{"_id":"5c49b337bdec2225060d73e0","slug":"sanskriti-university-collaborate-with-santhigiri-ashram","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तर भारत में संस्कृति यूनिवर्सिटी की मदद से आयुर्वेद का प्रकाश फैलाएगा शांतिगिरी आश्रम ","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
उत्तर भारत में संस्कृति यूनिवर्सिटी की मदद से आयुर्वेद का प्रकाश फैलाएगा शांतिगिरी आश्रम
Thu, 24 Jan 2019 06:14 PM IST
Garima Garg
Advertorial
Advertorial
Published by: Garima Garg
Updated Thu, 24 Jan 2019 06:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश की जानी-मानी संस्कृति यूनिवर्सिटी और केरल के शांतिगिरी आश्रम (चैरिटेबल ट्रस्ट्र और आध्यात्मिक संगठन) के बीच बेहद अहम करार हुआ है। मकसद है कि उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन में हजारों वर्ष पुराने आयुर्वेद का उजाला भरना। शांतिगिरी आश्रम मथुरा और आसपास के इलाकों में संस्कृति यूनिवर्सिटी की मदद से फ्री मेडिकल कैंप लगाएगा। इससे न केवल रोगियों को आयुर्वेद का लाभ मिलेगा बल्कि संस्कृति यूनिवर्सिटी के बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेद एंड मेडिसिन सर्जरी) के छात्रों को भी काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
शांतिगिरी आश्रम और संस्कृति यूनिवर्सिटी के साथ आने के पीछे सबसे अहम मकसद उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में इलाज से वंचित लोगों को उपचार उपलब्ध कराना है। शांतिगिरी आश्रम आयुर्वेद का लाभ ग्रामीण उत्तर भारत में जन-जन तक पहुंचाना चाहता है, इसी वजह से संस्थान ने संस्कृति यूनिवर्सिटी की मदद ली है। शांतिगिरी आश्रम इस मकसद के लिए राज्य और केंद्र सरकार की मदद से गांव गोद लेने का प्रोग्राम भी शुरू करने जा रहा है। इस कार्य में आश्रम को संस्कृति यूनिवर्सिटी से भी काफी उम्मीदें हैं।
शांतिगिरी आश्रम के विशेषज्ञों को आयुर्वेद के क्षेत्र में महारत हासिल है। हजारों वर्ष पुरानी आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति भले ही उत्तर भारत में आज उस स्तर पर प्रचलन में नहीं है, लेकिन दक्षिण भारत में आज भी यह चलन में है। खासतौर पर केरल, जो कि हजारों साल से नैचुरल मेडिसिन के लिए जाना जाता है। ऐसे में केरल के शांतिगिरी आश्रम के पास मौजूद आयुर्वेद का खजना संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए काफी लाभप्रद साबित होगा।
विज्ञापन
आयुर्वेद की आठ शाखाएं -
1- काया चिकित्सा (General Medicine)
2-बाल रोग चिकित्सा (Paediatrics)
3-गृह चिकित्सा (Treatment for evil spirits)
4- उर्दवंग तंत्र (E.N.T & Ophthalmology)
5- शल्य चिकित्सा ( Surgery)
6-विष चिकित्सा (Toxicology)
7- रसायन चिकित्सा (Rejuvenation Therapy)
8-वाजीकरण चिकित्सा (Aphrodisiacs)
आयुर्वेद के इन आठों भागों में मानव जीवन का समस्त समाधान है। संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों को शांतिगिरी आश्रम की मदद से इन सभी का ज्ञान प्राप्त करने में काफी मदद प्राप्त होगी।
-Advertorial
विज्ञापन
शांतिगिरी आश्रम और संस्कृति यूनिवर्सिटी के साथ आने के पीछे सबसे अहम मकसद उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में इलाज से वंचित लोगों को उपचार उपलब्ध कराना है। शांतिगिरी आश्रम आयुर्वेद का लाभ ग्रामीण उत्तर भारत में जन-जन तक पहुंचाना चाहता है, इसी वजह से संस्थान ने संस्कृति यूनिवर्सिटी की मदद ली है। शांतिगिरी आश्रम इस मकसद के लिए राज्य और केंद्र सरकार की मदद से गांव गोद लेने का प्रोग्राम भी शुरू करने जा रहा है। इस कार्य में आश्रम को संस्कृति यूनिवर्सिटी से भी काफी उम्मीदें हैं।
विज्ञापन
शांतिगिरी आश्रम के विशेषज्ञों को आयुर्वेद के क्षेत्र में महारत हासिल है। हजारों वर्ष पुरानी आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति भले ही उत्तर भारत में आज उस स्तर पर प्रचलन में नहीं है, लेकिन दक्षिण भारत में आज भी यह चलन में है। खासतौर पर केरल, जो कि हजारों साल से नैचुरल मेडिसिन के लिए जाना जाता है। ऐसे में केरल के शांतिगिरी आश्रम के पास मौजूद आयुर्वेद का खजना संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए काफी लाभप्रद साबित होगा।
विज्ञापन
आयुर्वेद की आठ शाखाएं -
1- काया चिकित्सा (General Medicine)
2-बाल रोग चिकित्सा (Paediatrics)
3-गृह चिकित्सा (Treatment for evil spirits)
4- उर्दवंग तंत्र (E.N.T & Ophthalmology)
5- शल्य चिकित्सा ( Surgery)
6-विष चिकित्सा (Toxicology)
7- रसायन चिकित्सा (Rejuvenation Therapy)
8-वाजीकरण चिकित्सा (Aphrodisiacs)
आयुर्वेद के इन आठों भागों में मानव जीवन का समस्त समाधान है। संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों को शांतिगिरी आश्रम की मदद से इन सभी का ज्ञान प्राप्त करने में काफी मदद प्राप्त होगी।
-Advertorial
कमेंट
कमेंट X