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नीट : सुप्रीम कोर्ट ने ओसीआई अभ्यर्थियों को 2021-22 सत्र के लिए सामान्य श्रेणी से काउंसलिंग में भाग लेने की छूट दी

Mon, 08 Nov 2021 10:07 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Mon, 08 Nov 2021 10:07 PM IST
सार

नीट : पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और काउंसलिंग अथॉरिटी इस आदेश को लागू करने के लिए बाध्य हैं। पीठ ने अनुच्छेद-144 का हवाला देते हुए कहा कि सभी सिविल और न्यायिक प्राधिकरणों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करना चाहिए।

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NEET Supreme Court allows OCI candidates to participate in counseling from the general category for the 2021-22 session
NEET Counseling - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने इस बार सभी प्रवासी भारतीय नागरिकों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर काउंसिलंग में सामान्य श्रेणी में शामिल होने की अनुमति दे दी। जस्टिस एसए नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत केवल 2021-22 शिक्षण सत्र के लिए है। 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ याचिकाकर्ता ओसीआई उम्मीदवारों को ही राहत दी थी।

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पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और काउंसलिंग अथॉरिटी इस आदेश को लागू करने के लिए बाध्य हैं। पीठ ने अनुच्छेद-144 का हवाला देते हुए कहा कि सभी सिविल और न्यायिक प्राधिकरणों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करना चाहिए। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया था कि राहत केवल उन याचिकाकर्ताओं तक ही सीमित हो। मेहता ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि हम आवेदनों के अंबार में फंस जाएंगे। उन्होंने कहा कि ओसीआई को सामान्य श्रेणी के बराबर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि उनकी स्थिति अलग है। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी के दूसरे हफ्ते में होगी।
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अधिसूचना पहले जारी होती तो हम नहीं करते हस्तक्षेप
पीठ ने कहा कि उसने केवल शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए राहत दी है। यह आदेश अचानक जारी अधिसूचना को देखते हुए पारित किया गया था। अगर इसे पहले जारी किया गया होता तो अदालत हस्तक्षेप नहीं करती। 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था कि जब दूसरे देश के नागरिकों को बुलाकर भारत की नागरिकता दी जा सकती है तो भारत के प्रवासी नागरिकों (ओसीआई) के साथ अलग रवैया क्यों? शीर्ष अदालत का मानना था कि ऐसे छात्रों को सिर्फ एनआरआई छात्रों की सीटों या कोटा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। पीठ गृह मंत्रालय द्वारा 4 मार्च, 2021 को जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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