, 12 Apr 2023 04:42 PM IST
सार

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrf) पर अंतिम रिपोर्ट के अनुसार छात्र अब वेदों और पुराणों सहित भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) के विभिन्न पहलुओं में अपनी विशेषज्ञता से क्रेडिट अर्जित कर सकेंगे। 

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Students will now be able to earn credits from their expertise in Vedas, Puranas under NCrF
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विस्तार

National Credit Framework: देश में अब स्कूल, उच्च शिक्षा, कौशल विकास का एकीकृत  नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) होगा। पांचवीं कक्षा से लेकर पीएचडी और कौशल विकास के तहत अपने ज्ञान व अनुभव को जोड़ने पर उसके क्रेडिट मिलेंगे।  अभी तक स्कूली शिक्षा में कोई क्रेडिट फ्रेमवर्क नहीं था।

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पहली बार स्कूल,उच्च शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ा गया है। छात्र पढ़ाई के साथ स्पोर्ट्स, समाज सेवा, कौशल विकास, इंटर्नशिप, जॉब ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट पर काम करता है तो उसे उसके क्रेडिट मिलेंगे, जोकि भविष्य में नौकरी में भी सहायक होंगे। खास बात यह है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली के तहत छात्र वेद-पुराण भी पढ़ेंगे।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने कहा कि देश में अब स्कूल, उच्च शिक्षा, कौशल विकास का पहला एकीकृत नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क होगा। स्कूल से लेकर पीएचडी तक पढ़ाई के घंटों के अनुसार क्रेडिट दिए जाएंगे। पढ़ाई संग सभी गतिविधियां व सीखने के मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट मिलेंगे, यह अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में जाकर जुड़ेंगे। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधार पर तैयार किया गया है।

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दरअसल, स्कूली शिक्षा प्रणाली को क्रेडिट सिस्टम के तहत लाने का मसौदा पिछले साल अक्तूबर में यूजीसी की ओर से जारी किया गया था। उच्च शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा में मिले क्रेडिट को एकीकृत करने का प्रावधान किया गया है। कक्षा पांच से पीएचडी तक पढ़ाई के घंटों के अनुसार क्रेडिट दिए जाएंगे। क्रेडिट खेल-कूद, योग, कला, संगीत, हैंडीक्राफ्ट, सामाजिक कार्यों के लिए भी मिलेंगे।

18 प्रमुख विद्याओं या सैद्धांतिक विषयों और 64 कलाओं व व्यवसायिक विषयों को क्रेडिट प्रणाली के दायरे में लाने के लिए विचार किया जा सकता है। इस नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क में छात्रों के साथ कामकाजी युवाओं को भी लाभ होगा। यदि कोई नौकरी और अपना काम करने वाला युवा किसी क्षेत्र में खुद के नॉलेज को अपग्रेड करता है तो उसे भी मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट मिलेंगे।

मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की सुविधा
अब लगातार पढ़ाई जरूरी नहीं है। यदि कोई छात्र या कोई भी युवा किसी कारण से स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाता है तो भी मूल्यांकन के आधार पर दोबारा परीक्षा देकर 10वीं और 12वीं पास कर सकते हैं। ऐसे ही उच्च शिक्षा बीच में छोड़ने वाले कामकाजी युवा भी दोबारा से अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। यानी शिक्षा में अब मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की सुविधा मिलेगी।

ऐसे करेगा काम
जल्द ही हर छात्र को आधार की तर्ज दस अंकों का एक यूनिक नंबर मिलेगा। यह यूनिक नंबर अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से जुड़ा होगा। पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक जो भी पढ़ाई, अतिरिक्त गतिविधियों में भाग लेता है तो उसका मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट उसके अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में जुड़ते जाएंगे। बाद में इसमें युवाओं को भी जोड़ा जाएगा, फिर चाहें वे नौकरी पेशा हो या फिर अपना कोई काम करने वाले। वे जो भी अपने ज्ञान और अनुभव को कौशल विकास से बढ़ाएंगे, उसका मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट मिलेगा, वह उनके क्रेडिट बैंक में जुड़ेंगे।

फायदा: अब सिर्फ किताबी पढ़ाई ही हमें अच्छी नौकरी और कामकाज में मदद नहीं करेगी। नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क से अब विषयों के किताबी ज्ञान के साथ-साथ कक्षा में पढ़ाई करवाना, लैब, इनोवेशन लैब, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट, टयूटोरियल, स्पोर्ट्स, गेम्स, आर्ट, म्यूजिक, योगा, कारीगिरी, कम्यूनिटी वर्क, एनएसएस, एनसीसी, वाद-विवाद, क्लास टेस्ट, वोकेशनल व तकनीकी शिक्षा, ऑनलाइन या डिजिटल लर्निंग, इंटर्नशिप, जॉब ट्रेनिंग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

ऐसा होगा क्रेडिट फ्रेमवर्क का लेवल
पहली बार शिक्षा में भी छात्रों का हर वर्ष लर्निंग आउटकम के आधार पर मूल्यांकन होगा। इसमें ज्ञान, कौशल, सक्षमता आधारित परीक्षा से मूल्यांकन होगा।
  • पांचवीं कक्षा : एक क्रेडिट लेवल
  • आठवीं कक्षा : दो क्रेडिट लेवल
  • 10वीं कक्षा : 3 क्रेडिट लेवल
  • 12वीं कक्षा : 4 क्रेडिट लेवल
  • यूूजी : साढ़े चार से 6 क्रेडिट लेवल
  • पीजी :  6 से 7 क्रेडिट लेवल
  • पीएचडी : 8 क्रेडिट लेवल
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