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Maths Learning Through AI: मैथ्स में कमजोर छात्र न हो परेशान, इन सात तरीकों से गणित की बुनियाद मजबूत करेगा एआई
Thu, 20 Jun 2024 04:59 PM IST
शाहीन परवीन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शाहीन परवीन
Updated Thu, 20 Jun 2024 04:59 PM IST
सार
Maths Learning Through AI: अक्सर गणित में छात्र-छात्राओं को दिक्कत इसलिए आती है अगर आप कभी गणित करते समय खुद को खोया हुआ या अटका हुआ पाते हैं, तो एआई निश्चित रूप से आपकी मदद करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सात तरीकों से गणित की बुनियाद मजबूत करने का काम कर रहा है।
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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
Maths Learning Through AI: जो बच्चे गणित में कमजोर होते हैं या उन्हें गणित सीखने में परेशानी होती है, वे साल-दर-साल इस विषय से दूर होते चले जाते हैं। हालांकि, 10वीं और खासकर 12वीं के बाद होने वाली कई तरह की प्रवेश परीक्षाओं में उन्हें गणित से जूझना होता है। छात्र-छात्राओं को यह दिक्कत इसलिए आती है क्योंकि कई संस्थानों में गणित सिखाने के लिए शिक्षकों और छात्रों के बीच 1:1 का अनुपात नहीं है।
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साथ ही हर बच्चे की सीखने-समझने की क्षमता के विपरीत एक मानक पाठ्यक्रम या स्टडी मटेरियल होता है, जिसे पढ़ना होता है। इन चुनौतियों से पार पाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अहम भूमिका निभा रहा है।
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हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट और प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन के एक संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे 92 फीसदी नॉलेज वर्कर्स AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि दुनिया में यह आंकड़ा भारत से कम यानी 75 फीसदी ही है। भारत में AI के इस्तेमाल में अहम हिस्सेदारी शिक्षा क्षेत्र की भी है।
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इस बारे में जानने के लिए हमने IIT के पूर्व छात्र और Khare.AI स्टार्टअप की शुरुआत करने वाले असीम खरे से बात की। उन्होंने बताया कि मौजूदा दौर में AI ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। यह उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को किफायती और सुलभ बना रहा है। व्यक्तिगत शिक्षण, हर दिन के अभ्यास, उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक और सेल्फ स्टडी की सुविधाओं के माध्यम से AI छात्रों की पढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस प्रकार, AI न केवल वर्तमान में, बल्कि भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सुधार की संभावनाओं को रेखांकित कर रहा है।
असीम खरे बताते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकें न केवल शिक्षा को ज्यादा आसान और असरदार बना रही हैं, बल्कि यह छात्रों की पढ़ाई के तरीके को भी बदल रही हैं। पर्सनल स्टडी, बच्चों के सवालों पर शिक्षकों की तरफ से तुरंत जवाब, सेल्फ स्टडी को प्रोत्साहन, समय प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच, भाषा अनुवाद और आपके प्रदर्शन के विश्लेषण जैसे कई पहलुओं में AI छात्रों की मदद कर रहा है।
हमने हमारी पहल के जरिए गणित की पढ़ाई को एक नए दौर में ले जाने की कोशिश की है। AI के जरिए शिक्षकों द्वारा छात्रों की गणित की बुनियाद को मजबूत किया जा रहा है। इससे गणित को समझने में बच्चों को मदद मिल रही है। उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है। इससे उन्हें प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता पाने में मदद मिल रही है।
इन सात तरीकों से बच्चों की कैसे मदद करता है एआई
खरे बताते हैं कि AI के जरिए अगर आप गणित सीखते हैं तो इससे तीसरी कक्षा से लेकर 10वीं तक और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक काफी मदद मिल जाती है। AI के फायदे को कुछ उदाहरणों के जरिए समझ सकते हैं।1. आपकी जरूरत के मुताबिक पढ़ाई यानी पर्सनलाइज्ड लर्निंग
एआई की मदद से प्रत्येक छात्र की क्षमता, रुचि और जरूरतों के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है। इससे 1:1 पढ़ाई संभव हो पाती है। यानी हर एक छात्र के लिए एक शिक्षक उपलब्ध कराना आसान हो जाता है।
AI ने 'एक छात्र के लिए एक शिक्षक' के मॉडल को आसान बनाया है। विभिन्न क्विज और एनालिसिस के माध्यम से यह बच्चे के स्तर का पता लगाता है और सीखने की उसकी क्षमता को बताता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बच्चे को कठिनता के किस स्तर से पढ़ाना है। इससे समय की बचत होती है और संसाधनों का सदुपयोग किया जा सकता है। इससे पाठ्यक्रम के निर्धारण में भी मदद मिलती है। यह छात्रों की कमजोरियों और ताकतों को पहचान कर उन्हें बेहतर शिक्षा प्रदान करता है।
2. नोटिफिकेशन, वर्कशीट
AI छात्रों को सतत अभ्यास के लिए भी प्रेरित करता है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे की दोपहर तीन बजे की क्लास है तो AI उससे पहले ही नोटिफिकेशन भेजना शुरू कर देता है। क्लास को समय पर जॉइन करने के लिए अलर्ट देता है। साथ ही, क्लास खत्म होने के बाद बच्चे के लिए वर्कशीट भी तैयार करके देता है। पठन-पाठन के दौरान एआई साप्ताहिक आधार पर बच्चे के प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है।
3. तत्काल प्रतिक्रिया
पारंपरिक कक्षाओं में छात्रों को अपने सवालों के जवाब पाने के लिए इंतजार करना पड़ता है, लेकिन AI यह काम तुरंत कर देता है। AI आधारित टूल्स छात्रों को उनके असाइनमेंट्स और परीक्षाओं पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हैं, जिससे वे अपनी गलतियों को तुरंत सुधार सकते हैं।
4. सेल्फ स्टडी को बढ़ावा देना
AI छात्रों को स्व-अभ्यास के लिए प्रेरित करता है। एआई-आधारित एप्स और टूल्स नियमित अभ्यास और सेल्फ स्टडी की आदत विकसित करने में मदद करते हैं। यह छात्रों को आत्मनिर्भर बनाता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
5. समय की बचत
AI आधारित तकनीकें छात्रों को समय का बेहतर प्रबंधन करने में मदद करती हैं। इससे छात्रों के लिए अध्ययन की योजनाएं बना सकते हैं, जिससे छात्रों को यह पता चलता है कि उन्हें किस टॉपिक पर कितना समय देना चाहिए।
6. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच
AI ने उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को भी अब बेहतरीन शिक्षा मिल सकती है, क्योंकि AI आधारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने भौगोलिक बाधाओं को तोड़ दिया है।
7. विश्लेषण और सुधार
AI आधारित एनालिटिकल टूल्स छात्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हैं और उन क्षेत्रों की पहचान करते हैं जहां सुधार की आवश्यकता है। यह शिक्षकों और छात्रों दोनों को यह समझने में मदद करता है कि किस क्षेत्र में अधिक ध्यान देना चाहिए।
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