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Chennai: विवाद के बाद मद्रास विश्वविद्यालय में "ईसाई धर्म के प्रसार" पर व्याख्यान रद्द, एबीवीपी ने किया विरोध

Tue, 11 Mar 2025 05:47 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 11 Mar 2025 05:47 PM IST
सार

Chennai: मद्रास विश्वविद्यालय में 14 मार्च को प्रस्तावित "भारत में ईसाई धर्म का प्रसार" विषयक व्याख्यान एबीवीपी और हिंदू संगठनों के विरोध के बाद रद्द कर दिया गया। सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद प्रशासन ने इसे बिना अनुमति आयोजित बताया और रद्द करने का निर्णय लिया।
 

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Madras University Cancels Lecture on Christian Proselytization After ABVP Protest and Social Media Outrage
University of Madras - फोटो : Official Website (unom.ac.in)

विस्तार

Chennai: मद्रास विश्वविद्यालय में 14 मार्च को आयोजित होने वाला "भारत में ईसाई धर्म के प्रसार के तरीके" विषय पर व्याख्यान, भारी विरोध और सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद रद्द कर दिया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर भाजपा के प्रदेश सचिव एसजी सूर्या ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कड़ी आलोचना की।

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हैदराबाद के मुख्य अभियंता के शिव कुमार को मद्रास विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग द्वारा 2024-2025 के सर एस सुब्रमण्यम अय्यर बंदोबस्ती व्याख्यान के तहत बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस व्याख्यान का विषय "भारत में ईसाई धर्म का प्रसार कैसे किया जाए" और "इस मार्गम की आवश्यकता क्यों है" था।
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कार्यक्रम का निमंत्रण सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, बड़ी संख्या में लोगों ने इसे लेकर विरोध जताया। आलोचकों ने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया कि यह एक शैक्षणिक संस्थान होते हुए भी किसी विशेष धर्म के प्रचार का मंच बन रहा है।
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विवाद के बाद, मद्रास विश्वविद्यालय ने व्याख्यान को रद्द करने का फैसला किया। 7 मार्च को राजभवन को भेजे गए पत्र में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर एस एलुमलाई ने स्पष्ट किया कि प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग ने इस विषय पर व्याख्यान आयोजित करने की पूर्व स्वीकृति विश्वविद्यालय से नहीं ली थी।

एबीवीपी ने व्याख्यान को धार्मिक प्रचार करार दिया

रजिस्ट्रार ने बताया कि स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारी को तुरंत व्याख्यान रद्द करने का निर्देश दिया गया। इसी दिन, पूछताछ के बाद, प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग के स्कूल ऑफ हिस्टोरिकल स्टडीज के अध्यक्ष और प्रभारी प्रमुख एसोसिएट प्रोफेसर जे सुंदरराजन ने रजिस्ट्रार को सूचित किया कि "प्रशासनिक कारणों" से 2024-2025 के लिए यह व्याख्यान रद्द कर दिया गया है।

एबीवीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर दावा किया कि उनकी पहल के कारण मद्रास विश्वविद्यालय में इस तरह के धार्मिक व्याख्यान को रोका जा सका। संगठन ने कहा कि "भारत में ईसाई धर्म का प्रसार कैसे किया जाए" जैसे विषय किसी राज्य विश्वविद्यालय में उपयुक्त नहीं हैं और इन्हें धार्मिक प्रचार की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

एबीवीपी के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम को रद्द करने का निर्णय लिया। संगठन ने इसे विश्वविद्यालयों में "पक्षपातपूर्ण विचारधाराओं के प्रसार को रोकने के लिए अपनी प्रतिबद्धता" का प्रमाण बताया।

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