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Hindi News ›   Education ›   Sexual harassment from children: Guruji insists on protecting the Pocso Act

बच्चों से यौन हिंसा: पोक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तारी से पहले करें मामले की जांच

Thu, 06 Sep 2018 12:11 PM IST
अमित शर्मा, अमर उजाला
अमित शर्मा, अमर उजाला Updated Thu, 06 Sep 2018 12:11 PM IST
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Sexual harassment from children: Guruji insists on protecting the Pocso Act

बच्चों की ज़िंदगी को संवारने में उनके माता-पिता से कम भूमिका उनके शिक्षकों की नहीं होती। यही कारण है कि समाज में उन्हें विशेष सम्मान भी दिया जाता है, लेकिन हाल ही में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं जिससे शिक्षकों पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ शिक्षकों के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसकी वजह से बच्चों और शिक्षकों के मर्यादित रिश्ते पर सवाल खड़े होने लगे हैं। ऐसे मामलों में अक्सर स्कूल प्रशासन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैकड़ों की संख्या में आये अध्यापकों ने इसका विरोध किया और सरकार से इस तरह के मामलों की कार्रवाई में ज्यादा छानबीन की गुजारिश की।

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दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसियेशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने कहा कि शिक्षक इस पूरी दुनिया को एक दिशा देने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन आज ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है जैसे वे सबसे बड़े अपराधी हों। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए उनका स्कूल उनका दूसरा घर होता है जहां उन्हें सबसे ज्यादा सुरक्षित समझा जाता है, लेकिन कुछ घटनाओं के कारण सबको एक दर्जे में रखा जा रहा है जो बेहद आपत्तिजनक बात है। उन्होंने कहा कि अगर कोई शिक्षक किसी बच्चे के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत करता है तो उसके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उनकी मांग है कि किसी भी मामले में किसी तरह की कार्रवाई से पहले मामले की जांच होनी चाहिए। सिर्फ किसी बच्चे या किसी अभिभावक के आरोप लगा देने से किसी को पोक्सो एक्ट में गिरफ्तार नहीं कर लिया जाना चाहिए।

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दिल्ली के बुराड़ी में एक स्कूल चलाने वाले रितेश गोसाईं ने कहा कि आज हम अनेक तरह की समस्याओं का सामना करते हैं। बच्चों के माता-पिता कई बार बच्चों के पक्ष में शिक्षकों पर हमला तक कर देते हैं। कई बार स्कूलों में ही शिक्षकों की हत्या तक कर दी गई है, लेकिन इसके बाद भी कोई समाज के बदलते व्यवहार को समझने के लिए तैयार नहीं है। यह बेहद आपत्तिजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि हाल ही में यमुना विहार में प्रिंसीपल पर लोहे की रॉड से हमला किया गया, आया नगर में एक शिक्षक की उसके स्कूल में ही हत्या कर दी गई और नागलोई के एक स्कूल में छात्रों ने ही अपने अध्यापक की हत्या कर दी। क्या ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी नहीं हैं कि आज शिक्षक बेहद तनावपूर्ण माहौल में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि किसी शिक्षक के खिलाफ कोई मामला सामने आने पर उचित जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाए। ऐसा नहीं होना चाहिये कि सिर्फ एक शिकायत के आधार पर पूरे स्कूल को कटघरे में खड़ा कर दिया जाए।

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बुराड़ी के ब्राइट सन कॉन्वेंट स्कूल में एक टीचर के रूप में काम कर रही कल्पना रावत ने कहा कि एक शिक्षक और एक शिष्य का रिश्ता माँ और बच्चे के रिश्ते की तरह पावन होता है। किसी कारण से अगर इस रिश्ते पर सवाल उठता है तो पूरा समाज कटघरे में खड़ा हो जाता है। एक महिला होने के नाते मैं महसूस करती हूं कि किसी व्यक्ति पर जब एक बार चारित्रिक सवाल खड़े हो जाते हैं तो वह कहीं का नहीं रह जाता। इसलिए मेरा यही कहना है कि अगर हर एक बच्चे को सुरक्षित रखना जरूरी है तो उतना ही जरूरी है कि शिक्षकों को भी सुरक्षा दी जाए जिससे वे निर्भीक होकर अपनी भूमिका निभा सकें। कल्पना रावत ने कहा कि मयूर विहार में एक छात्रा के अपने घर पर आत्महत्या करने के मामले में भी बिना किसी जांच के उसके शिक्षकों और स्कूल को जिम्मेदार ठहरा दिया गया। उन्होंने कहा कि उनका सिर्फ यही कहना है कि इन मामलों में किसी को आरोपी बनाने के पहले उचित जांच कर लेनी चाहिए और जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि एक बार किसी निर्दोष अध्यापक को दोषी ठहरा देने के बाद उसके निर्दोष साबित होने पर भी उसका सम्मान वापस नहीं होता। इन घटनाओं के कारण उन्हें सम्मान की बजाय शक की निगाहों से देखा जाने लगता है। इसलिए सरकार से उनकी मांग है कि किसी भी तरह की कार्रवाई के पहले उचित जांच होनी चाहिए।
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