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Hindi News ›   Education ›   Private Schools Nursury admission 2020 guidelines for parents released by Govt Education Directorate

शिक्षा निदेशालय ने चेताया, स्कूलों के बहकावे में न आएं अभिभावक

Mon, 18 Nov 2019 08:04 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Mon, 18 Nov 2019 08:04 AM IST
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Private Schools Nursury admission 2020 guidelines for parents released by Govt Education Directorate
- फोटो : अमर उजाला

निजी स्कूलों की मनमानी के प्रति अभिभावकों को आगाह करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने जरूरी जानकारी दी है। निदेशालय की ओर से कहा गया है कि अभिभावक स्कूलों के बहकावे में न आएं। ये निर्देश निजी स्कूलों में दाखिले को लेकर चलने वाली मनमानी से संबंध में आया है।

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निजी स्कूलों के प्री (प्ले स्कूल) व मॉन्टेसरी स्कूल उनके मुख्य स्कूल का ही हिस्सा होंगे। अगर वह एक ही सोसायटी की ओर से चलाए जा रहे हैैं तो वह अलग-अलग दाखिला प्रक्रिया नहीं चला सकेंगे। हाल ही में शिक्षा निदेशालय की ओर से नर्सरी दाखिले को लेकर जारी की गई गाइडलाइन प्री व मॉन्टेसरी स्कूल पर भी लागू होंगी। 
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दरअसल अभिभावकों की शिकायत रहती हैै कि कई स्कूल प्री स्कूल के दाखिला मानकों का खुलासा नहीं करते हैैं। इस बहाने से वह पीछे के दरवाजे से डोनेशन लेकर दाखिला ले लेते हैं।
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उल्लेखनीय है कि वर्ष 1999 में आदेश दिया गया था कि यदि मुख्य स्कूल व प्री स्कूल को एक ही सोसायटी द्वारा चलाया जा रहा है, तो वह स्कूल अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही माना जाएगा। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि बीते सालों में अभिभावकों की शिकायतें आती रही हैं कि प्री स्कूल में दाखिले के लिए मानक नहीं बताए जाते हैं। स्कूल प्ले स्कूल के नाम पर ही आगे प्रमोट करते हैं। मानक नहीं बनाए जाने से मुख्य स्कूलों में डोनेशन लेकर दाखिला होता है।

किस तरह मनमानी करते हैं स्कूल

यह देखने में आता है कि कई नामी स्कूल अलग-अलग नाम से शाखाएं चलाते हैं। इनकी दाखिला प्रक्रिया भी अलग चलाई जाती है। वहीं कुछ स्कूल बच्चे को मॉन्टेसरी स्कूल से अपने मुख्य स्कूल में प्रमोट नहीं करते हैं। वह अलग से दाखिला प्रक्रिया चलाते हैं या डोनेशन लेकर दाखिला करते हैं। 

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इससे अभिभावकों को दो-दो बार दाखिला कराने की मशक्कत करनी पड़ती है। नर्सरी दाखिले से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि अभिभावकों को स्कूलों के बहकावे में आने की बजाय इस बात की पुष्टि करनी चाहिए कि प्ले स्कूल से बच्चा मुख्य स्कूल में प्रमोट होगा या नहीं। वहीं इस बात की जांच की जानी चाहिए कि प्ले स्कूल बड़े स्कूल का हिस्सा है भी या नहीं। 

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