MIT Provost: एमआईटी में पहली बार भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर बने प्रोवोस्ट; अनंथा चंद्रकासन को मिली जिम्मेदारी
Prof. Ananth Chandrakasan: मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने प्रो. अनंथा चंद्रकासन को नया प्रोवोस्ट नियुक्त किया है। वे इस प्रतिष्ठित पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। जानिए उनकी यात्रा और नई जिम्मेदारियां...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Prof. Anand Chandrakasan: अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने एक नया इतिहास रचते हुए प्रोफेसर अनंथा चंद्रकासन को अपना नया प्रोवोस्ट नियुक्त किया है। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। चेन्नई में जन्मे प्रो. चंद्रकासन फिलहाल MIT के डीन ऑफ इंजीनियरिंग और चीफ इनोवेशन एंड स्ट्रैटेजी ऑफिसर हैं। वे 1 जुलाई 2025 से अपनी नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।
MIT में प्रोवोस्ट की भूमिका क्या होती है?
MIT प्रोवोस्ट संस्थान का मुख्य अकादमिक और बजट अधिकारी होता है। यह पद शैक्षणिक नीतियों, फैकल्टी नियुक्तियों, संस्थान की रणनीति और शैक्षणिक इकाइयों के समन्वय में अहम भूमिका निभाता है। इस पद को MIT की रीढ़ कहा जाता है।
क्यों चुना गया अनंथा चंद्रकासन को?
एमआईटी के अध्यक्ष सैली कॉर्नब्लथ ने घोषणा करते हुए कहा कि चंद्रकासन को उत्कृष्ट आंतरिक उम्मीदवारों के एक समूह से चुना गया था और वे इस पद पर संस्थान के लिए महत्वपूर्ण नवाचारों को आकार देने और उनका नेतृत्व करने का एक असाधारण रिकॉर्ड लेकर आए हैं।
कॉर्नब्लथ ने उल्लेख किया कि चंद्रकासन एमआईटी के लिए एक ऐसे "खतरनाक" समय में प्रोवोस्ट की भूमिका में कदम रख रहे हैं, जब इसकी कुछ सबसे बुनियादी परिचालन धारणाएं- जिसमें अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार के अपने मिशन के लिए व्यापक संघीय समर्थन पर भरोसा करने और दुनिया भर से शानदार प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने की एमआईटी की क्षमता शामिल है - अब अनिश्चित हैं। उन्होंने कहा, "इस तरह के तीव्र दबाव और संभावित ऐतिहासिक बदलाव के समय में, मैं विशेष रूप से आभारी हूं कि हम अनंथा के अनुभव की गहराई और चौड़ाई; उनकी चपलता, उद्यमशीलता की भावना और असीम ऊर्जा; महत्वपूर्ण विचारों के लिए बाहरी स्रोतों से धन जुटाने में उनके उल्लेखनीय रिकॉर्ड; और एमआईटी के मिशन के प्रति उनकी गहन प्रतिबद्धता का लाभ उठा पाएंगे।"
प्रोफेसर चंद्रकासन का विजन
प्रोफेसर चंद्रकासन ने कहा, “मैं इस जिम्मेदारी को पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मेरा लक्ष्य छात्रों, फैकल्टी, पोस्टडॉक्स और स्टाफ के नवाचार को बढ़ावा देना है।” उन्होंने बताया कि वे विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के लीडर्स से मिलकर उनकी चुनौतियों को समझने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, वे एक फैकल्टी एडवाइजरी ग्रुप और स्टूडेंट-पोस्टडॉक समूहों का गठन भी करेंगे।
शैक्षिक और प्रशासनिक सफर
अनंथा चंद्रकासन का शैक्षिक और प्रशासनिक सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में बीएस, एमएस और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एमआईटी में अपना शैक्षणिक करियर शुरू किया और वर्ष 2006 से 2011 तक वे Microsystems Technology Laboratories (MTL) के निदेशक रहे। इसके बाद, 2011 से 2017 तक उन्होंने एमआईटी के सबसे बड़े अकादमिक विभाग इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस (EECS) का नेतृत्व किया। उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें 2017 में एमआईटी का डीन ऑफ इंजीनियरिंग नियुक्त किया गया। नवाचार और रणनीति में उनके उत्कृष्ट योगदान के चलते वर्ष 2024 में उन्हें एमआईटी का पहला Chief Innovation and Strategy Officer बनाया गया। अब वे 2025 से एमआईटी के प्रोवोस्ट के रूप में एक और नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
भारत से संबंध और टेक्नोलॉजी सहयोग
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने चंद्रकासन को बधाई देते हुए कहा कि वे भारत-अमेरिका टेक्नोलॉजी और R&D सहयोग के प्रबल समर्थक रहे हैं। वे भारत सरकार और निजी क्षेत्र के कई संस्थानों के साथ मिलकर काम करते रहे हैं।
भविष्य की दिशा: AI, क्वांटम, बायोमैन्युफैक्चरिंग
चंद्रकासन ने कहा, “MIT को ऐसे क्षेत्रों में केंद्र बनाना है जिनमें अमेरिका वैश्विक लीडर बनना चाहता है- जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर्स, और बायोसाइंस। इसके लिए STEM और ह्यूमैनिटीज का सहयोग बहुत जरूरी है।”
कमेंट
कमेंट X