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Mandatory PhD: सहायक प्राध्यापक नियुक्ति की पात्रता में पीएचडी की अनिवार्यता पर बोले केंद्रीय शिक्षा मंत्री, कहा- यह हमारे सिस्टम के अनुकूल नहीं

Tue, 09 Nov 2021 10:39 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Tue, 09 Nov 2021 10:39 PM IST
सार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, हमारा मानना है कि विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं है। यदि अच्छी प्रतिभा को अध्यापन की ओर आकर्षित करना है तो यह स्थिति नहीं रखी जा सकती।

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Mandatory PhD not favorable for recruitment of assistant professors says Education Minister
केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वर्तमान भारतीय शिक्षा व्ययवस्था और विश्वविद्यालयों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बहुत बड़ी बात कही है। उन्होंने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में पीएचडी अनिवार्यता और अनुकूलता पर सवाल खड़े किए हैं।

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केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए पीएचडी अनिवार्यता वर्तमान शिक्षा प्रणाली के तहत अनुकूल नहीं है। 
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लगभग एक माह पहले ही यूजीसी ने 2023 तक सहायक प्रोफेसरों की भर्ती के लिए डिग्री को अनिवार्य करने के कदम को टालने का फैसला किया था। इस संदर्भ में प्रधान ने सोमवार को कहा कि विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य करना वर्तमान शिक्षा प्रणाली में "अनुकूल नहीं" है।

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। - फोटो : प्रयागराज

एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के स्तर पर आवश्यक
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान बोलते हुए, प्रधान ने कहा, हमारा मानना है कि सहायक प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं है। यदि अच्छी प्रतिभाओं को अध्यापन की ओर आकर्षित करना है तो यह स्थिति नहीं रखी जा सकती। हां, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के स्तर पर इसकी आवश्यकता है। लेकिन एक सहायक प्रोफेसर के लिए पीएचडी शायद हमारे सिस्टम में अनुकूल नहीं है और इसलिए हमने इसे ठीक किया है।

2018 में किया था फैसला
2018 में, यूजीसी ने निर्धारित किया था कि जुलाई 2021 से सहायक प्रोफेसरों के रूप में सीधी भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य होगी। हालांकि, इस साल 12 अक्तूबर को, यूजीसी ने एक परिपत्र जारी कर कहा कि उसने अनिवार्य योग्यता के रूप में पीएचडी की प्रयोज्यता की तारीख को 01 जुलाई 2021 से 01 जुलाई 2023 तक बढ़ाने का फैसला किया है। 

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पंडित दीन दयाल उपाध्याय - फोटो : twitter/BJP4India

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में डीडीयू चेयर की स्थापना 
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर एक कुर्सी होगी, यह कहते हुए कि कुर्सी पर काम करने वाले शिक्षाविद गरीबों के उत्थान पर शोध करेंगे। 

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