NMC Warning: मेडिकल छात्र सावधान! एनएमसी ने चीन के मेडिकल कोर्सेज में दाखिले को लेकर चेताया
National Medical Commission warns Indian Medical students: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने चीन में स्थित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक भारतीय छात्रों को चेतावनी परामर्श जारी किया है। क्योंकि, चीन में कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद 2020 से ही यात्रा और चीनी वीजा प्रतिबंध लागू हैं।
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नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) यानी राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने चीन में स्थित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक भारतीय छात्रों को चेतावनी परामर्श जारी किया है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने अपने परामर्श में कहा है कि कई चीनी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मेडिकल कोर्सेज में विदेशी छात्रों के दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस संदर्भ में कई प्रकार के ऑनलाइन विज्ञापन देखने को मिले हैं। लेकिन भारतीय छात्रों को वहां दाखिले से पहले संबंधित देश में यात्रा प्रतिबंध और वीजा पाबंदियों तथा परामर्श के बारे में जानकारी कर लेनी चाहिए। क्योंकि, चीन में कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद नवंबर 2020 से ही यात्रा और चीनी वीजा प्रतिबंध लागू हैं।
मेडिकल शिक्षा कहां से लें सावधानी से करें चयन : एनएमसी
एनएमसी की सचिव संध्या भुल्लर की ओर से आठ फरवरी, 2022 को जारी एक चेतावनी परामर्श में कहा गया कि संज्ञान में आया है कि चीन के कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने इस सत्र और आगामी सत्र के लिए एमबीबीएस समेत अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में विदेशी छात्रों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। एनएमसी, सचिव भुल्लर ने छात्रों को आगाह करते हुए कहा, वे यह चुनने में सावधानी बरतें कि चिकित्सा शिक्षा कहां से प्राप्त की जाए।
चीनी पाबंदियों के कारण दो साल से नहीं लौट पाए सैकड़ों छात्र
एनएमसी का यह परामर्श ऐसे समय में आया है जब सैकड़ों भारतीय मेडिकल छात्र कोरोना संक्रमण के कारण लागू चीनी यात्रा पाबंदियों के कारण दो साल से वापस चीन नहीं लौट पाए हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। और अभी तक पाबंदियां कब खत्म होंगी, इसे लेकर कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है। उन छात्रों की डिग्रियों और प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यों पर अमान्य होने संकट मंडरा रहा है।
ऑनलाइन पढ़ाई वाली डिग्रियां और पाठ्यक्रम मान्य नहीं
हालांकि, चेतावनी परामर्श पत्र में चीनी अधिकारियों के पिछले बयान का हवाला देते हुए कहा गया है कि कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं। जबकि भारत में नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी की ओर से ऑनलाइन किए गए मेडिकल पाठ्यक्रमों की पढ़ाई को मान्यता नहीं दी गई है। आयोग ऑनलाइन पढ़ाई वाली डिग्रियों और पाठ्यक्रमों को स्वीकार नहीं करता है। पत्र में कहा गया है कि चीन या अन्य देशों से मेडिकल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे छात्रों को दाखिला लेने से पहले एफएमजीई यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम की नियमावली का अध्ययन कर लेना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई
वहीं इधर, चीन में पढ़ रहे 140 से ज्यादा मेडिकल छात्रों को भारत में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की अनुमति देने संबंधी एक याचिका पर गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में ऑनलाइन पढ़ाई को मान्यता देने की भी अनुमति मांगी गई है। याचिका में कहा गया है कि छात्र कोविड-19 यात्रा प्रतिबंधों के कारण चीन स्थित अपने विश्वविद्यालयों में नहीं लौट पाए हैं। इसलिए, उन्हें भारत में ही अपना प्रायोगिक प्रशिक्षण पूरा करने की इजाजत दी जाए साथ ही उनकी ऑनलाइन कक्षाओं को स्वीकार कर उनकी मेडिकल डिग्रियों को मान्यता प्रदान की जाए। मामले में आगे की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग से उनका जवाब मांगा।
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