ICAN पैनल का आकलन : राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, भारत-पाक में बालिका शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा
भारत और पाकिस्तान दोनों देश साथ आजाद हुए थे, लेकिन आज दोनों देशों की शिक्षा व्यवस्था में रात-दिन का अंतर है। हालांकि, लड़कियों की पढ़ाई के मामले में दोनों देशों में सबसे बड़ी बाधा राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। यह आकलन आईसीएएन के विशेषज्ञ पैनल का है।
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भारत और पाकिस्तान दोनों देश साथ आजाद हुए थे, लेकिन आज दोनों देशों की शिक्षा व्यवस्था में रात-दिन का अंतर है। हालांकि, लड़कियों की पढ़ाई के मामले में दोनों देशों में सबसे बड़ी बाधा राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। यह आकलन आईसीएएन के विशेषज्ञ पैनल का है।
डीएमई मीडिया स्कूल, नोएडा की ओर से आईसीएएन 5 अंतरराष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन के तहत मंगलवार, छह जुलाई को 'लाहौर-दिल्ली डॉक्यूमेंट्री फिल्म्स वर्कशॉप' आयोजित की गई। इस दौरान विभिन्न प्रकार की डॉक्यूमेंट्री और लड़कियों की शिक्षा के मुद्दे पर चर्चा की गई। अमर उजाला इस कार्यक्रम से बतौर मीडिया पार्टनर जुड़ा है।
कार्यशाला की शुरुआत डीएमई के स्टूडियो-62 में दो डॉक्यूमेंट्री - 'कन्याशाला' और 'पाकिस्तान: शिक्षा और महिला' की स्क्रीनिंग के साथ हुई। इस दौरान पैनल डिस्कशन भी हुआ, जिसमें पाकिस्तान से भी दो फिल्म निर्माता ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन आईसीएएन 5 के दौरान के सातवें तकनीकी सत्र में 'मेटावर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेक न्यूज और पत्रकारिता में समावेशिता' आदि विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इन दोनों कार्यक्रमों के अलावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन आईसीएएन-5 के दौरान पीआर उद्योग में विविधता, समानता और समावेशिता पर चर्चा की गई। इसके तहत देश-विदेश की जानी-मानीं पीआर प्रोफेशनल्स ने पैनल डिस्कशन में भाग लिया।
डॉक्यूमेंट्री निर्माण और बालिका शिक्षा पर हुआ विमर्श
पैनल डिस्कशन सत्र की शुरुआत करते हुए टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया की प्रोफेसर और बेनेट यूनिर्वसिटी के वूमेंस डेवलपमेंट सेल की चेयरमैन डॉ गौरी चक्रवर्ती ने भारत और पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा से संबंधित चिंताओं के बारे में बात की। वहीं, डॉक्यूमेंट्री बनाने के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में बोलते हुए बीकनहाउस नेशनल यूनिवर्सिटी, पाकिस्तान के स्कूल ऑफ एमएमसी में एसोसिएट प्रोफेसर और सह-अध्यक्ष जेंडर एवं कम्युनिकेशन सेक्शन आईएएमसीआर के डॉ वजीहा रजा रिजवी ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए रिसर्च करना, शूटिंग से पहले स्थानों का दौरा करना और विषय की पृष्ठभूमि का गहन अध्ययन करना बेहद जरूरी है। ऐसा करके आप अपने काम को महत्व दे सकते हैं।
विषय से जुड़ाव सबसे जरूरी : डॉ आराधना
वहीं, IWART इंडिया चैप्टर की मैनेजिंग ट्रस्टी और भारतीय फिल्म निर्माता डॉ आराधना कोहली कपूर ने अपने वक्तव्य के दौरान संवेदनशील मुद्दों के दस्तावेजीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमूल्य जानकारी दी। डॉ आराधना ने कहा कि हमें परिवेश के साथ एक बंधन बनाने की जरूरत है। विषय से जुड़ाव सबसे जरूरी है, क्योंकि यह आपकी जमीनी वास्तविकताओं पर पकड़ मजबूत करता है।
