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Hindi News ›   Education ›   New session starts in foreign universities from September 1, now Indian students will have to wait a year

विदेशी विश्वविद्यालयों में एक सितंबर से नया सत्र शुरू, भारतीय छात्र नहीं ले सकेंगे दाखिला

Wed, 08 Jul 2020 08:16 AM IST
संजीव कुमार झा सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 08 Jul 2020 08:16 AM IST
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New session starts in foreign universities from September 1, now Indian students will have to wait a year
भारतीय छात्र - फोटो : पीटीआई

कोविड-19 की वजह से स्कूल बोर्ड और कॉलेज परीक्षा में देरी के चलते 2020 सत्र में विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने वाले छात्र अब दाखिला नहीं ले पाएंगे। दरअसल अमेरिका, कनाडा, यूके, आयरलैंड, फ्रांस, स्वीडन, आस्ट्रेलिया आदि देशों में विश्वविद्यालयों में एक सितंबर से नया सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में भारतीय छात्र दाखिले से चूक जाएंगे। उन्हें अब एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा।

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हाई स्ट्रीट इंटरनेशनल एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर सचिन सक्सेना के मुताबिक, विदेशी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्र सितंबर सत्र में ही दाखिला लेते हैं। क्योंकि इस दौरान 12वीं और अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले छात्रों का रिजल्ट जारी हो चुका होता है। इससे पहले वे दाखिले से लेकर वीजा की कार्रवाई पूरी कर लेते हैं। हर साल करीब दो से ढाई लाख छात्र जाते हैं, लेकिन इस बार यह आंकड़ा महज 30 से 40 हजार ही है।
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कोविड-19 के चलते भारत में इस बार 15 जुलाई तक सीबीएसई बोर्ड का 12वीं और अक्तूबर या नवंबर तक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम का रिजल्ट जारी होगा। ऐसे में उनके पास अब जनवरी सत्र में दाखिले का विकल्प होगा। हालांकि जनवरी सत्र में कुछ एक विश्वविद्यालय ही दाखिला ओपन करते हैं।
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अच्छे विकल्प न होने केकारण ही छात्र जनवरी सत्र और मई सत्र में दाखिला नहीं लेते हैं। सभी देशों के विश्वविद्यालयों में नए पूरी सीट पर दाखिले सितंबर में ही होते हैं। इसीलिए इस साल भारतीय छात्र चाहकर भी विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा नहीं कर पाएंगे। भारतीय छात्र को अब एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा।

अमेरिका के नए ऐलान का भारतीय छात्रों पर अधिक फर्क नहीं:
विदेशी यूनिवर्सिटी में दाखिले करवाने वाले एक अन्य मेहता कंपनी के अधिकारी राजीव कुमार का कहना है कि अमेरिका के ऑनलाइन क्लास वाले छात्रों को उनके देश वापस भेजने का भारतीय छात्रों पर अधिक फर्क नहीं पड़ेगा। दरअसल भारतीय छात्र अमेरिका की बजाय अन्य देशों को अधिक तबज्जो देते हैं।

क्योंकि यहां पढ़ाई के साथ पोस्ट स्टडी वर्क परमिट नहीं मिलता है। इसके अलावा वीजा नियमों में भी बेहद सख्ती और बार-बार नियम बदलते हैं। इसी कारण छात्र सिर्फ पढ़ाई के लिए वहां बेहद कम जाते हैं।


 कनाडा, यूके, आयरलैंड, फ्रांस, आस्ट्रेलिया पसंद:
सक्सेना के मुताबिक, छात्र अमेरिका की बजाय कनाडा, यूके, आयरलैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जाना पसंद करते हैं। इन देशों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ एक से चार साल तक पोस्ट स्टडी वर्क परमिट मिलता है। इस कारण छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अन्य खर्चे भी इसी वेतन से निकाल लेते है। इसके अलावा इन देशों में पढ़ाई सस्ती है।

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