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एड्स के मरीजों की भी इम्युनिटी बढ़ा देती ये चिकित्सा पद्धति, जानें भविष्य चमकाने का अवसर

Fri, 21 Dec 2018 04:51 PM IST
Garima Garg Advertorial
Advertorial Published by: Garima Garg Updated Fri, 21 Dec 2018 04:51 PM IST
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Sanskriti university offering unani medical practice
sanskriti university
शास्त्रों में मनुष्य के लिए पांच प्रकार के सुखों का वर्णन किया गया है। इनमें पहला सुख है- निरोगी काया। मनुष्य का सबसे अनमोल धन है- स्वस्थ  शरीर। अगर किसी व्यक्ति को संपूर्ण संसार का धन मिल जाए और उसका शरीर स्वस्थ न हो उस व्यक्ति के लिए धन का कोई लाभ नहीं। यूं तो पूरी दुनिया में कई चिकित्सा पद्धति हैं, लेकिन सबसे पुरानी भरोसेमंद पद्धति की बात करें तो यूनानी चिकित्सा पद्धति का जिक्र होना स्वाभाविक है। यूनानी चिकित्सा पद्धति को केवल यूनानी या हिकमत के नाम से भी पुकारा जाता है। भारत में 100 से अधिक यूनानी चिकित्सा विश्वविद्यालयों में इस पद्धति की
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शिक्षा प्रदान दी जा रही है। मथुरा की अग्रणी संस्कृति यूनिवर्सिटी में भी यूनानी शिक्षा प्रदान की जा रही है। संस्कृति यूनिवर्सिटी में यूनानी शिक्षा दिए जाने के चलते न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अन्य कई प्रदेशों के छात्र इस चिकित्सा पद्धति की ओर आकर्षित हो रहे हैं।  मौजूदा समय में चिकित्सकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए  संस्कृति विश्वविद्यालय ने यूनानी चिकित्सा पद्धति में (बेचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) बीयूएमएस कोर्स शुरू किया। इसमें युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। सीसीआईएम नई दिल्ली, आयुष मंत्रालय भारत सरकार, एवं उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त है। सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर यूनानी मेडिसिन के अनुसार, यूनानी चिकित्सा पद्धति से मलेरिया, हेपेटाइटिस बी और त्वचा संबंधी कई अन्य जटिल बीमारियों का उपचार अन्य पद्धतियों की तुलना में ज्यादा आसानी से संभव है। यूनानी चिकित्सा पद्धति यूनान से भारत आई और इस चिकित्सा पद्धति के लाभ देखते हुए भारतीय चिकित्सकों ने भी इसे अपनाया। यूनानी दवाएं एड्स के मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कामयाब साबित हो रही हैं। यूनानी चिकित्सा एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिस पर आज भी लोगों का भरोसा कायम है।  अफगानिस्तान, चीन, कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, फिनलैंड सहित करीब 20 देशों में स्थानीय नामों से इसकी शिक्षा प्रदान की जा रही है। भारत में प्रसार के चलते रोजगार और रोग निदान की संभावनाएं बहुत अधिक हैं।
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यूनानी दवा और चिकित्सा पद्धति 12 से 13वीं शताब्दी में भारत पहुंची और मुगलकाल में खूब फली- फूली। यूनानी चिकित्सा पद्धति को एक उत्कृष्ट चिकित्सक हाकिम अजमल खान ने 1868-1927 के
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बीच भारत में प्रचारित-प्रसारित किया। यूनानी चिकित्सा के भीतर मान्यता है कि शरीर अपनी 'स्व उपचार शक्ति' के कारण खुद को फिर से जीवंत कर देता है। संस्कृति विवि का यूनानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल शांत वातावरण में स्थापित है। पाठ्यक्रमों की मांगों को पूरा करने के लिए योग्य फेकल्टी, अत्याधुनिक उपकरणों में एक्सरे, ईसीजी जैसे आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। इलाज- बित- तदबीर और इसके अलावा प्रयोगशाला, वातानुकूलित कक्षा कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, औषधि पहचान के लिए औषधि वाटिका आदि स्थित हैं। अनुसंधान एवं विकास केंद्र के अलावा शिक्षण व चिकित्सा के लिए 100 बिस्तर वाला यूनानी अस्पताल है, जिसमें सभी विभाग और सुविधाएं हैं। विवि प्रबंधन संपूर्ण राष्ट्र की स्वास्थ्य रक्षा की चिंता और इसके समाधान की दिशा में प्रयत्नशील है।

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