सबसे बड़ा मुद्दा सामाजिक बाधाएं : नसीरा हबीब
खोज-सोसाइटी फॉर पीपुल्स एजुकेशन, पाकिस्तान की संस्थापक और निदेशक नसीरा हबीब ने पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं और चिंता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण दृष्टिकोण की बात यह है कि लड़कियों की शिक्षा, लड़कों की शिक्षा से कैसे अलग है? उन्होंने कहा, हम हमेशा संख्या और सुविधाओं के बारे में बात करते हैं लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा सामाजिक बाधाएं हैं।
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी मूल कारण
अंत में, डीएमई मीडिया स्कूल के प्रोफेसर और डीन तथा आईसीएएन-5 के संयोजक डॉ अंबरीश सक्सेना ने एक महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाला कि कैसे पूरा समाज लड़कियों को शिक्षित करने में विफल रहा है। इसका जवाब देते हुए नसीरा ने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी इस मुद्दे का मूल कारण है। वहीं, डॉ सुष्मिता बाला, प्रोफेसर और प्रमुख, डीएमई मीडिया स्कूल और आईसीएएन-5 की मुख्य सहयोगी संयोजक ने कहा कि लड़कियों की शिक्षा के मिशन को शक्ति देने के लिए पुरुष शिक्षा को भी समानांतर रूप से केंद्रित किया जाएगा।
सातवें तकनीकी सत्र में मेटावर्स पर हुई चर्चा
इससे पूर्व, सातवें तकनीकी सत्र में 'मेटावर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेक न्यूज और पत्रकारिता में समावेशिता' पर विचार-विमर्श किया गया। इसकी अध्यक्षता अजिंक्य डीवाई पाटिल विश्वविद्यालय, पुणे के स्कूल ऑफ फिल्म एंड मीडिया की प्रमुख प्रोफेसर (डॉ) मंजू रुघवानी ने की। जबकि सत्र की सह-अध्यक्षता मोहम्मद कामिल, सहायक प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल ने की। अपने उद्घाटन भाषण में, डॉ सक्सेना ने कहा कि एआई और मेटावर्स जैसी तकनीकी प्रगति से अवसरों के नए द्वार खुलेंगे। वहीं, हमें इसके नकारात्मक प्रभावों के बारे में भी सतर्क रहना होगा।
प्रोक्सिमिटी मीडिया, क्रॉफ्ट जनर्लिज्म एंड डेमोक्रेसी पर प्रजंटेशन
सत्र के मुख्य आकर्षण में नेशनल सैन लुइस यूनिर्वसिटी, अर्जेंटीना के संस्थान आईसीएईएस के सर्जियो रिकार्डो क्विरोगा द्वारा 'Proximity Media, Craft Journalism and Democracy प्रोक्सिमिटी मीडिया, क्रॉफ्ट जनर्लिज्म एंड डेमोक्रेसी' विषय पर प्रस्तुति थी। इस प्रजंटेशन के बाद डॉ मंजू रुघवानी ने सभी शोधकर्ताओं को एआई आधारित शोध निष्कर्ष और फेक न्यूज की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए मददगार अतिरिक्त सुझाव दिए। सत्र का समापन पर डॉ सुष्मिता बाला ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
चौथे दिन पीआर इंडस्ट्री पर हुई पैनल चर्चा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन के चौथे दिन आईसीएएन-5 का समापन पीआर इंडस्ट्री में विविधता (Diversity), समानता (Equity) और समावेशिता (Inclusivity) पर वैश्विक रूप से समृद्ध पैनल चर्चा के साथ हुआ, जहां महिला पेशेवरों ने DEI के वैचारिक और एग्जीक्यूटिव संबंधी पहलुओं के बारे में बात की। इस सत्र का संचालन न्यू जर्सी, यूएसए की प्रख्यात पीआर प्रोफेशनल और लेखक कैथरीन लैंसियोनी द्वारा किया गया था, जबकि पैनल में ओम्नीकॉम पब्लिक रिलेशंस ग्रुप, इटली से पाओला चियासेरिनी, मिस्र की सहायक पर्यटन मंत्री लामिया कामेल, सिंगापुर की मुख्य संचार अधिकारी राम्या चंद्रशेखरन के साथ ही देश से पीआर प्रोफेशनल एवं शोधकर्ता डॉ पूजा अरोड़ा शामिल हुईं थीं।
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