फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   National Medical Commision NMC Bill introduced in Loksabha, know its provisions

63 साल पुराने MCI की जगह बनेगा नेशनल मेडिकल कमीशन, लोकसभा में विधेयक पेश

Mon, 22 Jul 2019 06:18 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Mon, 22 Jul 2019 06:18 PM IST
विज्ञापन
National Medical Commision NMC Bill introduced in Loksabha, know its provisions
फाइल फोटो - फोटो : PTI

63 साल पुराने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को हटाकर, उसकी जगह नेशनल मेडिकल कमीशन (एनसीएम) बनाने के लिए सोमवार को लोकसभा में विधेयक 2019 पेश किया गया। इसमें मेडिकल की शिक्षा, चिकित्सा वृति और मेडिकल संस्थाओं के विकास और नियमन के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) गठित करने का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने यह विधेयक पेश किया।

विज्ञापन


विधेयक में हैं ये कुछ अहम प्रस्ताव

  • इस विधेयक में देश में मेडिकल की शिक्षा को एक समान बनाने का प्रस्ताव है। 
  • मेडिकल के पीजी कोर्सेज में दाखिले के लिए नीट खत्म कर एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के परिणाम को आधार बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही विदेशों से एमबीबीएस करने वालों को पीजी में दाखिला देने के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट (NEXT) का प्रावधान प्रस्तावित है।
  • विज्ञापन
  • एमबीबीएस और पीजी कोर्सेज में 50 फीसदी सीटों के लिए फीस के नियंत्रण का भी प्रावधान किया गया है। 
  • विधेयक में आयोग को सलाह देने और सिफारिशें करने के लिए एक आयुर्विज्ञान सलाहकार परिषद के गठन का भी प्रस्ताव है।
  • साढ़े तीन लाख गैर चिकित्सकीय व्यक्ति को आधुनिक दवा के साथ मेडिकल प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस देने का प्रावधान है। 
  • विज्ञापन
    विज्ञापन

नेशनल मेडिकल कमीशन में 29 सदस्य होंगे, जिनमें से 20 नॉमिनेशन और 9 चुनाव के जरिए आएंगे।

बता दें कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से संबंधित संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी 92वीं रिपोर्ट में आयुर्विज्ञान शिक्षा और चिकित्सा व्यवसाय की विनियामक पद्धति का पुनर्गठन और सुधार की सिफारिश की है। यह सिफारिश डॉ. रंजीत राय चौधरी की अध्यक्षता वाले विशेष समूह द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में मॉडर्न डेंटल कालेज रिसर्च सेंटर व अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में 02 मई 2016 को केंद्र सरकार को राय चौधरी समिति की सिफारिशों पर विचार करने और समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

ये भी पढ़ेंः पहले राउंड की काउंसलिंग के बाद रद्द हुए मेडिकल के दाखिले, अब ये है प्रवेश का नया शेड्यूल

इन सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में 29 दिसंबर 2017 को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक 2017 दोबारा स्थापित किया गया था। इसे बाद में विचार के लिए संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया। स्थायी समिति ने बाद में इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 28 मार्च 2018 को लोकसभा में लंबित विधेयक के संबंध में आवश्यक शासकीय संशोधन प्रस्तुत किया था। लेकिन इसे विचार एवं पारित किए जाने के लिए नहीं लाया जा सका। फिर 16वीं लोकसभा के विघटन के बाद यह समाप्त हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed