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पहल : NHRC के दखल से बचीं दो लाख से अधिक शिक्षकों की नौकरियां, शिक्षा मंत्रालय ने दी नियम से छूट

Wed, 28 Sep 2022 09:50 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 28 Sep 2022 09:50 PM IST
सार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के हस्तक्षेप ने देश भर में विभिन्न श्रेणियों के स्कूलों में दो लाख से अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की नौकरियां बचाई हैं।

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NHRC says its intervention saves jobs of more than two lakh primary-level school teachers
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)

विस्तार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के हस्तक्षेप ने देश भर में विभिन्न श्रेणियों के स्कूलों में दो लाख से अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की नौकरियां बचाई हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अधिकार पैनल ने बुधवार को यह दावा किया। आयोग के पैनल ने कहा कि विभिन्न सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के ये शिक्षक कक्षा 12वीं में न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के पात्रता मानदंड को पूरा नहीं करते हैं। जबकि नए नियमों के तहत यह आवश्यक है। 

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एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान (NIOS) को इन शिक्षकों को 31 मार्च, 2019 तक प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी। कई शिक्षकों ने प्रारंभिक शिक्षा में अपना डिप्लोमा पूरा किया, लेकिन जिनके पास 12वीं कक्षा में 50 प्रतिशत अंक नहीं थे, उन्हें एनआईओएस ने डिप्लोमा-सह-प्रमाण पत्र जारी नहीं किया, जिससे उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता था। यह प्रशिक्षण सभी अप्रशिक्षित इन-सर्विस शिक्षकों के लिए वर्ष 2017 में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) अधिनियम में संशोधन के अनुसार आवश्यक था।

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बयान में दावा किया गया कि इस मामले में शिकायत प्राप्त होने पर, आयोग ने पाया कि एनआईओएस ने अपने प्रॉस्पेक्टस में यह निर्दिष्ट नहीं किया था कि प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा करने के लिए सेवारत स्नातक, स्नातकोत्तर शिक्षकों के लिए पात्रता मानदंड 10+2 में 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। इसके अलावा, आयोग ने शिक्षा मंत्रालय को पूरे मुद्दे पर फिर से विचार करने के लिए कहा क्योंकि इससे शिक्षकों के आजीविका के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो अन्यथा स्नातक या स्नातकोत्तर हैं, और सेवा में हैं और यहां तक कि प्राथमिक में अपेक्षित डिप्लोमा भी पास कर चुके हैं। 

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आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने वैधानिक प्रावधानों और जीवन और आजीविका के अधिकार के बीच संतुलन बनाते हुए, उन सभी उम्मीदवारों को इस मानदंड से एकमुश्त छूट दी है, जिन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल (NIOS) से प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा पास किया हुआ है।  
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