आरटीआई में खुलासा: दिल्ली के दो तिहाई स्कूलों में 11वीं-12वीं में नहीं हो रही विज्ञान की पढ़ाई, पढ़ें डिटेल
नाम जाहिर न करने की शर्त पर शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा, 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान विषय पढ़ाना शुरू करने के लिए स्कूल को बुनियादी ढांचे की जरूरत है।
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दिल्ली के स्कूलों में बड़ी लापरवाही की खबर सामने आई है। एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि दिल्ली सरकार के तहत आने वाले केवल एक तिहाई स्कूल कक्षा 11 और 12 के छात्रों को विज्ञान विषय पढ़ा रहे हैं। दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने पीटीआई की ओर से सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर एक आवेदन के जवाब में यह जानकारी दी है।
2015 से 2022 तक इतने स्कूल खुले
आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में शहर में 500 नए स्कूल बनाने का वादा किया था, आरटीआई के अनुसार, फरवरी 2015 और मई 2022 के बीच सिर्फ 63 नए स्कूल खोले हैं। आरटीआई ने 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान और वाणिज्य विषय पढ़ाने वाले दिल्ली सरकार के स्कूलों की संख्या के साथ-साथ शहर में फरवरी 2015 से मई 2022 के बीच सरकार द्वारा खोले गए नए स्कूलों की संख्या के बारे में जानकारी मांगी। जहां 326 विद्यालयों से संबंधित सूचना आरटीआई आवेदन के माध्यम से प्राप्त की गई। वहीं अन्य विद्यालयों का डाटा शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट से एकत्र किया गया।
इतनी है स्कूलों की संख्या
आरटीआई के माध्यम से कुल 838 उच्च माध्यमिक विद्यालयों का डेटा उपलब्ध है। इनमें से केवल 279 स्कूल विज्ञान विषय पढ़ाते हैं और 674 स्कूल कक्षा 11 और 12 के छात्रों को वाणिज्य विषय प्रदान करते हैं। यानी शहर के करीब 66 फीसदी सरकारी स्कूलों में विज्ञान विषय नहीं पढ़ाते जबकि करीब 19 फीसदी दो कक्षाओं में वाणिज्य विषय नहीं पढ़ाए जाते हैं। दिल्ली सरकार के तहत स्कूलों की कुल संख्या 1,047 है, जिसमें माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं।
यहां हालत सबसे खराब
आरटीआई के उत्तर में दी गई जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में मध्य जिले के स्कूलों की स्थिति सबसे खराब है। 31 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में से केवल चार में विज्ञान पढ़ाते हैं और 10 स्कूल वाणिज्य विषय पढ़ाते हैं। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में विज्ञान और वाणिज्य विषयों की अनुपलब्धता को लेकर साल 2017 में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थ। इसमें कहा गया था कि विज्ञान और वाणिज्य के विषयों का आवंटन "असमान तरीके" से किया गया है। यह क्षेत्र के छात्रों के साथ अन्याय है।
याचिका दायर करने वाले ने क्या कहा?
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता युसूफ नाकी ने कहा, मेरी याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था, जिसके जवाब में सरकार ने एक हलफनामा दायर कर कहा था कि वह लगभग करीब 50 स्कूलों में विज्ञान और वाणिज्य विषय पढ़ाना शुरू कर देगी। इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। नाकी के मुताबिक, सरकार ने तब अपने जवाब में कहा था कि 291 सरकारी स्कूलों में विज्ञान विषय पढ़ाए जाते हैं।
अधिकारी क्या बोले
नाम जाहिर न करने की शर्त पर शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा, 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान विषय पढ़ाना शुरू करने के लिए स्कूल को बुनियादी ढांचे की जरूरत है। छात्रों को बैठने के लिए कमरे चाहिए। इसके अलावा भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों के लिए प्रयोगशालाएं भी होनी चाहिए। अधिकारी ने कहा कि यदि विज्ञान से संबंधित विषयों को लेने वाले छात्रों की संख्या इतनी है कि कम से कम एक सेक्शन बनता है, तो स्कूल फाइल को योजना शाखा को भेजते हैं, जिसे मंजूरी मिल जाती है और अन्य आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं। दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल के मुताबिक, प्रयोगशाला, कमरे और शिक्षकों के अलावा, यह भी जरूरी है कि अगर किसी बच्चे को 11वीं कक्षा में विज्ञान और वाणिज्य विषय पढ़ना है, तो कक्षा 10 में उसे कम से कम विज्ञान, गणित और अंग्रेजी में प्रत्येक में 55 प्रतिशत अंक और 50 प्रतिशत अंक मिलने चाहिए। बच्चों को विज्ञान विषय में पर्याप्त अंक नहीं मिल रहे हैं।
पर्याप्त अंक और प्रोत्साहन दोनों ही नहीं
नाम न छापने की शर्त पर प्राचार्य ने कहा, बच्चों को न तो विज्ञान विषय लेने के लिए पर्याप्त अंक मिल रहे हैं और न ही उन्हें विज्ञान विषय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। केएल डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर जेवी षणमुख कुमार ने कहा कि अगर बच्चे उच्च माध्यमिक कक्षाओं में विज्ञान विषय नहीं पढ़ते हैं, तो उनके लिए चिकित्सा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों के दरवाजे बंद हो जाएंगे। छात्र तकनीक या पर्यावरण के क्षेत्र में भी अपना करियर नहीं बना पाएंगे, जबकि भविष्य में इन क्षेत्रों में और नौकरियां होंगी। इसलिए, उच्च माध्यमिक स्तर पर बच्चों को विज्ञान विषयों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
विज्ञान अनुसंधान और नवाचार के लिए आवश्यक
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लावण्या शिवपुरापु ने कहा कि विज्ञान अनुसंधान और नवाचार के लिए आवश्यक है। इंजीनियरों की बहुत आवश्यकता है और COVID-19 महामारी ने साबित कर दिया है कि भारत आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों से निपटने के लिए तैयार नहीं है। हमें मेडिसिन, पैरा मेडिकल और रेडियोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञों की जरूरत है। शिवपुरापु ने कहा कि इन क्षेत्रों में जाने के लिए 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान विषयों का अध्ययन करना होगा।
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