63 साल पुराने MCI की जगह बनेगा नेशनल मेडिकल कमीशन, लोकसभा में विधेयक पेश
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63 साल पुराने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को हटाकर, उसकी जगह नेशनल मेडिकल कमीशन (एनसीएम) बनाने के लिए सोमवार को लोकसभा में विधेयक 2019 पेश किया गया। इसमें मेडिकल की शिक्षा, चिकित्सा वृति और मेडिकल संस्थाओं के विकास और नियमन के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) गठित करने का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने यह विधेयक पेश किया।
विधेयक में हैं ये कुछ अहम प्रस्ताव
- इस विधेयक में देश में मेडिकल की शिक्षा को एक समान बनाने का प्रस्ताव है।
- मेडिकल के पीजी कोर्सेज में दाखिले के लिए नीट खत्म कर एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के परिणाम को आधार बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही विदेशों से एमबीबीएस करने वालों को पीजी में दाखिला देने के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट (NEXT) का प्रावधान प्रस्तावित है।
- एमबीबीएस और पीजी कोर्सेज में 50 फीसदी सीटों के लिए फीस के नियंत्रण का भी प्रावधान किया गया है।
- विधेयक में आयोग को सलाह देने और सिफारिशें करने के लिए एक आयुर्विज्ञान सलाहकार परिषद के गठन का भी प्रस्ताव है।
- साढ़े तीन लाख गैर चिकित्सकीय व्यक्ति को आधुनिक दवा के साथ मेडिकल प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस देने का प्रावधान है।
नेशनल मेडिकल कमीशन में 29 सदस्य होंगे, जिनमें से 20 नॉमिनेशन और 9 चुनाव के जरिए आएंगे।
बता दें कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से संबंधित संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी 92वीं रिपोर्ट में आयुर्विज्ञान शिक्षा और चिकित्सा व्यवसाय की विनियामक पद्धति का पुनर्गठन और सुधार की सिफारिश की है। यह सिफारिश डॉ. रंजीत राय चौधरी की अध्यक्षता वाले विशेष समूह द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में मॉडर्न डेंटल कालेज रिसर्च सेंटर व अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में 02 मई 2016 को केंद्र सरकार को राय चौधरी समिति की सिफारिशों पर विचार करने और समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
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इन सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में 29 दिसंबर 2017 को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक 2017 दोबारा स्थापित किया गया था। इसे बाद में विचार के लिए संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया। स्थायी समिति ने बाद में इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 28 मार्च 2018 को लोकसभा में लंबित विधेयक के संबंध में आवश्यक शासकीय संशोधन प्रस्तुत किया था। लेकिन इसे विचार एवं पारित किए जाने के लिए नहीं लाया जा सका। फिर 16वीं लोकसभा के विघटन के बाद यह समाप्त हो गया।
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